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उत्तराखंड: कार्तिक स्वामी मंदिर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल, पीएमओ दल ने किया निरीक्षण…

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रुद्रप्रयाग: भगवान शिव और पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र व देव सेनापति भगवान कार्तिकेय की तपस्थली, कार्तिक स्वामी मंदिर को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। पीएमओ के दो सदस्यीय दल ने हाल ही में रुद्रप्रयाग जिले के अधिकारियों के साथ मंदिर का निरीक्षण किया और वहां की सुविधाओं का जायजा लिया।

कार्तिक स्वामी मंदिर – पर्यटन और श्रद्धा का नया केंद्र
कार्तिक स्वामी मंदिर, जो रुद्रप्रयाग-चोपता-पोखरी मोटर मार्ग पर स्थित है, अब देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनता जा रहा है। यहां यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सघन वन क्षेत्र से होकर एक पैदल मार्ग है, जो इन दिनों बुरांश के फूलों से सजा हुआ है।

नई सुविधाओं का विकास और रोपवे निर्माण की मांग
मंदिर क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति ने कनकचौंरी से मंदिर तक एक रोपवे निर्माण की मांग की है। इसके अलावा, पेयजल व्यवस्था और यात्रियों के रात्रि प्रवास के लिए धर्मशाला निर्माण की भी योजना बनाई जा रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ा पहल
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से दो सदस्यीय दल ने रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी डा. सौरभ गहरवार और उप जिलाधिकारी आशीष चंद्र घिल्डियाल के साथ मिलकर कार्तिक स्वामी मंदिर का दौरा किया। अधिकारियों ने मंदिर में भगवान कार्तिकेय के दर्शन किए और क्षेत्र की सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि मंदिर को वायरलेस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि विषम परिस्थितियों में भी मंदिर से संपर्क बना रहे।

दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं का सहयोग
बीते दो वर्षों से यहां मई और जून माह में दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं द्वारा भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की पूजा अर्चना की जा रही है। उत्तराखंड सरकार की सहायता से इस धार्मिक यात्रा के दौरान विशेष रेल सेवाओं का संचालन भी किया जा रहा है।

संबंधित अधिकारियों के बयान
कार्तिक स्वामी मंदिर समिति के अध्यक्ष विक्रम सिंह नेगी ने कहा कि हम मंदिर तक पहुंच को और सुलभ बनाने के लिए रोपवे निर्माण की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, हम यात्रियों के लिए पेयजल और धर्मशाला जैसी सुविधाओं का भी प्रस्ताव कर रहे हैं।

उप जिलाधिकारी आशीष चंद्र घिल्डियाल ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय का यह दल प्रशासनिक कामकाज का निरीक्षण करने और मंदिर की सुविधाओं को लेकर सुझाव देने के लिए यहां पहुंचा था।

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