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नैनीताल में सर्दियों में बदलाव: बर्फबारी का संकट, बढ़ते कार्बन उत्सर्जन का असर !
नैनीताल: सरोवरनगरी में इस साल सर्दी के मौसम में भी कड़ाके की ठंड का अहसास नहीं हो रहा है। मौसम का यह बदलाव स्थानीय लोगों के लिए हैरान कर देने वाला है, क्योंकि जनवरी के महीने में दिन और रात की सर्दी की अपेक्षा इस बार गर्मी महसूस हो रही है।
विज्ञान के दृष्टिकोण से भी यह बदलाव चिंताजनक है। आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह के अनुसार, बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और जंगलों की कटाई जैसे कारणों से नमी बनाए रखने वाली वनस्पति का नष्ट होना बर्फबारी के संभावनाओं को कम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जैसे नैनीताल में बर्फबारी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि बर्फबारी के लिए कई कारक होते हैं, जैसे तापमान का गिरना, बादल होना और पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना। हालांकि, अब बर्फबारी के लिए इस तरह की असामान्य परिस्थितियां बहुत कम ही बन पा रही हैं।
बर्फबारी के लिए क्या चाहिए? डॉ. नरेंद्र सिंह ने बताया कि बर्फबारी तब संभव होगी जब भूमि का तापमान चार डिग्री तक गिर जाए, बादल हों और एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो। 2000 मीटर से कम ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना अब बहुत कम हो गई है, और यह जलवायु परिवर्तन के संकेत हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते संकट वर्तमान में जंगलों की अंधाधुंध कटाई, फॉरेस्ट फायर और बढ़ता कार्बन उत्सर्जन वातावरण में गहरी तबदीलियां ला रहा है। अगर यह स्थिति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले सालों में नैनीताल जैसे इलाकों में बर्फबारी की उम्मीद और भी कम हो सकती है।
नैनीतालवासियों के लिए चिंता का विषय नैनीताल के स्थानीय निवासी अब इस बदलाव को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि क्या यह सर्दियों का बदलाव स्थायी होगा और क्या नैनीताल में कभी फिर से वैसी बर्फबारी देखी जाएगी जैसी कुछ दशक पहले हुआ करती थी।
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