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Alpha Movie Review 2026: क्या आलिया भट्ट और शरवरी की ‘ऐल्फा’ बचा पाएगी YRF स्पाई यूनिवर्स की लाज? जानें पूरी कहानी, कमियां और खूबियां
Alpha Movie Review in Hindi
यशराज फिल्म्स (YRF) का स्पाई यूनिवर्स भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे सफल सिनेमाई यूनिवर्स में से एक माना जाता है। ‘एक था टाइगर’, ‘टाइगर जिंदा है’, ‘वॉर’ और ‘पठान’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के साथ इस यूनिवर्स ने बॉक्स ऑफिस पर राज किया है। लेकिन हालिया फिल्मों जैसे ‘वॉर 2’ और ‘टाइगर 3’ के बाद दर्शकों और समीक्षकों को इस फॉर्मूले में कुछ नयापन नहीं दिख रहा था। इसी बीच, मेकर्स ने इस यूनिवर्स की पहली फीमेल-लीड स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘ऐल्फा’ (Alpha) को 3 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज किया है।
आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और शरवरी वाघ (Sharvari Wagh) स्टारर इस हाई-ऑक्टेन एक्शन फिल्म का निर्देशन ‘द रेलवे मेन’ फेम शिव रवैल ने किया है। क्या यह फिल्म अपनी भारी-भरकम स्टारकास्ट और नए कॉन्सेप्ट के साथ स्पाई यूनिवर्स को एक नई दिशा दे पाई है? या फिर यह भी एक कमजोर स्क्रिप्ट की बलि चढ़ गई है? आइए विस्तार से जानते हैं इस विस्तृत और निष्पक्ष Alpha Movie Review में।
📄 ‘ऐल्फा’ (Alpha) फिल्म की संक्षिप्त जानकारी (Movie Overview)
| मुख्य विवरण | जानकारी |
| फिल्म का नाम | ऐल्फा (Alpha) |
| मुख्य कलाकार | आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल, अनिल कपूर, दिव्येंदु भट्टाचार्य, दीया मिर्जा |
| निर्देशक (Director) | शिव रवैल |
| निर्माता (Producer) | आदित्य चोपड़ा (YRF Studios) |
| लेखक (Writers) | उदय चोपड़ा, श्रीधर राघवन, इशिता मोइत्रा |
| फ्रेंचाइज | YRF स्पाई यूनिवर्स (7वीं फिल्म) |
| रनटाइम (Duration) | 140 मिनट (2 घंटे 20 मिनट) |
| रिलीज डेट | 3 जुलाई 2026 |
| विधा (Genre) | स्पाई-एक्शन थ्रिलर |
🎬 क्या है ‘ऐल्फा’ की कहानी? (Plot Analysis)
फिल्म की कहानी भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियों के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो एक खास सीरम के इर्द-गिर्द घूमती है। कर्नल यशवंत कौल (अनिल कपूर) और उनके जूनियर फतह (बॉबी देओल) एक गुप्त मिशन पर काम कर रहे होते हैं, जिसका नाम है ‘मिशन ऐल्फा’। इस मिशन का उद्देश्य एक ऐसा ‘ऐल्फा सीरम’ तैयार करना है, जिसे भारतीय सैनिकों के शरीर में इंजेक्ट करने के बाद वे सुपर-सोल्जर बन सकें। इस सीरम की खासियत यह है कि यह शरीर की हीलिंग पावर (घाव भरने की गति) को कई गुना बढ़ा देता है और रिफ्लेक्सेज को बहुत तेज कर देता है।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब यशवंत कौल अपनी गर्भवती पत्नी (दीया मिर्जा) को एक जानलेवा दिल की बीमारी से बचाने के लिए इस अनटेस्टेड सीरम को उनके शरीर में डाल देते हैं। यशवंत की पत्नी तो नहीं बच पातीं, लेकिन उनकी बेटी के जीन्स पूरी तरह बदल जाते हैं। फतह (बॉबी देओल) इस पूरी स्थिति का फायदा उठाता है। वह यशवंत कौल को धोखा देता है और उन्हें विश्वास दिलाता है कि उनकी बेटी मर चुकी है।
फतह उस बच्ची को अपने साथ ले जाता है और उसका नाम सीता (आलिया भट्ट) रखता है। फतह, सीता को बचपन से ही एक बेरहम और बेहद खतरनाक किलिंग मशीन (एजेंट) के रूप में पालता है। सीता फतह को ही अपना सब कुछ मानती है और उसके एक इशारे पर किसी को भी मौत के घाट उतारने के लिए तैयार रहती है।
लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। यशवंत कौल की एक और बेटी भी है जिसका नाम दुर्गा (शरवरी वाघ) है। दुर्गा को जब अपनी जुड़वां बहन सीता के बारे में पता चलता है, तो वह उसे फतह के चंगुल से छुड़ाने और अपने परिवार को एक करने के मिशन पर निकलती है। इसी बीच सीता को भी पता चलता है कि जिस फतह को वह अपना ‘बाबा’ मानती थी, असल में वही उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा खलनायक (रावण) है। इसके बाद शुरू होता है धोखे, बदले और हाई-वोल्टेज एक्शन का एक लंबा सिलसिला।
🌟 अभिनय और किरदारों का प्रदर्शन (Performances)
1. आलिया भट्ट (Sita के रूप में)
आलिया भट्ट ने ‘राजी’ और ‘जिगरा’ जैसी फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवाया है। ‘ऐल्फा’ में उन्होंने एक जेनेटिकली अल्टरड सुपर सोल्जर का किरदार निभाया है। शारीरिक बदलाव और एक्शन कोरियोग्राफी के मामले में आलिया की मेहनत साफ नजर आती है। जहां ज्यादातर एक्शन स्टार्स लड़ते वक्त चेहरे पर सपाट भाव रखते हैं, वहीं आलिया ने अपने चेहरे के हाव-भाव (अभिनय) से फाइट सीन्स को भी थोड़ा व्यक्तिगत और इमोशनल बनाने की कोशिश की है। हालांकि, कुछ क्रिटिक्स का मानना है कि स्पाई यूनिवर्स के इस बड़े कैनवास और इंटेंसिटी में आलिया कहीं-कहीं थोड़ी ‘मिसकास्ट’ या ओवर-द-टॉप लगती हैं।
2. शरवरी वाघ (Durga के रूप में)
इस फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज शरवरी वाघ हैं। ‘मुंज्या’ और ‘महाराज’ के बाद शरवरी ने इस फिल्म में कमाल का स्क्रीन प्रेजेंस दिखाया है। हथियारों को संभालने की उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनका पोस्चर और उनकी इंटेंसिटी कमाल की है। उन्होंने कई एक्शन और ड्रामेटिक सीन्स में आलिया भट्ट को कड़ी टक्कर दी है। हालांकि, स्क्रीनप्ले में उनके किरदार को सेकेंड हाफ में थोड़ा साइडलाइन कर दिया गया, जो खटकता है।
3. बॉबी देओल (Fateh के रूप में)
‘एनिमल’ के बाद बॉबी देओल एक बार फिर एक खतरनाक विलेन के रूप में सामने आए हैं। कर्नल फतह के रूप में उनका स्वैग और उनकी हिंसक प्रवृत्ति स्क्रीन पर डर पैदा करती है। उनकी आँखों की मासूमियत और अचानक होने वाले उनके हिंसक धमाके फिल्म को मजबूती देते हैं। लेकिन कमजोर राइटिंग के कारण उनके हरियाणवी लहजे के डायलॉग्स कुछ जगहों पर थोड़े अटपटे लगते हैं।
4. अनिल कपूर और दिव्येंदु
अनिल कपूर ने कर्नल यशवंत कौल के रूप में हमेशा की तरह एक सधा हुआ और प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। फिल्म में उनका औरा (Aura) साफ दिखाई देता है। वहीं, डॉ. वर्गीज के रूप में दिव्येंदु भट्टाचार्य ने भी अपने छोटे से रोल में शानदार काम किया है।
⚡ ऋतिक रोशन का कैमियो: कबीर की एंट्री (Hrithik Roshan Cameo)
YRF स्पाई यूनिवर्स की फिल्मों की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) उनके क्रॉसओवर और कैमियो होते हैं। ‘ऐल्फा’ में भी ऋतिक रोशन की ‘कबीर’ (वॉर फ्रैंचाइजी के एजेंट) के रूप में करीब 5 मिनट की एंट्री होती है। कबीर की एंट्री वाला एक्शन ब्लॉक थिएटर में दर्शकों को रोमांचित जरूर करता है, लेकिन कई क्रिटिक्स ने इसे कहानी के लिहाज से काफी ‘जबरन’ और थोपा हुआ बताया है। हालांकि, फैंस के लिए ऋतिक को स्क्रीन पर देखना हमेशा एक ट्रीट की तरह होता है।
📈 फिल्म के सकारात्मक पहलू (What Works – Pros)
