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माइग्रेशन वाले 21 गांवों के लोगों को जाड़ों में मुहिया कराया जायेगा सस्ते गल्ले का राशन। 

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 पिथौरागढ़ – पिथौरागढ़ जिले की दारमा और व्यास घाटी के माइग्रेशन वाले 21 गांवों में जाड़ों के सीजन में सरकारी सस्ते-गल्ले का राशन मिलेगा। इसके लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में एडवांस राशन रखने की व्यवस्था की जाएगी। बल्कि जाड़ों में यहां रहने वाले लोगों के लिए मेडिकल सुविधा भी की जाएगी।

चीन और नेपाल सीमा से लगे पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी इलाकों में जाड़ों के दौरान कई बार 14 फीट तक बर्फबारी जम जाती हैं। ऐसे में यहां के लोग निचले इलाकों की और रुख करते हैं लेकिन दारमा और व्यास घाटी में सड़क पहुंचने के बाद हजारों की संख्या में लोग स्थायी तौर पर अपने मूल आवासों में रहने लगे हैं। ऐसे लोगों को खाद्यान्न लेने के लिए निचले इलाकों में आना पड़ता है।

स्थानीय लोग लंबे समय से जाड़ों के सीजन में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खाद्यान्न और स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने की गुहार लगा रहे थे। इस पर कुमाऊं कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जाड़ों के दौरान उच्च हिमालयी गांवों में रहने वाले लोगों के लिए एडवांस राशन और मेडिकल सुविधा की व्यवस्था की जाए।

स्थानीय लोगों ने बताया की  जाड़ों में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सर्दियों के दौरान यहां खाद्यान्न और स्वास्थ्य सेवा मिलने से सीमांत क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। 
कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कहा कि पिथौरागढ़ जिले के कुटी और नाबी जैसे माइग्रेशन वाले गांवों में जाड़ों के सीजन में भी लोग रहना पसंद करते हैं। इसे देखते हुए जाड़ों में भी वहां रहने वाले लोगों के लिए एडवांस खाद्यान्न और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। स्थानीय लोग प्रशासन को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने की सूचना दे दें।

 

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