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ANKITA BHANDARI CASE: महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब, प्रदेश भर से पहुंचे लोग

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अंकिता मामले में वीआईपी के नाम को लेकर परेड ग्राउंड देहरादून में महापंचायत

ANKITA BHANDARI CASE: उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP का नाम उजागर करने और उसे सजा दिलाने की मांग को लेकर परेड ग्राउंड देहरादून में महापंचायत की गई. अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की तरफ से इस महापंचायत का आवाहन किया गया था. जिसे उत्तराखंड के कई छोटे-बड़े सामाजिक और राजनैतिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया.

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ANKITA BHANDARI CASE: VIP का नाम उजागर करने को लेकर महापंचायत

राजधानी देहरादून में परेड ग्राउंड के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए. अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने को लेकर महापंचायत का आवाहन किया गया था, जिसमें प्रदेश भर से भारी संख्या में लोग एकत्रित हुए. इस महापंचायत का कई छोटे-बड़े समाजिक संगठनों ने अपने स्तर से खूब प्रचार प्रसार किया था. जिसके बाद आज देहरादून के परेड ग्राउंड में भारी संख्या में लोगों का जमावड़ा नजर आया.

तीन लोगों को पहले ही मिल चुकी है उम्रकैद की सजा

गौर हो कि अंकिता भंडारी मामले में सेशन कोर्ट पहले ही पुलकित आर्य समेत 3 लोगों को उम्रकैद की सजा सुना चुकी है. लेकिन ये आरोप भी समय समय पर तेज़ होते रहे कि अंकिता भंडारी पर किसी VIP को स्पेशल सर्विस देने का दबाव बनाया गया था. इसलिए उस VIP का नाम उजागर कर उसे सजा दिलाने के लिए कई बार प्रदेश भर में लोग विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं.

कॉल रिकॉर्डिंग के बाद हुई सीबीआई जांच की संस्तुति

एक्ट्रेस उर्मिला सनावर और पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर के ऑडियो रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद मामले ने दोबारा तूल पकड़ी. जिसके बाद विरोध प्रदर्शन तेज़ हुआ और लोगों ने सीबीआई जांच की मांग की. इसके बाद मुख्यमंत्री धामी के द्वारा मामले की सीबीआई जाँच की संस्तुति की गई. सीबीआई मामले में अज्ञात VIP के खिलाफ मुक़दमा दर्ज कर अपनी छानबीन शुरू कर चुकी है.

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पर्यावरणविद अनिल जोशी की भूमिका पर भी उठे सवाल

देहरादून महापंचायत में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान ने अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर्यावरणविद की एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच करा रहे हैं, जबकि यह जांच अंकिता भंडारी के माता-पिता की तहरीर पर होनी चाहिए थी. उनका कहना था कि जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जानी चाहिए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया, उन्हें भी सीबीआई जांच के दायरे में लाया जाए. डॉ. सचान ने आरोप लगाया कि वसंत विहार थाने में जिस व्यक्ति ने तहरीर दी है, उसका न तो अंकिता के परिवार से कोई संबंध है और न ही वो किसी आंदोलन में सक्रिय रहा है. ऐसे में उसके रोल और मोबाइल कॉल डिटेल्स की भी गहन जांच होनी चाहिए.

सभी राजनैतिक दलों को मनना होगा संघर्ष मंच का फैसला

इसके अलावा देहरादून महापंचायत में अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से ये स्पष्ट किया गया कि यहां जो भी फैसले लिए जाएंगे, उन्हें सभी राजनीतिक दलों को मानना होगा. इस दौरान महापंचायत में शामिल शिबा ने भी पर्यावरणविद की तहरीर के आधार पर जांच का विरोध किया. उन्होंने कहा कि अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच केवल उसके माता-पिता की शिकायत के आधार पर होनी चाहिए.

उनका कहना था कि मामले में सजा पाए आरोपियों के खिलाफ भी आगे की जांच जरूरी है, क्योंकि अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अंकिता की हत्या का असली मकसद क्या था. उन्होंने ये भी कहा कि इस पूरे मामले में वीआईपी एंगल का जिक्र सामने आता रहा है, लेकिन उस दिशा में ठोस जांच नहीं हुई है.

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सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच न होना चिंता का विषय: इन्द्रेश मैखुरी

महापंचायत में मौजूद भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि आखिरकार सरकार को सड़कों पर हुए आंदोलनों के दबाव में सीबीआई जांच की घोषणा करनी पड़ी. उन्होंने सवाल उठाया कि अंकिता के माता-पिता और आंदोलनकारी शुरू से ही सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे, फिर भी सरकार तीन साल तक टालमटोल करती रही.

इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अब जब जांच की घोषणा हुई है, तो वो भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नहीं कराई जा रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पर्यावरणविद की शिकायत पर सीबीआई जांच शुरू की गई, उसका इस पूरे मामले से कोई सीधा सरोकार नहीं है.; यहां तक कि 9 जनवरी को तहरीर देने के बावजूद उस व्यक्ति ने अंकिता के माता-पिता से मिलने तक की कोशिश नहीं की. इससे ये साफ होता है कि असली पीड़ित परिवार को जांच प्रक्रिया से अलग रखा गया है, और इसका जवाब सरकार को देना होगा.

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