- दमदार हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट: फिल्म के पहले भाग में दिखाए गए रॉ और रियलिस्टिक हैंड-टू-हैंड फाइट सीन्स बेहतरीन तरीके से कोरियोग्राफ किए गए हैं। आलिया और शरवरी को एक साथ एक्शन करते देखना काफी संतोषजनक है।
- सिनेमैटोग्राफी और विजुअल्स: फिल्म का विजुअल प्रजेंटेशन, कलर ग्रेडिंग और कैमरा एंगल्स काफी इंटरनेशनल लेवल के लगते हैं। प्रोडक्शन डिजाइन पर काफी पैसा खर्च किया गया है जो स्क्रीन पर दिखता है।
- प्री-इंटरवल पेस: इंटरवल से ठीक 20 मिनट पहले का ड्रामा और ट्विस्ट फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है, जो दर्शकों को कहानी से बांधकर रखता है।
📉 फिल्म के कमजोर पहलू (What Doesn’t Work – Cons)
- बेहद कमजोर और प्रेडिक्टेबल कहानी: फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी उदय चोपड़ा, श्रीधर राघवन और इशिता मोइत्रा द्वारा लिखी गई इसकी स्क्रिप्ट है। कहानी में हॉलीवुड की मार्वल फिल्मों और पुरानी भारतीय फिल्मों का एक ऐसा अनऑरिजिनल मेशअप (मिश्रण) दिखता है जो दर्शकों को बिल्कुल नया नहीं लगता।
- लॉजिक की भारी कमी: कहानी में कई ऐसी अतार्किक बातें हैं जो गले नहीं उतरतीं। उदाहरण के लिए, एक पाकिस्तानी कनेक्शन वाला व्यक्ति भारतीय सेना में कर्नल बन जाता है और बिना किसी बैकग्राउंड चेक या मेडिकल स्क्रूटनी के खुफिया मिशन चलाता है। खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगती।
- अनावश्यक गाने: फिल्म की 140 मिनट की लंबाई में जबरन डाले गए गाने कहानी के फ्लो (रफ्तार) को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।
- कमजोर डायलॉग्स: इशिता मोइत्रा द्वारा लिखे गए डायलॉग्स में वह मारक क्षमता नहीं है जो एक देशभक्ति या स्पाई थ्रिलर फिल्म में होनी चाहिए। “Once you go Alpha, you can’t go back” जैसे डायलॉग्स काफी बचकाने लगते हैं।
📊 क्रिटिक्स रेटिंग और पब्लिक वर्डिक्ट (Critics Rating & Verdict)
रिलीज के बाद से ही फिल्म को लेकर सोशल मीडिया और क्रिटिक्स की तरफ से मिली-जुली से लेकर नकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं:
- तरण आदर्श (Taran Adarsh): $1.5 / 5$ स्टार्स (उन्होंने इसे YRF स्पाई यूनिवर्स की अब तक की सबसे कमजोर फिल्म बताया है।)
- सुमित काडेल (Sumit Kadel): $1 / 5$ स्टार (उन्होंने इसे एक ‘क्रिंज फेस्ट’ कहा है, जिसकी कहानी पूरी तरह अतार्किक है।)
- नवभारत टाइम्स: $2 / 5$ स्टार्स (एक्शन दमदार है, लेकिन कमजोर कहानी ने आलिया और शरवरी की मेहनत पर पानी फेर दिया।)
- पिंकविला (Pinkvilla): $3 / 5$ स्टार्स (इन्होंने महिला किरदारों के सशक्तिकरण और एक्शन सीन्स की तारीफ की है।)
🔮 अंतिम निष्कर्ष (Final Verdict)
यदि आप यशराज के स्पाई यूनिवर्स के बहुत बड़े डाई-हार्ड फैन हैं और आपको बिना लॉजिक सोचे सिर्फ बड़े पर्दे पर स्टाइलिश एक्शन, चेस सीक्वेंस, गनशॉट्स और बेहतरीन विजुअल्स देखना पसंद है, तो आप ‘ऐल्फा’ (Alpha) को एक बार थिएटर में देख सकते हैं। आलिया भट्ट और शरवरी की जुगलबंदी और उनके द्वारा की गई शारीरिक मेहनत सराहनीय है।
लेकिन, अगर आप एक मजबूत कहानी, तार्किक स्क्रीनप्ले, थ्रिल और गहराई की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो यह फिल्म आपको काफी निराश कर सकती है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वाईआरएफ स्पाई यूनिवर्स को अब अपने पुराने फॉर्मूले को पूरी तरह रीबूट करने की जरूरत है, क्योंकि सिर्फ बड़े स्टार्स और कैमियो के दम पर दर्शक अब बोर होने लगे हैं।
हमारी रेटिंग: ⭐⭐ (2 / 5 स्टार्स)