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नंदा देवी राज जात यात्रा 2026 : ख़त्म हुआ इंतजार, इस दिन से शुरू होगी यात्रा…..

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NANDA DEVI RAJ JAT YATRA 2026: वसंत पंचमी के दिन जारी होगा यात्रा कार्यक्रम, 20 जनवरी से नौटी गाँव में आयोजित होगा महोत्सव

NANDA DEVI RAJ JAT YATRA : साल 2026 उत्तराखंड के लिए कई नए यादगार पल लाएगा। इसी साल हिमालयी महाकुम्भ के नामा से विख्यात नंदा राज जात यात्रा का आयोजन भी होना है। नंदा राजजात यात्रा कुंभ की तरह ही प्रति 12 वर्षों में एक बार आयोजित की जाती है। इस बार 2026 में नंदा राज जात यात्रा के लिए 23 जनवरी को यात्रा कार्यक्रम जारी किया जाएगा।

मुख्य बिंदु

क्या है नंदा राज जात यात्रा 2026 ? ( NANDA DEVI RAJ JAT YATRA SCHEDULE 2026 )

नंदा देवी गढ़वाल ही नहीं बल्कि कुमाऊँ क्षेत्र में भी अत्यंत पूजनीय हैं। जहाँ उन्हें श्रद्धापूर्वक राजराजेश्वरी भी कहा जाता है। मान्यताओं के मुताबिक कुमाऊँ मंडल को माँ नंदा का मायका और गढ़वाल मंडल को उनका ससुराल माना जाता है। जिससे दोनों क्षेत्रों की सांस्कृतिक एकता झलकती है। इसी परंपरा के चलते नंदा देवी राजजात यात्रा सदियों से चली आ रही है। हालांकि ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि ये हिमालयी महाकुंभ वर्ष 1843 से नियमित आयोजित किया जा रहा है। ये यात्रा कुमाऊँ और गढ़वाल के लोगों को एक सूत्र में बाँधते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक बनती है।

क्यों मनाई जाती हैं नंदा राज जात यात्रा ? ( NANDA DEVI RAJ JAT YATRA 2026 )

नंदा देवी राज जात यात्रा ( HIMALAYI MAHAKUMBH ) से जुड़ी अनेक लोक मान्यताएं प्रचलित हैं। जिनमें एक लोककथा विशेष रूप से स्वीकार की जाती है। जिसके मुताबिक राजा दक्ष के घर जन्मी माँ नंदा देवी को माता पार्वती का अवतार माना जाता है। जिनका विवाह भगवान शिव से हुआ था। विवाह के बाद वो भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत स्थित अपने ससुराल चली गईं। जब कई वर्षों बाद उन्हें अपने मायके की याद आई और उन्होंने भगवान शिव से वहां जाने की अनुमति मांगी। जिस पर भगवान शिव ने कहा कि बारह दिन बाद वो अपने दूत को उन्हें वापस लाने के लिए भेजेंगे।

इसके बाद, मायके में बारह दिन पूरे होने पर भगवान शिव ने अपने प्रिय चौसिंघिया खाडू को माँ नंदा को वापस लाने के लिए भेजा। विदाई की सभी तैयारियां पूरी की गईं। यात्रा के दौरान माँ नंदा के परिवार जन भी भावुक मन से उनके साथ चले। मार्ग में जिन स्थानों पर माँ नंदा ने विश्राम किया, वहां आज शक्ति पीठ स्थापित माने जाते हैं। इसी विश्वास के चलते प्रत्येक बारह वर्षों में नंदा देवी राज जात यात्रा आयोजित कर माँ नंदा को प्रतीकात्मक रूप से उनके ससुराल भेजा जाता है।

NANDA DEVI RAJ JAT YATRA में बारह सालों का अंतराल क्यों हैं ?

नंदा राज जात यात्रा ( HIMALAYI MAHAKUMBH ) प्रत्येक बारह सालों में एक बार मनाई जाती हैं। इसीलिए ऐसे हिमालयी महाकुम्भ भी कहते हैं। माँ नंदा और भगवान् शिव की ये लोककथा सतयुग की मानी जाती है। और लोकमान्यताओं के मुताबिक सतयुग का एक दिन कलयुग के एक साल के बर्बर हैं। इसलिए सतयुग में माँ नंदा 12 दिनों के लिए अपने मायके आई थी जिसे आज के समय में 12 सालों के बराबर माना जाता है। इसलिए नंदा राज जात यात्रा प्रत्येक 12 सालों के समय अंतराल पर आयोजित की जाती है।

क्या है नंदा राज जात यात्रा में चौसिंगिया खाडू की मान्यता ( CHAUSINGIYA KHADU )

