Dehradun
CM धामी ने प्रदेशवासियों को दी लोहड़ी की शुभकामनाएं, कहा – आपसी भाईचारे का प्रतीक है ये त्यौहार
Happy lohri : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को ’lohri’ पर्व की बधाई दी है। लोहड़ी पर्व की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पर्व नई फसल के आगमन, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आपसी भाईचारे का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी लोहड़ी पर्व की शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को लोहड़ी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे लोक पर्व हम सभी के जीवन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। सभी पर्वों और त्यौहारों को परस्पर सहयोग व आपसी सद्भाव से मनाने की हमारी परम्परा रही है। ये पर्व हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि व खुशहाली लाए इसकी भी मुख्यमंत्री ने कामना की है।
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क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्यौहार ?
lohri को मनाने की शुरूआत की तो इस त्यौहार को मुगलशासकों के विरुद्ध न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नायक हिन्दू गुर्जर दुल्ला भट्टी की याद में मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि दुल्ला भट्टी हर किसी की मदद किया करते थे। एक बार उन्होंने एक ब्राह्मण की कन्या जिसका नाम सुंदर मुंदरिए था, उसे मुगलों से बचाया। मुगलों से बचाने के लिए उसका विवाह सुयोग्य हिन्दू वर से करवाया था।

दुल्ला भाटी पंडित तो था नहीं इसलिए दोनों के विवाह के लिए उन्होंने आस-पास पड़ी लकड़ियों और गोबर के उपले इकटेठे किए और उन्हें जला दिया। इस दौरान उनके पास मूंगफली, रेवड़ी जैसी कुछ खाने की चीज़ें थी जिन्हें भी उसने आग में डाला और दोनों की शादी करवा दी।
हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है lohri का त्यौहार
सुन्दर मुंदरिए की शादी के दौरान दुल्ला भट्टी ने एक गीत गाया था जो कि कुछ इस प्रकार था – सुंदर मुंदरिए तेरा कौन विचारा, दुल्ला भट्टीवाला। दुल्ले दी धी व्याही, सेर शक्कर पायी, कुड़ी दा लाल पता। शादी तो हो गई लेकिन मुगलों ने दुल्ला भट्टी पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। तभी से दुल्ला भाटी की याद में हर साल 13 जनवरी को Lohri का त्यौहार मनाया जाता है।