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वेस्ट मैनेजमेंट से रुकेंगे मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले, विभाग युद्धस्तर पर कर रहा कार्य

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देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए अब कचरा प्रबंधन पर ध्यान दिया जाएगा। वन विभाग ने बताय कि वन्यजीवों का आबादी क्षेत्र में आने का मुख्य कारण कचरे में भोजन तलाशना है। जानिए, ऐसे में अव्यवस्थित कचरे के निस्तारण के लिए क्या होगा विभाग का रोड मैप…

वेस्ट मैनेजमेंट से रुकेंगे मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामले

मानव वन्य जीव संघर्ष से छुटकारा पाने के लिए अब तक वन विभाग अकेले ही जद्दोजहद करते हुए दिखाई देता था, लेकिन अब विभाग बाकी संस्थाएं और प्रशासनिक इकाइयां भी इसमें समन्वय स्थापित करने में मदद करेंगे। इस कड़ी में प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में सभी जिलों के जिलाधिकारी और विभिन्न विभागों से भी बातचीत की गई है, जिसमें मानव वन्य जीव संघर्ष की समस्या से छुटकारा पाने के लिए उनकी सहभागिता को भी सुनिश्चित किया जाएगा।

कचरे में भोजन तलाशने आ रहे वन्य जीव

फिलहाल सबसे पहले वन विभाग इन घटनाओं के लिए बेहद अहम वजह माने जाने वाले कचरा प्रबंधन पर अपने प्रयास शुरू करने के लिए रोड मैप बना रहा ही। इसके लिए लोगों को जागरूक करने से लेकर दूसरी कई सुरक्षा गतिविधियों को भी शुरू करने का प्रयास है। जिलाधिकारियों को भी इस सम्बन्ध में ग्रामीण स्तर पर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को विभिन्न माध्यमों से इसके बारे में बताया जाएगा और जागरूक करने की कोशिश की जाएगी।

ग्रामीण स्तर पर डंपिंग के लिए बनाया जा रहा प्लान

जानकारी के मुताबिक, कचरा प्रबंधन को लेकर विभाग और प्रशासन अपनी तैयारियां शुरू कर चुका है। दरअसल जोशीमठ समेत कई जगहों पर भालुओं का झुंड कचरे में भोजन तलाशता हुआ देखा गया। जाहिर है कि इस स्थिति के कारण तमाम शिकारी वन्य जीव जंगलों से निकलकर इंसानी बस्तियों के करीब पहुंच रहे हैं। इसी बात को लेकर वन विभाग सबसे पहले कचरा प्रबंधन में ठोस नीति और व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रहा है, ताकि मानव वन्य जीव संघर्ष के लिए इस समस्या का समाधान किया जा सके।

संभावित क्षेत्रों में बड़ाई जाएगी गस्त

साथ ही विभाग ने ये स्पष्ट किया है की घटना के प्रभाव में आने वाले संभावित क्षेत्रों में गस्त बड़ाई जाएगी। जाहिर है कि यह हमले इंसानी बस्तियों के करीब सबसे ज्यादा हो रहे हैं। इसीलिए बस्तियों के आसपास चौकसी बढ़ाने के लिए वन विभाग के कर्मचारियों की भी संख्या बढ़ाई गई है।
खास बात यह है कि सर्दियां शुरू होने से ठीक पहले भालुओं का विचरण ज्यादा हो जाता है। ऐसी स्थिति में इंसानों के साथ भालू के संघर्ष की संभावना भी बेहद ज्यादा हो जाती है। अब प्रयास यह है कि गांव के आसपास कचरा ना हो तो यह भालू इंसानी बस्तियों की तरफ आकर्षित नहीं होगा और मानव वन्य जीव संघर्ष की संभावना भी कम हो जाएगी।

 

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