Dehradun
नारी निकेतन में अब जेल जैसा माहौल नहीं, मिलेगा परिवार जैसा घर!, उत्तराखंड में बन रहा ‘आलंबन गांव’
Uttarakhand News : नारी निकेतन में रहने वाली महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के लिए उत्तराखंड सरकार एक बड़ी और संवेदनशील पहल करने जा रही है। अब नारी निकेतन में रहने वाली महिलाओं और बच्चों को जेल जैसी बंदिशों का एहसास नहीं होगा, बल्कि उन्हें परिवार जैसा माहौल देने की तैयारी की जा रही है।
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नारी निकेतन में अब जेल जैसा माहौल नहीं, मिलेगा परिवार जैसा घर!
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से इसके लिए ‘आलंबन गांव’ विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य नारी निकेतन में रहने वाली महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित माहौल के साथ-साथ घर जैसा अपनापन और स्वतंत्रता देना है।
उत्तराखंड में बन रहा ‘आलंबन गांव’
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक आईएएस बंशीलाल राणा के मुताबिक, नारी निकेतन में आने वाली कई महिलाएं और बच्चे खुद को एक बंद संस्थान या जेल जैसी जगह पर महसूस करते हैं। यही वजह है कि कई बार बच्चे वहां से निकलने या भागने की कोशिश तक करने लगते हैं।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए विभाग अब ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है, जहां रहने वाले लोगों को संस्थागत माहौल के बजाय परिवार जैसा वातावरण मिल सके।
16 घरों में मिलेगा परिवार जैसा माहौल
प्रस्तावित आलंबन गांव में कॉटेज और छोटे घर विकसित किए जाएंगे। यहां एक परिवार की तर्ज पर लोगों को रखा जाएगा। योजना के मुताबिक, एक यूनिट में करीब दो महिलाएं, चार बच्चे और एक किशोरी को शामिल किया जाएगा। इस तरह उन्हें एक परिवार की तरह साथ रहने का अवसर मिलेगा।
हर यूनिट में अलग किचन जैसी सुविधाएं भी होंगी, ताकि वहां रहने वाली महिलाओं और बच्चों को रोजमर्रा के जीवन में ज्यादा स्वतंत्रता और जिम्मेदारी का अनुभव हो सके। प्रस्तावित परिसर में कुल 16 घर विकसित किए जाएंगे, जिनमें करीब 88 लोगों के रहने की व्यवस्था होगी।

जेल नहीं, रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स जैसा होगा माहौल
आलंबन गांव की सबसे खास बात यही होगी कि यहां रहने वाली महिलाओं और बच्चों को यह महसूस न हो कि वे किसी जेल या बंद संस्थान में रह रहे हैं। इसके बजाय पूरा परिसर एक रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स की तरह विकसित किया जाएगा, जहां सुरक्षा के साथ रहने, पढ़ाई, दैनिक जीवन और सामाजिक विकास से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
परिसर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र भी खोले जाएंगे। जरूरत पड़ने पर प्राथमिक विद्यालय की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है। इस पहल का मकसद सिर्फ महिलाओं और बच्चों को रहने की जगह देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे खुद को सुरक्षित, सम्मानित और परिवार का हिस्सा महसूस कर सकें।
5 एकड़ जमीन की हो रही है तलाश
आलंबन गांव विकसित करने के लिए करीब 5 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है। विभाग की पहली प्राथमिकता देहरादून जिले या उसके आसपास जमीन तलाशने की थी, लेकिन फिलहाल उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। अब विभाग की ओर से हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में जमीन की तलाश की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि हरिद्वार में इसके लिए उपयुक्त जमीन मिल सकती है।
इसके अलावा उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ में भी एक जमीन को लेकर संभावनाएं देखी जा रही हैं। विभाग यह जांच कर रहा है कि वहां की जमीन और परिस्थितियां आलंबन गांव के निर्माण के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।
महिलाओं और बच्चों को मिलेगा नया जीवन
आलंबन गांव की यह योजना सिर्फ एक नया भवन या परिसर तैयार करने की कवायद नहीं है, बल्कि नारी निकेतन में रहने वाली महिलाओं और बच्चों के प्रति सोच में बदलाव की कोशिश भी है।
अगर यह योजना धरातल पर उतरती है तो संस्थागत जीवन की जगह उन्हें परिवार जैसा माहौल, बेहतर स्वतंत्रता और सामाजिक वातावरण मिल सकेगा। इससे बच्चों और महिलाओं के मानसिक और सामाजिक विकास में भी मदद मिलने की उम्मीद है।