Uttar Pradesh

एक ऐसा गांव जहां दीपावली पर मनाते है शोक, सैकड़ों वर्षों से निभा रहे परंपरा, जाने वजह…

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मिर्जापुर – दीपावली खुशियों का पर्व है। प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने पर दिवाली का जश्न मनाया जाता है। आज भी भारत ही नहीं, दुनिया में जहां-जहां भारतीय बसे हैं, वो इस पर्व पर लक्ष्मी पूजा, दीपोत्सव, आतिशबाजी या लाइटें जलाकर बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। मगर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में एक ऐसा भी समुदाय है जो इस त्योहार के दिन खुशियां मनाने के बजाय दुख मनाता है। इस समाज के लोग सैकड़ों वर्षों से यह परंपरा निभाते आ रहे हैं। यहां दीपावली के दिन कोई जश्न नहीं मनाया जाता हैं।

बता दें, मिर्जापुर जनपद के मड़िहान तहसील के अंतर्गत अटारी गांव है। इस गांव के आस-पास बसे लगभग आधा दर्जन गांव में रहने वाले चौहान समाज के लोग दीपावली का पर्व नहीं मनाते। गांवों में बसे चौहान समाज के लोग खुद को अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वी राज चौहान का वशंज बताते हैं। चौहान समाज के लोगों का मानना है कि दीपावली के दिन ही मोहम्मद गोरी ने सम्राट पृथ्वी राज चौहान की हत्या की थी। इतना ही नहीं गोरी ने शव को गंधार में ले जाकर दफनाया भी था। इस वजह से लोग इस दिन अपने घरों में दीपक नहीं जलाते हैं।

अटारी गांव के रामधनी सिंह ने बताया कि हमारे महान पूर्वज सम्राट पृथ्वी राज चौहान की मृत्यु दीपावली के दिन ही हुई थी। इसलिए हमारे चौहान समाज के लोग इस पर्व को शोक दिवस के रूप में मनाते हैं। इसी गांव की रहने वाली मुन्नी देवी बताती हैं कि हमारे पूर्वज दीपावली नहीं मनाते थे, उस परंपरा का निर्वाह हम भी कर रहे हैं। एकादशी के दिन हम लोग दीपावली का त्योहार मनाते हैं। गांव के बुजुर्ग सुदर्शन सिंह चौहान ने बताया कि हम लोग दीपावली के बजाय देव दीपावली (एकादशी) मनाते हैं. उस दिन घरों में दीपक जलाकर रोशन करते हैं।

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