Dehradun
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मदरसों में नया बदलाव , लागू होगा UBSE पाठ्यक्रम….
देहरादून : उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने ऐलान किया है कि आगामी शिक्षा सत्र से वक्फ बोर्ड के मदरसों में बच्चों को तहतानिया, फौकानिया, मुंशी और मौलवी की पढ़ाई नहीं दी जाएगी। इसके बजाय, इन मदरसों में भी राज्य के सरकारी विद्यालयों की तरह उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) का पाठ्यक्रम लागू होगा। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को एक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, जो उनके भविष्य के लिए लाभकारी हो।
शादाब शम्स ने बताया कि वक्फ बोर्ड के तहत राज्य में 117 मदरसे हैं, जिनमें अब से विद्यालयी शिक्षा परिषद का पाठ्यक्रम लागू होगा। उन्होंने कहा, “हमने देहरादून में राज्य का पहला मॉडल मदरसा स्थापित किया है, जिसमें संस्कृत को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा।” यह पहल बच्चों को एक बेहतर शैक्षिक दिशा देने की दिशा में उठाया गया कदम है।
मॉडल मदरसा और शारीरिक शिक्षा
देहरादून रेलवे स्टेशन के पास मुस्लिम कॉलोनी में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से एक मॉडल मदरसा स्थापित किया गया है, जहां बच्चों को न केवल पारंपरिक शिक्षा मिलेगी, बल्कि शारीरिक शिक्षा भी दी जाएगी। पूर्व सैनिकों द्वारा छात्रों को शारीरिक शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि उनमें देशभक्ति और अनुशासन की भावना पैदा की जा सके। इसके अलावा, संस्कृत के लिए भी विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।
इस मदरसे का उद्घाटन आगामी मार्च में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाएगा, और इस पर नजर रखने के लिए आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार फरवरी में मदरसे की तैयारियों का निरीक्षण करेंगे।
अवैध मदरसों पर कार्रवाई का संकेत
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने यह भी कहा कि राज्य में कई मदरसे अवैध रूप से चल रहे हैं, और इन मदरसों को बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “इन अवैध मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य खतरे में है, और हम इसे रोकने के लिए कठोर कदम उठाएंगे।”