Udham Singh Nagar

पुलिस की सख्ती, जेल का खर्च: मुठभेड़ों में घायल अपराधियों के उपचार पर लाखों रुपये हो रहे खर्च….

Published

on

ऊधम सिंह नगर : उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में अपराधियों और तस्करों के खिलाफ पुलिस और वन कर्मियों के बीच मुठभेड़ों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। जहां एक ओर पुलिस तस्करों और अपराधियों से कड़ी कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन मुठभेड़ों का खामियाजा हल्द्वानी जेल प्रशासन को भुगतना पड़ रहा है। मुठभेड़ों में घायल सात अपराधियों का उपचार करने के लिए जेल प्रशासन अब तक सात लाख रुपये से अधिक खर्च चुका है।

बढ़ते मुठभेड़ों से जेल प्रशासन पर बढ़ा खर्च

26 मई को पंतनगर में तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टांडा रेंज में लकड़ी तस्करों और वन विभाग की टीम के बीच मुठभेड़ में लखविंदर सिंह लक्कू नामक तस्कर घायल हो गया था। उसे इलाज के लिए एसटीएच हल्द्वानी लाया गया और फिर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। लखविंदर के इलाज में पांच लाख रुपये खर्च हुए थे। इसके बाद वह हल्द्वानी जेल में इलाज के दौरान करीब पांच महीने तक भर्ती रहा और अक्टूबर में जेल से बाहर चला गया।

नए एसएसपी मणिकांत मिश्रा की तैनाती के बाद, पुलिस और वन विभाग ने मुठभेड़ों में अपराधियों से उन्हीं के तरीके से निपटने की रणनीति अपनाई है। इस दौरान पिछले दो महीनों में पांच अपराधी और तस्कर मुठभेड़ में घायल हो चुके हैं। सभी को हल्द्वानी एसटीएच में भर्ती कराया गया और फिर जेल में रखा गया। इनमें से एक अपराधी का उपचार निजी अस्पताल में कराया गया, जिसमें एक लाख रुपये से अधिक खर्च हुआ।

सभी मुठभेड़ों में अपराधियों की गिरफ्तारी

  • 26 मई: पंतनगर में तस्कर लखविंदर सिंह लक्कू घायल हुआ और गिरफ्तार किया गया।
  • 25 सितंबर: पुलिस ने जसपुर में लूट के आरोपी दिलशाद को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया।
  • 27 अक्टूबर: सितारगंज के शक्तिफार्म क्षेत्र में वन तस्कर जसपाल सिंह गिरफ्तार हुआ।
  • 9 नवंबर: गदरपुर में तस्कर संगत सिंह उर्फ संगी गिरफ्तार किया गया। संगत ने 6 सितंबर को पीपलपड़ाव रेंज में चार वनाधिकारियों पर फायरिंग की थी।
  • 8 नवंबर: किच्छा में बाइक सवार झपटमार आकाश और नासिर को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया।

जेल नियमावली के अनुसार चिकित्सा खर्च

जेल नियमावली के अनुसार, यदि किसी कैदी या बंदी को गंभीर चोटें आती हैं या वह बीमार हो जाता है, तो उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती करना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया में सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था करना जेल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। सभी चिकित्सा खर्चों का भुगतान जेल प्रशासन को करना होता है, और इसी कारण इस वर्ष अब तक बंदियों के इलाज में एक लाख रुपये से अधिक का खर्च हो चुका है।

पुलिस और वन विभाग की सक्रियता

नए एसएसपी मणिकांत मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस और वन विभाग के कर्मी अपराधियों और तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं। मुठभेड़ों के बाद अब तक कई तस्करों और अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन इसके साथ ही जेल प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। मुठभेड़ों में घायल हुए अपराधियों के उपचार के लिए जेल प्रशासन को भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है।

अपराधियों से सख्त निपटने की नीति

एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कहा, “हम अपराधियों और तस्करों से उन्हीं के तरीके से निपट रहे हैं। हम इस प्रकार की कार्रवाइयों में किसी भी तरह की कसर नहीं छोड़ेंगे।” पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से जहां अपराधियों में खौफ का माहौल बना है, वहीं जेल प्रशासन के लिए यह एक बड़ा चुनौती बनकर उभरा है।

 

#Police #Encounter #ForestDepartment #Criminals #UdhamsinghNagar #Haldwani #JailExpenses #CrimeControl #LawAndOrder

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Trending

Exit mobile version