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विवाद के चलते एक युवक ने दुसरे युवक को मारी गोली, हालत गंभीर।
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अपना ही खून निकला हत्यारा, जमीनी विवाद के चलते चाचा को उतारा मौत के घाट
हरिद्वार: जमीनी विवाद से रिश्तों में पनपी दरार खून पीकर शांत हुई। सुरेश की आत्महत्या का रहस्य अब रहस्य नहीं रहा। अपना ही खून निकला हत्यारा, जमीनी विवाद के चलते सुरेश को अपनी जान खोनी पड़ी। हत्या को आत्महत्या बनाने की साजिश की जा रही थी।
आत्महत्या की गुत्थी पर पुलिस को हुआ शक
पुलिस को बीती दो दिसंबर को डायल 112 पर सूचना मिली थी कि धारीवाला गांव में एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो सुरेश पुत्र सुखबीर, उम्र 42 वर्ष का शव घर के कमरे में फर्श पर पड़ा मिला। मृतक अविवाहित था मौके पर मौजूद घरवालों ने भी घटना को आत्महत्या बताया था। लेकिन सुरेश के गले से चोट के निशान मिलने पर पुलिस ने फॉरेंसिक की टीम को बुला कर मामले की तफ्तीश शुरू कर की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ मामला
मृतक सुरेश की शादी नहीं हुई थी, इसलिए परिवार की तरफ से पुलिस को कोई तहरीर भी नहीं दी गई। पुलिस ने खुद ही इस मामले में मुकदमा दर्ज किया था। जिसके बाद मृतक के परिजनों से पूछताछ शुरू की गई। पुलिस का शक उसी व्यक्ति पर गया जो सबसे ज्यादा चिल्ला चिल्ला कर फांसी की कहानी सुनाकर रोना धोना कर रहा था। शक की सुई मृतक के भतीजे सुनील पर अटक गई, क्योंकि सबसे पहले सुनील ही सुरेश के पास गया था।

चाचा करता था गाली गलौज, अपना ही खून निकला हत्यारा
पहली नजर में देखने से मामला आत्महत्या का ही लग रह था। किसी ने सोचा भी नहीं होगा की अपना ही खून हत्यारा निकलेगा। आरोपी सुनील ने ही घरवालों को बताया कि चाचा ने फांसी लगा दी और मैंने शव को उतारकर खाट पर लिटा लिया है। शक की सुई घूमी तो सख्ती से पूछताछ की गई और आखिरकार सुनील टूट गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि चाचा अक्सर शराब पीकर आए दिन उससे गाली गलौज करता था। उसे बेइज्जत करता था। सुरेश अपनी जमीन बेचने की बात कर रहा था।जिस वजह से सुनील के मन में जलन और गुस्सा भरता गया। घटना के दिन गुस्से में सुनील ने चुन्नी से सुरेश का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। और बाद में उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश कर रहा था।
हत्या को आत्महत्या का रूप देने का था प्लान
चाचा की हत्या करने के बाद आरोपी उसे आत्महत्या का रूप देना चाहता था। जिस चुन्नी से उसने गाला दबाकर हत्या की थी, उसने मृतक के गले में वही चुन्नी बांधी और शव को टीनशेड के एंगल से लटकाने का प्रयास किया। लेकिन शरीर भारी होने के कारण शव नीचे गिर गया। अगली सुबह सुनील ने परिवार को खुद ही सूचना दी कि चाचा ने आत्महत्या कर दी और उसने शव को नीचे उतार दिया है।
पथरी थाना प्रभारी मनोज नौटियाल ने बताया कि धारीवाला गांव में हुई ग्रामीण की हत्या के रहस्य को सुलझा दिया गया है। 42 वर्षीय ग्रामीण सुरेश का कातिल उसका अपना ही खून निकला। उसके सगे भतीजे ने मौत के घाट उतारा था। पुलिस ने 24 वर्षीय सुनील नाम के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
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धराली पहुंचा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, आपदा प्रभावित क्षेत्र में लोगों के साथ ली शपथ
देहरादून: उत्तराखंड में धराली आपदा प्रभावित क्षेत्र का हाल जानने के लिए गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में मौके पर पहुंचा। निरीक्षण से पहले कांग्रेस नेताओं ने आपदा में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा। इस दौरान गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
धराली आपदा प्रभावित क्षेत्र का जायजा, इंटरनेट बंद करने का आरोप
धराली से वीडियो जारी करते हुए गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से ठीक पहले इंटरनेट बंद किया गया, जबकि इससे पहले सेवाएं सामान्य थीं। उन्होंने बताया कि टीम ने सबसे पहले मौन रखकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी, इसके बाद स्थानीय लोगों से मिलकर आपदा प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और उनकी जरूरतों का निरिक्षण किया।
