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क्या आपके स्वास्थ्य को भी है मुंह के कैंसर का खतरा? जानें रहस्य !

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नई दिल्ली: कैंसर वैश्विक स्तर पर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है, जिसमें लगभग हर उम्र के लोगों पर इसका खतरा मंडरा रहा है। खासकर पुरुषों में मुंह और फेफड़ों के कैंसर के मामले सबसे अधिक देखे जा रहे हैं। मुंह का कैंसर भारत में तेजी से बढ़ती एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिसके आंकड़े चिंता का विषय हैं।

हाल ही में द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दक्षिण एशिया में भारत मुंह के कैंसर के मामलों में सबसे ऊपर है। वैश्विक स्तर पर मुंह के कैंसर के 1.20 लाख से अधिक मामले सामने आए, जिसमें से 83,400 मामले भारत से ही थे।

तंबाकू का खतरा

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि मुंह के कैंसर के ज्यादातर मामले तंबाकू चबाने से होते हैं। हर साल सामने आने वाले ओरल कैंसर के 30 प्रतिशत से अधिक मामले धुआं रहित तंबाकू के सेवन के कारण रिपोर्ट किए जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ओरल कैंसर का खतरा बड़े पैमाने पर बढ़ता जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बोझ बढ़ रहा है।

दक्षिण एशिया में कैंसर के मामले

अध्ययन के अनुसार, मुंह के कैंसर के मामले दक्षिण-मध्य एशियाई देशों से सबसे ज्यादा सामने आए हैं। भारत में 83,400, बांग्लादेश में 9,700, पाकिस्तान में 8,900 और श्रीलंका में 1,300 केस रिपोर्ट किए गए हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी इस कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, जैसे म्यांमार में 1,600, इंडोनेशिया में 990 और थाईलैंड में 785 मामले दर्ज किए गए हैं।

युवा आबादी को खतरा

इस अध्ययन के सह-लेखक डॉ. पंकज चतुर्वेदी के अनुसार, तंबाकू, गुटखा और सुपारी का सेवन न केवल मुंह के कैंसर के लिए जिम्मेदार है, बल्कि यह सबम्यूकस फाइब्रोसिस जैसी बीमारियों का भी कारण बनता है। यह समस्या विशेष रूप से युवा आबादी को अधिक प्रभावित कर रही है, जिससे परिवारों को भावनात्मक और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।

आवश्यक कदम

विशेषज्ञों का कहना है कि धुआं रहित तंबाकू और सुपारी पर नियंत्रण के लिए मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। अनुमान है कि विश्वभर में 300 मिलियन लोग तंबाकू और 600 मिलियन लोग सुपारी का सेवन करते हैं, जिनमें एशियाई देशों का जोखिम अधिक है।

लक्षणों की पहचान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह के कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक तंबाकू सेवन, अत्यधिक शराब का सेवन और एचपीवी वायरस हैं। यदि किसी के होंठ या मुंह में कोई घाव ठीक नहीं हो रहा है, मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बा है, दांत कमजोर हो रहे हैं या निगलने में कठिनाई हो रही है, तो उसे तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। समय पर निदान होने से कैंसर का इलाज संभव है और जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

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