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चैत्र नवरात्रि दुर्गा अष्टमी पर क्या है कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त ?, जानें व्रत पारण और पूजा की पूरी विधि

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चैत्र नवरात्रि दुर्गा अष्टमी पर कैसे करें कन्या पूजन ?, जानें पूजा विधि और भोग से जुड़ी हर जानकारी

चैत्र नवरात्रि दुर्गा अष्टमी को लेकर लोगों के मन कई सवाल कई इसकी तिथि को लेकर कन्फ्यूज हैं तो कई कन्या पूजन के मुहूर्त को लेकर कन्फ्यूज हैं। ऐसे में हम आपको चैत्र नवरात्रि दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन के समय और विधि के बारे में बताते हैं।

नवरात्रि दुर्गा अष्टमी पर की जाती है कन्याओं की पूजा

हिंदू धर्म में नवरात्रियों का खासा महत्व है। यूं तो सालभर में चार बार नवरात्रियां आती हैं लेकिन चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रों का खासा महत्व है। इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हुई थी ऐसे में दुर्गा अष्टमी 26 मार्च को मनाई जा रही है।

दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन करने से माता रानी की कृपा प्राप्त होती है। नवरात्रि में कन्या पूजन के बिना व्रत का फल अधूरा माना जाता है। इस दिन छोटी-छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। मान्यता है कि कुंवारी कन्याओं की पूजा करने और उन्हें भोजन कराने से हर मनोकामना पूरी होती है और घर परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

Kanya Pujan Muhurat

चैत्र नवरात्रि दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त ? (Kanya Pujan Muhurat)

चैत्र नवरात्रि दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त (Kanya Pujan Muhurat) दोपहर 1 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 26 मार्च 2026 की सुबह 11 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार अष्टमी का पर्व 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु अष्टमी पूजन के साथ कन्या पूजन भी करेंगे।

विवरणजानकारी
पर्वDurga Ashtami (चैत्र नवरात्रि)
अष्टमी तिथि प्रारंभ25 मार्च 2026, दोपहर 1:51 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त26 मार्च 2026, सुबह 11:49 बजे
उदया तिथि अनुसार अष्टमी26 मार्च 2026, गुरुवार
कन्या पूजन का दिन26 मार्च 2026
विशेष महत्वइस दिन अष्टमी पूजन व कन्या पूजन किया जाता है

व्रत पारण और पूजा की पूरी विधि

  1. 1. दुर्ग अष्टमी या महानवमी के दिन कन्या पूजन के लिए सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और व्रत-पूजन का संकल्प लें।
  2. 2. इसके बाद विधि अनुसार मां दुर्गा की पूजा करें।

3. 2 से 9 वर्ष की कन्याओं और एक बालक को घर आमंत्रित करें। उनके आने पर आदरपूर्वक स्वागत करें, आसन दें और उनके चरण धोकर प्रणाम करें।

4. फूल, रोली, अक्षत से तिलक करें, चुनरी व कलावा अर्पित करें और मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।

5. फिर श्रद्धा से हलवा, पूड़ी, काले चने व मिठाई का भोग लगाकर उन्हें भोजन कराएं।

6. अंत में अपनी सामर्थ्य अनुसार उपहार देकर कन्याओं को सम्मानपूर्वक विदा करें और आशीर्वाद प्राप्त करें।

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