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पिरूल लाओ – पैसे पाओ योजना से जीवन हुआ आसान, आग से बच रहे जंगल, ग्रामीणों को भी मिला काम

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Uttarakhand News : उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की सबसे बड़ी वजह पिरूल यानी चीड़ की सूखी पत्तियां अब परेशानी का सबब नहीं रही ,, बल्कि सैकड़ों परिवारों के लिए मुस्कान की वजह बनी है।

पिरूल लाओ – पैसे पाओ योजना से जीवन हुआ आसान

उत्तराखंड सरकार ने पिरूल को वेस्ट टू वेल्थ में बदलकर जंगलों को तो आग से बचाने का काम किया ही है, बल्कि ग्रामीणों को भी आत्मनिर्भर बनाया है।वर्ष 2026 के लिए उत्तराखंड सरकार ने 85 हजार से अधिक पिरुल एकत्रीकरण का लक्ष्य रखा है। जिसमें ग्रामीण बढ़ चढ़कर भागीदारी निभा रहे हैं।

योजना के कारण आग से बच रहे जंगल

सरकार की पिरूल लाओ-पैसा पाओ’ योजना से ग्रामीण आबादी खासकर महिलाएं मजबूत हो रही हैं।
बेहद सुंदर और उपयोगी घरेलू सामान जैसे मैट, टोकरी, कोस्टर, पेन स्टैंड, और बैग समेत कई आकर्षक कलाकृतियाँ पिरूल से बनाई जा रही हैं, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

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पिरूल से वैकल्पिक ईंधन किया जा रहा तैयार

उत्तराखंड सरकार और वन विभाग ने चंपावत, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी और देहरादून समेत राज्य के 11 चीड़-बहुल क्षेत्रों में ऐसी कई ब्रिकेटिंग और पैलेट यूनिट्स भी स्थापित की हैं जिनसे वैकल्पिक ईंधन तैयार किया जाता है। उत्तराखंड सरकार की जंगल बचाने और लोगों को रोजगार से जोड़ने की सरकार की मुहिम रंग ला रही है और पिरूल ग्रामीण आजीविका का एक बड़ा जरिया बन रहा है।

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