Chamoli
सड़क डामरीकरण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, लोकसभा चुनाव बहिष्कार की दी चेतावनी।
चमोली – भले ही सूबे के लोक निर्णाण मंत्री सतपाल महाराज राज्य की सड़कों के गड्ढे मुक्त होने के कई हवा हवाई दावे कर लें लेकिन इसकी जमीनी हकीकत दुरस्त क्षेत्रों की सड़कें कुछ और ही वयां कर रही हैं।

जी हां हम बात कर रहे हैं आज सीमांत जिला चमोली के पोखरी ब्लॉक के दुरस्त क्षेत्र हापला घाटी की जहां पर बीते बारह साल पहले मसौली गुड़म नैल नौली मोटरमार्ग का निर्माण किया गया लेकिन आज बारह साल वीत जाने के बाद भी आज भी सड़क पर न तो पुस्ते बने और नाही सड़क का डामरीकरण हो पाया सड़क की इतनी बड़ी दुर्दशा है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बताते चलें कि इस क्षेत्र में 21 गांवों के 500 से भी अधिक परिवार रहते हैं जो कि सड़क के घटिया निर्माण कार्य के कारण मानसून सीजन में कई किलोमीटर पैदल चलकर अपना सफर तय करते है जिसको लेकर ग्रामीणों में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग के खिलाफ भारी आंक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद 2002 में भाजपा के महेन्द्र भट्ट जिनका की यहां गृहक्षेत्र है वो यहां से विधायक बने और दुबारा 2017 में यहां से विधायक बने और बर्तमान में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर शुशोभित हैं।
तो वहीं राजेन्द्र भण्डारी इसी हापला घाटी से पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष बने और 2007 में यहां से विधायक बने और कैबिनेट मंत्री बने 2012 में भी राजेन्द्र भण्डारी विधायक बने और कैबिनेट मंत्री रहे और बर्तमान में विधायक हैं जिनका गृहक्षेत्र भी यहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन दोनों जनप्रतिनिधियों का राजनैतिक जन्म इसी घाटी से हुवा लेकिन आज इस घाटी की सड़कों के बुरे हाल हैं लेकिन ये जन प्रतिनिधि सिर्फ चुनाव में यहां आते हैं और ग्रामीणों से वोट मांग कर कोई अपने आप को विकास पुरूष कहता है ओर कोई सड़क पुत्र लेकिन विकास के नाम जन प्रतिनिधि गहरी नींद में सो जाते हैं।
वहीँ ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि बारह साल पहले जब सड़क कटिंग का कार्य शुरू हुआ था जिसमे ग्रामीणों के कई खेत कटे थे जिसका मुवावजा ग्रामीणों को आज तक भी नही मिल पाया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क पर डामरीकरण का कार्य शीघ्र नही किया गया तो सम्पूर्ण हापला घाटी आगामी लोक सभा चुनाव का बहिष्कार करेगी।