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उत्तराखंड में हुई मखाना की खेती की शुरुआत, हरिद्वार में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किया रोपण

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Haridwar News : बिहार की तरह ही उत्तराखंड में मखाना की खेती की शुरूआत हो गई है। हरिद्वार में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने हरिद्वार जिले के लक्सर के गंगदासपुर बालावाली में मखाना खेती की औपचारिक शुरुआत की।

उत्तराखंड में हुई मखाना की खेती की शुरुआत

हरिद्वार जिले में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की पहल के तहत कृषि मंत्री गणेश जोशी ने लक्सर के गंगदासपुर बालावाली में मखाना खेती की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं खेत में उतरकर मखाना का रोपण किया और किसानों को इस फसल की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए शुरू की गई पहल

बता दें कि ये पहल एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। जिसे बिहार की एक संस्था पहली बार उत्तराखण्ड में लेकर आई है। इससे स्थानीय किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आय बढ़ाने के नए विकल्प मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने इस प्रयास को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कर रही काम

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। वर्ष 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन के बाद देश के 11 राज्यों में इस क्षेत्र के विकास के लिए ठोस योजनाएं बनाई गई हैं। केंद्र सरकार द्वारा 2025-26 से 2030-31 तक 476 करोड़ रुपये की योजना के तहत अनुसंधान, बेहतर बीज, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और निर्यात को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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मखाना योजना के लिए उत्तराखण्ड को केंद्र से मिले 50 लाख

कृषि मंत्री ने ये भी जानकारी दी कि इस योजना के तहत उत्तराखण्ड को 50 लाख रुपए की सहायता राशि मिली है, जिसके जरिए कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से किसानों को प्रशिक्षण, सेमिनार और प्रदर्शन प्लॉट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इसके अलावा, राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 143.16 लाख रुपये की कार्ययोजना को मंजूरी दी है, जिससे मखाना उत्पादन को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश को बागवानी हब बनाने के उद्देश्य से सेब, मोटे अनाज, कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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