Haridwar
हरिद्वार होमगार्ड भर्ती में फर्जीवाड़ा, AI से फर्जी सर्टिफिकेट बनाए !, 20 से ज्यादा आवेदन रद्द
Uttarakhand News : उत्तराखंड में फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए दाखिले का मामला चर्चा में रहने के बीच अब हरिद्वार में होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई है। भर्ती के लिए जमा किए गए 20 से अधिक अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र शामिल हैं। मामला सामने आने के बाद संबंधित अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। विभाग अब उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
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हरिद्वार में 227 पदों के लिए आए थे करीब 11 हजार आवेदन
मिली जानकारी के मुताबिक जुलाई 2026 में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में होमगार्ड के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसी क्रम में हरिद्वार जिले में 227 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। इन पदों के लिए करीब 11 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। इसके बाद विभाग ने दस्तावेजों का सत्यापन शुरू किया।
शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच में सामने आई गड़बड़ी
दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी मिली। बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया में शैक्षिक योग्यता के आधार पर मिलने वाले अतिरिक्त अंकों का लाभ लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्र जमा किए गए थे। विभागीय स्तर पर जांच आगे बढ़ी तो 20 से अधिक अभ्यर्थियों के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए।
एआई की मदद से प्रमाण पत्र तैयार करने का संदेह
मामले में आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कूटरचित शैक्षिक प्रमाण पत्र तैयार किए थे। सत्यापन के दौरान दस्तावेजों में अनियमितताएं सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए। हालांकि, इन प्रमाण पत्रों को तैयार करने में एआई के इस्तेमाल और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर ही हो सकेगी।

संदिग्ध अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
होमगार्ड विभाग के मंडलीय कमांडेंट के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच में संदिग्ध प्रमाण पत्रों का मामला सामने आया है। संबंधित अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इस मामले ने भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन और तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आगे की कार्रवाई में यह स्पष्ट होगा कि संदिग्ध प्रमाण पत्र किस तरह तैयार किए गए और इस मामले में संबंधित अभ्यर्थियों की भूमिका क्या रही।