Haldwani
सर्पदंश से बच सकती है जान! वन विभाग ने जारी किया 1926 हेल्पलाइन, जानिए क्या करें
Haldwani News : उत्तराखंड में मानसून के साथ सर्पदंश के मामलों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। लगातार हो रही बारिश के कारण सांप आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल है। ऐसे में वन विभाग ने लोगों की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1926 जारी किया है।
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सर्पदंश से बचाव के लिए हेल्पलाइन नंबर हुआ जारी
बरसात का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के कई इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। खेतों, जंगलों और रिहायशी क्षेत्रों में सांप निकलने से लोगों की चिंता भी बढ़ जाती है। कई बार घबराहट और अंधविश्वास के कारण मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे में वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों लोगों से सतर्क रहने और सही समय पर सही कदम उठाने की अपील कर रहे हैं। हल्द्वानी वन प्रभाग ने जहां सांपों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए विशेष टीमें तैयार की हैं, वहीं सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के इलाज की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
वन विभाग ने जारी किया 1926 हेल्पलाइन
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि वन प्रभाग की पांचों रेंजों में सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए प्रशिक्षित टीमें तैनात की गई हैं। पिछले एक वर्ष में आबादी वाले क्षेत्रों से करीब 700 सांपों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है।

हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने लोगों से की अपील
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने लोगों से अपील की कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं और न ही उसे मारने की कोशिश करें। तत्काल वन विभाग के टोल फ्री नंबर 1926 पर सूचना दें, जिसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ देती है।
अब तक विभिन्न क्षेत्रों से 71 सर्पदंश के मरीज पहुंचे अस्पताल
सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. परमजीत सिंह के अनुसार इस वर्ष अब तक विभिन्न क्षेत्रों से 71 सर्पदंश के मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। जून में 22 औऱ जुलाई माह में 38 सबसे अधिक सर्पदंश के मरीज अस्पताल में एडमिट हुए हैं, उन्होंने बताया कि यदि मरीज को समय पर अस्पताल लाया जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्पदंश के इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और एंटी स्नेक वेनम (ASV) मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। अब तक कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। हालांकि, दो मरीजों की मौत इसलिए हुई क्योंकि उन्हें अस्पताल पहुंचाने में काफी देर हो गई थी।