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Uttarakhand में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से दहशत, 25 सालों में 1,264 लोगों की मौत

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Uttarakhand : प्रदेश में जंगली जानवरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बीते कुछ समय से पहाड़ों पर गुलदार का आतंक इतना बढ़ गया है कि लोगों को रात के समय तो छोड़ो दिन में भी अपने घरों से बाहर निकलने में डर लग रहा है। आलम ये है कि कुछ जिलों में जंगली जानवरों के हमलों के कारण तो स्कूलों का समय भी बदलना पड़ा है।

Uttarakhand में जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से दहशत

मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं Uttarakhand में लगातार बढ़ रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार व भालू, मैदानी क्षेत्रों में हाथी ने कई लोगों को मौत के घाट उतारा है। पिछले 25 वर्षों के आंकड़े डरावने तो है ही लेकिन इस साल की घटनाएं उससे भी ज्यादा भय का माहौल पैदा कर रही है। जिस कारण लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

25 सालों में 1,264 लोगों की मौत

उत्तराखंड के पहाड़ी जनपदों के कई गांव में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। दिन ढलते ही आवाजाही बंद हो जाती है जिसे देख ऐसा लगता है कि मानो कर्फ्यू लग गया हो। इसके पीछे की वजह प्रदेश में लगातार बढ़ता मानव वन्यजीव संघर्ष है। दिन दोपहरी में भी जंगली जानवर किसी ने किसी को अपने निवाला बना रहे हैं। इसका ताजा उ उदाहरण रामनगर का है जहां बीते शनिवार को एक व्यक्ति पर गुलदार ने हमला कर दिया। इसे व्यक्ति की किस्मत ही कहेंगे कि आस-पास मौजूद लोगों के कारण उसकी जान बच गई।

ये हमला पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि ऐसे हमले Uttarakhand में पहाड़ों से लेकर मैदानों तक अब एक आम बात हो गए हैं। बीते 25 वर्षों के आंकड़े पर नजर डालेंगे तो सामने आता है कि जंगली जानवरों ने एक या दो नहीं बल्कि हजारों लोगों को अपना निवाला बनाया है। इन 25 वर्षों में वन्यजीवों ने 1264 व्यक्तियों को मौत के घाट उतारा है, जबकि मौत को मात देते हुए 6519 लोग घायल हुए हैं।

Uttarakhand में इस साल अब तक 64 की मौत

2025 के आंकड़ों ही पर नजर डाली जाए तो ये तस्वीर और भी भयावह है। इस बार जंगली जीवों के हमले से 64 परिवारों के चिराग बुझे हैं। खास तौर पर इस साल भालू का आतंक ज्यादा ही देखने को मिला है। भालू के हमले से नौ लोगों की जान गई है जबकि 25 लोग घायल हुए हैं।

राज्यसभा से लेकर लोकसभा तक गूंजा Uttarakhand Wildlife Attacks का मुद्दा

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों को लेकर भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया है। ये मामला इतना गंभीर है कि न केवल उत्तराखंड विधानसभा के अंदर बल्कि राज्यसभा और लोकसभा के भीतर भी गूंजा है। राज्यसभा में महेंद्र भट्ट ने तो वहीं लोकसभा में अनिल बलूनी ने इस प्रकरण को उठाया है।

ये हाल तब है जब उत्तराखंड 65 फीसद वन आच्छादित है, विभाग में अफसरों की भी लंबी फौज है। लेकिन इसके बावजूद लोग खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं और प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल बयानबाजी में मशगूल हैं। लोग लगातार सवाल पूछ रहे हैं कि कब तक जंगली जानवरों के हमले में उनके अपने जान गंवाते रहेंगे लेकिन वन मंत्री इसका जवाब तक नहीं दे पा रहे। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन कर्फ्यू जैसे हालातों से प्रदेश के लोग कब मुक्त होंगे? इससे भी गंभीर सवाल ये है कि कुंभकर्णी निंद्रा में सोया वन विभाग आखिर कब जागेगा ?

Uttarakhand Wildlife Attacks – FAQs

Q1. उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमले क्यों बढ़ रहे हैं?

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की प्रमुख वजहें हैं—जंगलों का सिकुड़ना, बढ़ती जनसंख्या, जानवरों का मानव बस्तियों की ओर आना, और भोजन-पानी की तलाश में गांवों में प्रवेश करना।

Q2. सबसे ज्यादा हमले किन जंगली जानवरों द्वारा किए जा रहे हैं?

पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार (तेंदुआ) और भालू, जबकि मैदानी क्षेत्रों में हाथी लोगों पर सबसे अधिक हमले कर रहे हैं।

Q3. पिछले 25 वर्षों में कितने लोग जंगली जानवरों के हमलों में मारे गए हैं?

पिछले 25 सालों में 1,264 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा 6,519 लोग घायल हुए हैं।

Q4. क्या 2025 में भी ऐसे हमलों में बढ़ोतरी हुई है?

हाँ, 2025 में स्थिति और भयावह हो गई है। इस वर्ष अब तक 64 लोगों की मौत जंगली जानवरों के हमलों से हो चुकी है।

Q5. इस साल (2025) कौन सा जानवर सबसे ज्यादा हमला कर रहा है?

2025 में भालू के हमले सबसे अधिक सामने आए हैं—

  • 9 लोगों की मौत
  • 25 लोग घायल

Q6. क्या इन हमलों का असर स्थानीय जीवन पर पड़ रहा है?

हाँ, बेहद गंभीर असर पड़ रहा है।
कई पहाड़ी गांवों में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है।
कुछ जिलों में स्कूलों के समय भी बदले गए हैं क्योंकि बच्चों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है।

Q7. क्या हाल ही में कोई बड़ा हमला सामने आया है?

हाँ, रामनगर में एक व्यक्ति पर गुलदार ने हमला किया था। वह व्यक्ति मुश्किल से मौत के मुंह से बाहर निकल पाया—उसका बयान भी सामने आया है।

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