चौसिंगिया खाडू ( CHAUSINGIYA KHADU ) , नंदा राज जात यात्रा के आयोजन के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। चौसिंगिया खाडू क्षेत्रीय भाषा का एक शब्द है। जिसका हिंदी में अर्थ होता है – चार सींग वाला भेड़ जो कि अत्यंत दुर्लभ है। यही चार सींग वाला भेड़ पूरी यात्रा की अगुवाई करता है। लोकमान्यताओं के मुताबिक यात्रा से कुछ महीनों पहले ही ये चौसिंगिया खाडू यात्रा क्षेत्र के किसी गांव में जन्म लेता है। और ये 12 वर्षों में केवल एक बार होता है। माना जाता है कि ये भेड़ स्वयं भगवान् शिव का ही एक रूप है जो माँ नंदा को लेने आते हैं।

एशिया की सबसे लम्बी धार्मिक यात्रा ( Asia’s Longest Religious Pilgrimage )

नंदा देवी राज जात यात्रा एशिया की सबसे लम्बी धार्मिक यात्रा ( Longest Religious Pilgrimage of Asia ) है। इस यात्रा का शुभारंभ चमोली जिले के नॉटी गाँव ( NAUTI VILLAGE ) से किया जाता है। जो अपने अंतिम यात्रा पड़ाव होमकुंड ( HOMKUND )पर आम लोगों के लिए समाप्त होती है। इसके बाद माना जाता हैं कि माँ नंदा कैलाश की ओर प्रस्थान करती है। HOMEKUND से आगे रंग-बिरंगे वस्त्रों से सुशोभित चौसिंगिया खाडू को हिमालय के लिए रवाना किया जाता है।

नंदा देवी राज जात यात्रा का रुट मैप ( ROOT OF NANDA DEVI RAJ JAT YATRA 2026 )

( HIMALAYI MAHAKUMBH ) लगभग तीन सप्ताह तक चलने वाली ये करीब 280 किलोमीटर लंबी यात्रा विभिन्न गांवों, विस्तृत घास के मैदानों, घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ी मार्गों से गुजरते हुए अपने अंतिम पड़ाव तक पहुँचती है। इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रकृति के अनेक अद्भुत और विविध रूप देखने को मिलते हैं। विशेष रूप से ये यात्रा मार्ग रूपकुंड और बेदनी बुग्याल के लिए जाना जाता है। जहां बेदनी बुग्याल अपने दूर-दूर तक फैले हरे-भरे घास के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं रूपकुंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ऐतिहासिक रहस्यों के कारण भी पहचान रखता है।

इसी कड़ी में यहां स्थित रूपकुंड झील को SKELETON LAKE और “पातर नचोनिया” जैसे नामों से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, एक समय एक राजा अपने साथ नर्तकों के दल को इस स्थान पर लेकर आया था। इससे कुपित होकर माँ नंदा की शक्ति से ओलों की वर्षा हुई, जिसमें वे सभी पत्थर में परिवर्तित हो गए। कहा जाता है कि उन्हीं के अवशेष आज भी इस झील के आसपास देखे जा सकते हैं।

नंदा देवी राजजात यात्रा का निर्धारित मार्ग और पड़ाव

Nanda devi raj jat yatra एक निश्चित और पारंपरिक मार्ग से होकर गुजरती है, जिसमें अनेक महत्वपूर्ण पड़ाव शामिल हैं। यह यात्रा चरणबद्ध रूप से गांवों, पर्वतीय क्षेत्रों और उच्च हिमालयी बुग्यालों से होती हुई आगे बढ़ती है। प्रत्येक पड़ाव का अपना धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है, जहां श्रद्धालु विधि-विधान के साथ यात्रा को आगे बढ़ाते हैं।

यात्रा मार्ग और दूरी

सेतकदूरी
नौटी गांव ( Nauti Village ) ईडा बधानी10 किमी
ईडा बधानीनौटी10 किमी
नौटीकांसुवा10 किमी
कांसुवासेम12 किमी
सेमकोटि10 किमी
कोटिभगोती12 किमी
भगोतीकुलसारी12 किमी
कुलसारीचेपड़ों10 किमी
चेपड़ोंनंद केसरी11 किमी
नंद केसरीफल्दिया8 किमी
फल्दियामुंडोली10 किमी
मुंडोलीवाण15 किमी
वाणगेरोली पातल10 किमी
गेरोली पातलबेदनी बुग्याल (Bedni bugyal)9 किमी
बेदनी बुग्याल (Bedni bugyal)पातर नाचोनिया5 किमी
पातर नाचोनिया (SKELETON LAKE)सिला समुंद्र15 किमी
सिला समुंद्रचंदनिया घाट16 किमी
चंदनिया घाटसुतोल18 किमी
सुतोलघाट32 किमी
घाटनौटी40 किमी
नौटी गांव ( Nauti Village )

