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उत्तराखंड: पर्यावरण संरक्षण मामले में हाईकोर्ट की सख्त सुनवाई, अतिक्रमणकारियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश !
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून में जल धाराओं, जलस्रोतों, नदियों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर दायर विभिन्न जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को इन जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन मामलों में पर्यावरणीय खतरों के अलावा नदी-नालों पर हो रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी।
कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को निर्देश दिया कि नदी, नालों और गधेरों में जहां कहीं अतिक्रमण हुआ है, उसे हटाया जाए। साथ ही, डीजीपी से भी आदेश दिए गए हैं कि संबंधित एसएचओ अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करें और रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
कोर्ट ने सचिव शहरी विकास से कहा है कि वे प्रदेश के नागरिकों को यह संदेश दें कि नदी-नालों और गधेरों पर अतिक्रमण, मलुआ और अवैध खनन न करें, ताकि मानसून सीजन में कोई दुर्घटना न हो। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल की तारीख तय की है।
इससे पहले, देहरादून के निवासियों अजय नारायण शर्मा, रेनू पाल और उर्मिला थापर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर कर आरोप लगाया था कि देहरादून में सहस्त्रधारा जैसी जलमग्न भूमि पर भारी निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे जलस्रोत सूख रहे हैं और पर्यावरण को खतरा हो रहा है। वहीं, ऋषिकेश, विकासनगर और डोईवाला में नदियों और नालों की भूमि पर अतिक्रमण किए जाने की भी शिकायत की गई है।
राज्य सरकार से इस मामले में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह का समय दिया है, ताकि वे इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएं।