Dehradun
गैरसैंण सत्र से पहले 24 को देहरादून में होगी कार्यमंत्रणा की बैठक, प्रीतम सिंह ने उठाए सवाल
Uttarakhand News : 27 अक्टूबर से गैरसैंण में विधानसभा सत्र होना है। जिसके लिए तैयारियां जोरों पर हैं। सत्र से पहले 24 अक्टूबर को देहरादून में विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुलाई गई है। देहरादून में बैठक बुलाने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने सवाल उठाए हैं।
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गैरसैंण सत्र से पहले 24 को देहरादून में होगी कार्यमंत्रणा की बैठक
उत्तराखंड में 27 और 28 अक्टूबर को भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में विधानसभा सत्र प्रस्तावित है। सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही और एजेंडा तय करने के लिए 24 अक्टूबर को देहरादून में विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुलाई गई है। इस फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने सवाल उठाते हुए इसे सरकार की कथनी और करनी में अंतर बताया है।
गैरसैंण में ही क्यों नहीं हो सकती कार्यमंत्रणा की बैठक
प्रीतम सिंह ने कहा कि एक ओर राज्य सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बताकर वहां विधानसभा सत्र आयोजित करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सत्र की कार्यवाही तय करने वाली महत्वपूर्ण समिति की बैठक देहरादून में रखी गई है। उन्होंने इस निर्णय को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि जब विधानसभा सत्र भराड़ीसैंण में होना है, तो कार्य मंत्रणा समिति की बैठक भी वहीं आयोजित की जानी चाहिए।
गैरसैंण में सत्र आयोजित करना अब रह गया केवल औपचारिकता
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करना अब केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। उनके अनुसार, सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित करने और वहां राजधानी के अनुरूप सुविधाएं तैयार करने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है।

प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का श्रेय तो लेती है, लेकिन वहां नियमित रूप से विधानसभा सत्र आयोजित करने और जरूरी व्यवस्थाएं विकसित करने के मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाती। उन्होंने इसे सरकार के दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।
दो दिन के सत्र पर भी उठाए सवाल
प्रीतम सिंह ने विधानसभा सत्र केवल दो दिनों तक आयोजित किए जाने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, पलायन और आपदा प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि इतने अहम विषयों पर केवल दो दिन के सत्र में सार्थक और व्यापक चर्चा कैसे हो सकेगी। कांग्रेस नेता ने सरकार से सत्र की अवधि और उसमें प्रदेश की प्रमुख समस्याओं पर होने वाली चर्चा को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।