Dehradun

तिरंगे के साथ निकली वीरता की रैली, सीएम धामी ने कहा – ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दी भारत की असली ताकत !

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देहरादून: राजधानी देहरादून आज देशभक्ति के रंग में रंगी नजर आई। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को ‘तिरंगा शौर्य यात्रा’ का आयोजन किया। इस यात्रा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, पार्टी के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और हजारों की संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। रैली चीड़बाग से शुरू होकर परेड ग्राउंड तक निकाली गई, जिसमें तिरंगे के साथ भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारों से वातावरण गूंज उठा।

इस ऐतिहासिक यात्रा का आयोजन ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नागरिक’ अभियान के तहत किया गया। राजधानी में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि देश की जनता आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है और सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।

रैली के बाद आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑपरेशन सिंदूर को देश की सैन्य ताकत और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने जब निर्दोष लोगों की हत्या धर्म पूछकर की, तब पूरा देश आक्रोशित था। लेकिन अब भारत चुप बैठने वाला नहीं है। हमारी सेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंक के अड्डों को तबाह किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे जवानों ने दिखा दिया कि बहनों के सिंदूर से खेलने वालों को अब छोड़ा नहीं जाएगा। पाकिस्तान की धरती पर घुसकर सेना ने जवाब दिया है। अब पाकिस्तान को समझ आ गया है कि भारत की ओर उठी हर नजर उसके विनाश का कारण बन सकती है। पहले के समय में सेना को जवाबी कार्रवाई की अनुमति नहीं मिलती थी, लेकिन अब भारत पहले वार करता है।

धामी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड के ज्यादातर घरों से कोई न कोई सेना में है, और यही कारण है कि यहां देशभक्ति की भावना बहुत मजबूत है। देहरादून की सड़कों पर आज जो जनसैलाब उमड़ा, वह देश के प्रति प्रेम और सेना के सम्मान का प्रतीक है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि तिरंगा शौर्य यात्रा का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न मनाना और आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता को दिखाना है। उन्होंने बताया कि इस यात्रा को चार चरणों में राज्यभर में चलाया जाएगा। राजधानी के बाद 15 मई को प्रमुख केंद्रों में, 16 और 17 मई को जिला मुख्यालयों में, और 18 से 23 मई तक विधानसभा क्षेत्रों, ब्लॉकों, तहसीलों, कस्बों और बड़े गांवों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस पूरे अभियान में सामाजिक संगठनों की भी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। कई स्वयंसेवी संस्थाएं और नागरिक समूह भी इस यात्रा में शामिल हुए हैं। भट्ट ने कहा कि यह यात्रा सेना के सम्मान और राष्ट्रप्रेम की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम है।

तिरंगा शौर्य यात्रा केवल एक रैली नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अभियान बन गई है। यह देश को यह याद दिलाने का प्रयास है कि जब राष्ट्र एकजुट होता है, तो कोई भी ताकत उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के साथ यह यात्रा भारत की नई सैन्य नीति और जन भावना की प्रतीक बन चुकी है।

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