“सरकार मलबे में फंसे शव तक नहीं निकाल पा रही” – गोदियाल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह क्षेत्र को फिर से सामान्य स्थिति में लाने के लिए प्रभावी कदम उठाए, लेकिन जब मलबे में दबे शवों को निकालने तक में तेजी नहीं है, तो पुनर्निर्माण की उम्मीद कैसे करें।
उन्होंने ये भी कहा कि सरकार द्वारा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को क्षतिपूर्ति न देने की बात बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक आपदा से पहले ये प्रतिष्ठान टैक्स देते थे और पर्यटन और जीएसडीपी में योगदान करते थे, ऐसे में संकट के समय सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए।
केदारनाथ आपदा का उदाहरण
गणेश गोदियाल ने कहा कि केदारनाथ आपदा के समय तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने होटल, ढाबा और व्यापार संचालकों को स्वयं नुकसान का आकलन कर एफिडेविट जमा करने की प्रक्रिया अपनाई थी, जिसके आधार पर उन्हें क्षतिपूर्ति दी गई थी। धराली आपदा को भी उसी श्रेणी में रखते हुए समान राहत देने की मांग उठाई गई।
मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता की मांग
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राहत कोष का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए हो रहा है, जबकि धराली के प्रभावित व्यावसायियों के लिए इसमें से कोई राशि आवंटित नहीं की गई। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि सरकार प्रभावित दुकानदारों और कारोबारियों से एफिडेविट लेकर नुकसान का आकलन करे और राहत राशि जारी करे।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय लोगों के साथ ली प्रतिज्ञा
धराली में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर क्षेत्र को दोबारा हरा-भरा और सुरक्षित बनाने की प्रतिज्ञा ली।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सरकार यदि पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए ठोस योजना नहीं बनाती, तो कांग्रेस सत्ता में आने पर धराली को पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।
स्थानीय लोगों ने प्रधानमंत्री द्वारा मुखवा गांव से घोषित ‘घाम तापो’ योजना का भी उल्लेख किया, जिसे वे अपने लिए लाभ की बजाय परेशानी मान रहे हैं।
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उत्तराखंड में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, अवैध मजार को किया ध्वस्त
रुड़की: हरिद्वार जिले के भगवानपुर ब्लॉक में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी भूमि पर बनी अवैध मजार को हटाया। इस मामले में प्रशासन द्वारा पहले नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर निर्धारित समय के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मजार को हटा दिया।
अवैध मजार पर चला बुलडोज़र
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों और हरिद्वार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की निगरानी में जनपद में अतिक्रमण हटाने की मुहिम ने रफ़्तार पकड़ ली है। सरकारी भूमि पर कब्जों को चिन्हित कर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है। हरिद्वार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि भगवानपुर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम शहीदवाला ग्रांट में नसीम बानो पत्नी इकबाल हसन, निवासी देहरादून, ने 0.0120 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर अवैध रूप से मजार बनाकर अतिक्रमण किया था।
सरकारी भूमि पर कब्ज़ा कर बनाई थी मजार
मामले की जांच के बाद प्रशासन ने संबंधित को विधिवत नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। जिसके बाद निर्धारित कार्रवाई के क्रम में गुरुवार को राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। नोटिस के बाद दबाव में आई अतिक्रमणकर्ता ने स्वेच्छा से स्वयं अवैध निर्माण को हटाया। प्रशासन ने सरकारी भूमि को दोबारा अपने कब्जे में लेकर मामले का निस्तारण किया। वहीं जिला प्रशासन ने स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आगे भी ऐसे अतिक्रमणकर्ताओं के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
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