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CM धामी ने दी बधाई, मानसी नेगी ने FISU खेलों में देश को दिलाया कांस्य

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देहरादून: उत्तराखंड की होनहार एथलीट मानसी नेगी ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। चमोली जिले के मजोठी गांव की रहने वाली मानसी ने जर्मनी के राइन-रूहर में आयोजित FISU विश्व विश्वविद्यालय खेल 2025 में वॉक रेस टीम स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया।

इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 100 से ज्यादा देशों के करीब 8,500 एथलीट्स ने 18 खेलों में भाग लिया। इसी कड़ी में मानसी नेगी ने कठिन चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया।

मानसी की इस उपलब्धि पर प्रदेशभर से बधाइयों का तांता लगा हुआ है। उन्हें उत्तराखंड सरकार द्वारा तीलू रौतेली पुरस्कार 2022-23 से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस बार कांस्य पदक जीतने पर उन्हें फिर से विशेष बधाई और सराहना मिल रही है।

Manasi Negi

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मानसी नेगी को बधाई देते हुए कहा कि  राइन-रूहर, जर्मनी में आयोजित FISU विश्व विश्वविद्यालय खेल 2025 में वॉक रेस टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने पर उत्तराखण्ड की बेटी मानसी नेगी जी को हार्दिक बधाई! आपकी यह उपलब्धि प्रदेश के अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप अपने उत्कृष्ट खेल कौशल से भविष्य में भी देश और प्रदेश का नाम इसी तरह रोशन करती रहेंगी। आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएं!

मानसी की इस कामयाबी के पीछे लंबा संघर्ष भी रहा है। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद मानसी ने हार नहीं मानी। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने खेल में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। हालांकि इस दौरान पिता के निधन की वजह से उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से गहरा झटका भी लगा…पर मानसी ने हौसला बनाए रखा और अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ती रहीं।

अब तक मानसी नेगी 17 से ज्यादा मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड 20 किमी वॉक रेस में एक घंटा 36 मिनट का रहा है। मानसी की इस मेहनत और जज्बे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और दृढ़ संकल्प से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

प्रदेश की इस बेटी की कामयाबी से आज हर उत्तराखंडी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। मानसी ने दिखा दिया कि पहाड़ की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक सकती हैं। उनके हौसले और उपलब्धि से कई अन्य युवाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

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