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उत्तराखंड में भारी बारिश से आई आपदा, मुख्यमंत्री धामी ने जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने के दिए निर्देश

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देहरादून: उत्तराखंड में मानसून के दौरान आए आपदाओं ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में एक बार फिर अपनी मार दिखानी शुरू कर दी है। पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही भारी बारिश के चलते प्रदेश की कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे मैदानी इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश जारी किया है। साथ ही, नदी और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश में भारी बारिश के कारण उत्पन्न हो रही विपरीत परिस्थितियों पर चर्चा की। उन्होंने जिलाधिकारियों को नदियों के जलस्तर की निरंतर मॉनिटरिंग करने और भूस्खलन व बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को तत्पर रहने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि प्रशासन को किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने और सुरक्षा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

प्रदेश में सड़कों की स्थिति

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, उत्तराखंड में अब तक 111 सड़कें बाधित हो चुकी हैं। इनमें 5 राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), 8 राज्य मार्ग (SH), और 41 पीडब्ल्यूडी सड़कें शामिल हैं। इसके अलावा, आपदा के चलते 28 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 18 लोग घायल हैं और 8 लोग अभी भी लापता हैं। कई मकान और गौशालाएं भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

नदियों के जलस्तर में वृद्धि और चेतावनियां

राज्य के विभिन्न हिस्सों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। हरिद्वार जिले में गंगा नदी, रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी, उत्तरकाशी में भागीरथी, चमोली में अलकनंदा, पिथौरागढ़ में काली और गोरी नदी, बागेश्वर में सरयू और गोमती नदी, और चंपावत में शारदा नदी खतरे के निशान के समीप बह रही हैं। इन नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

सावधानी बरतने की अपील

आपदा प्रबंधन विभाग ने खासकर देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत और बागेश्वर जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। राजधानी देहरादून में, टपकेश्वर मंदिर के पास तमसा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से मंदिर क्षेत्र में जलमग्न हो गया है। प्रशासन ने लोगों से मंदिर से दूर रहने की सलाह दी है।

भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं

मौसम के कारण पहाड़ों से भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऋषिकेश में नीलकंठ मार्ग पर जा रही एक गाड़ी पर पत्थर गिरने से गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि कोटद्वार में भी पहाड़ से बोल्डर गिरने से बोलेरो वाहन चपेट में आ गया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और चार लोग घायल हुए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से की अपील

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारियों से अपील की है कि वे आपदा प्रबंधन के हर पहलू को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाएं। इसके साथ ही, उन्होंने सभी अधिकारियों को जरूरी उपकरण और संसाधन अपने साथ रखने के निर्देश दिए हैं। विशेष रूप से, यात्रियों के लिए भी ऐतिहात बरतने की आवश्यकता है और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगाने की बात कही गई है।

 

मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटे में राज्य के तमाम हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे क्षेत्रीय प्रशासन को और भी चौकस रहने का निर्देश दिया गया है।

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