यात्रा के प्रमुख पड़ाव और उनका महत्व

उत्तराखंड के चमोली जिले में आयोजित होने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा के दौरान कई ऐसे प्रमुख पड़ाव आते हैं, जिनका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष रूप से जुड़ा हुआ है।

  • नौटी गांव: यात्रा का प्रारंभिक स्थल होने के कारण यहां सभी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न की जाती है।
  • कोटि गांव: यह एक अहम पड़ाव है, जहां पुजारी और श्रद्धालु पूरी रात भजन-कीर्तन करते हैं।
  • बेदनी बुग्याल: यात्रा मार्ग के ऊंचे और रमणीय स्थलों में से एक, जो अपने विस्तृत और सुंदर घास के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है।
  • रूपकुंड झील (SKELETON LAKE) : ‘कंकाल झील’ के नाम से विख्यात यह स्थान अपने रहस्यमय इतिहास और धार्मिक महत्व के कारण जाना जाता है।
  • होमकुंड (Homkund): नौटी गांव से शुरू हुई यात्रा का अंतिम पड़ाव, जहां सभी धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण करने के बाद चौसिंघिया खाडू को विदा किया जाता है। मान्यता है कि इसी के माध्यम से माँ नंदा देवी कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान करती हैं।

साल 2026 के लिए नंदा देवी राजजात यात्रा का कार्यक्रम

वर्ष 2026 में श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा, जिसे हिमालयीय महाकुंभ के नाम से भी जाना जाता है, का भव्य आयोजन किया जाएगा। करीब 280 किलोमीटर लंबी इस पैदल यात्रा में श्रद्धा और आस्था का विशाल सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। लगभग 20 दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक आयोजन के दौरान सैकड़ों देवी-देवताओं की डोलियां और छंतोलियां श्रद्धालुओं को दर्शन देंगी। इसी क्रम में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर 23 जनवरी को इस महाकुंभ के आयोजन का आधिकारिक कार्यक्रम जारी किया जाएगा।

12 वर्षों बाद होने वाली यात्रा का लंबे समय से इंतजार

गौरतलब है कि श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर आयोजित होती है। आमतौर पर अगस्त–सितंबर माह में होने वाली इस यात्रा को लेकर लोगों में लंबे समय से उत्साह बना हुआ है। यात्रा में शामिल होने के लिए हर बार लाखों श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचते हैं। इसी को देखते हुए सरकार और आयोजन समिति पिछले दो वर्षों से तैयारियों में जुटी हुई है।

यात्रा पड़ावों पर बुनियादी सुविधाओं को किया जा रहा मजबूत

इसके साथ ही यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले विभिन्न पड़ावों में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है। सड़कों के सुधार का कार्य तेजी से चल रहा है, जबकि अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए विस्तृत इस्टीमेट भी तैयार कर लिए गए हैं। वहीं नौटी गांव में यात्रा कार्यक्रम जारी करने को लेकर भव्य महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

23 जनवरी को जारी होगा कार्यक्रम, 20 से महोत्सव की शुरुआत

NANDA DEVI RAJ JAT YATRA SCHEDULE 2026 श्रीनंदा देवी राजजात समिति के महासचिव भुवन नौटियाल ने बताया कि यात्रा की तैयारियां लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी 23 जनवरी को राजवंशी राजकुंवर द्वारा यात्रा का कार्यक्रम जारी किया जाएगा। इसके लिए 20 जनवरी से नौटी में महोत्सव आयोजित किया जाएगा, जिसमें देवी पूजन के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं के राजवंशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की भी प्रबल संभावना है।

Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 कब शुरू होगी?

Nanda Devi Raj Jat Yatra 2026 Schedule के अनुसार, यात्रा का आधिकारिक कार्यक्रम 23 January 2026 को Basant Panchami के दिन जारी किया जाएगा।

Nanda Devi Raj Jat Yatra कहां से शुरू होती है?

यात्रा की शुरुआत Nauti Village, Chamoli (Uttarakhand) से होती है।

Nanda Devi Raj Jat Yatra कितने दिन चलती है?

यह यात्रा लगभग 20–21 Days तक चलती है।

Chausingiya Khadu क्या है? (Chausingiya Khadu Meaning)

Chausingiya Khadu एक चार सींग वाला दुर्लभ भेड़ है, जिसे भगवान शिव का दूत माना जाता है और यह पूरी यात्रा की अगुवाई करता है।

क्या आम श्रद्धालु Nanda Devi Raj Jat Yatra में शामिल हो सकते हैं?

हाँ, प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार Common Devotees भी इस यात्रा में भाग ले सकते हैं।

नंदा देवी राजजात यात्रा कितने वर्षों में होती है?

यह यात्रा हर 12 years में एक बार आयोजित की जाती है, इसलिए इसे Himalayan MahaKumbh भी कहा जाता है।

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