Dehradun
सीएम ने की देहरादून जिले के विकास कार्यों की समीक्षा, दस्तावेजों के सत्यापन और अतिक्रमण पर सख्ती के दिए निर्देश

Dehradun News : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को राजपुर रोड स्थित वन मुख्यालय के मंथन सभागार में देहरादून जनपद के विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि सड़कों से जुड़े निर्माण कार्यों के दौरान बिजली, पानी, गैस की भूमिगत लाईन सहित अन्य जो भी कार्य होने हैं, उन्हें संबंधित विभाग आपसी समन्वय कर निर्धारित समयावधि के अन्दर कार्य पूर्ण करें।
सीएम ने की देहरादून जिले के विकास कार्यों की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर, बिजली के बिल और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के सत्यापन की कार्यवाही नियमित की जाए। जिन लोगों के गलत तरीके से दस्तावेज बने हैं, उनको निरस्त करने की कार्यवाही निरंतर की जाए और गलत प्रमाण पत्र जारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने जिला प्रशासन, वन विभाग, एमडीडीए, एवं नगर निगम अतिक्रमण हटाने की भी निरंतर कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए।
नवाचार आधारित विकास कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने बैठक में नियमित कार्यों के साथ-साथ नवाचार आधारित विकास कार्यों को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क और कॉरिडोर के विस्तार व सुधार कार्यों से देहरादून की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे शहर में पर्यटकों और आमजन की आवाजाही बढ़ेगी। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं को और गति देने की आवश्यकता है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के विचार-विमर्श कर योजनाओं पर कार्य किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार‘ कार्यक्रम के माध्यम से जन समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि जो लोग जिन योजनाओं के तहत पात्रता की श्रेणी में हैं, उन्हें योजनाओं का लाभ अवश्य मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शिता, समयबद्धता और जनहित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए सभी विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें।
ठंड से बचाव के लिए उपाय करने के दिए निर्देश
शीतकाल को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने महिलाओं और बुजुर्गों के प्रति विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगर निगम के रैन बसेरों में सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ ही प्रमुख चौक-चौराहों पर ठंड से बचाव के लिए अलाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान पुलिस को यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने, रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने, नशा मुक्ति अभियान के तहत नियमित जागरूकता के साथ ही रैण्डम चैकिंग करने के निर्देश भी दिये।
कैबिनेट मंत्री एवं जनपद के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी विभागों आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। कार्यों की प्राथमिकता तय कर उनको समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में और अधिक प्रभावी प्रयास करने होंगे।
दून में UCC के तहत 61 हजार पंजीकरण
जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल ने जनपद में संचालित विकास कार्यों की प्रगति और प्रमुख उपलब्धियों के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के अंतर्गत जिले में अब तक 61 हजार पंजीकरण किए जा चुके हैं। सीएम हेल्पलाइन पर पंजीकृत 7,662 शिकायतों में से 6,480 का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि शेष शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जा रहा है।
जनपद में 3,58,536 राशन कार्डों में से 2,81,366 का सत्यापन करते हुए 5,590 कार्ड निरस्त किए गए हैं। इसी प्रकार 12,06,960 आयुष्मान कार्डों में से 1,36,676 का सत्यापन कर 9,428 कार्ड निरस्त किए गए हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 57 हेक्टेयर अतिक्रमित भूमि में से 47 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है।
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अंकिता केस पर उत्तराखंड में बवाल, लोकभवन पहुंचे कांग्रेसी नेता, पुलिस ने हिरासत में लिया

Dehradun News : उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। मामले में कथित VIP की राज्यपाल पद पर नियुक्ति और दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के विरोध में कांग्रेस ने देहरादून में प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं ने लोकभवन पहुंचकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। हंगामे के बीच पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया।
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अंकिता केस पर प्रेस वार्ता के बाद लोकभवन पहुंची कांग्रेस
प्रदर्शन से पहले कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने संयुक्त प्रेस वार्ता की। इसके बाद पार्टी के नेता अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर लोकभवन पहुंचे और वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वे लोकभवन में ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन उनका ज्ञापन लेने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। इसके बाद प्रदर्शन तेज हो गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस दौरान हरक सिंह रावत ने आत्मदाह करने की धमकी भी दी।
कथित VIP की नियुक्ति पर सरकार को घेरा
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP को लेकर सवाल उठने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनका कहना है कि सरकार ने स्वयं इस प्रकरण में CBI जांच की संस्तुति की थी, ऐसे में नियुक्ति के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि अब मातृशक्ति को एकजुट होकर न्याय की मांग उठानी चाहिए। उनके मुताबिक, अंकिता को न्याय नहीं मिलने के कारण पूरे देश की नजरें उत्तराखंड पर हैं और इस मामले से प्रदेश की छवि प्रभावित हो रही है।

हरीश रावत बोले- अस्मिता से जुड़ा है मामला
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अंकिता भंडारी प्रकरण को उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा मामला बताया। उन्होंने कहा कि अंकिता ने अपने गौरव की रक्षा के लिए अपनी जान गंवाई और अब यह सभी की जिम्मेदारी है कि मामले को न्यायिक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए।
हरीश रावत ने कहा कि अंकिता के लिए न्याय की लड़ाई केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का संघर्ष है। उन्होंने इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने की निंदा भी की।
हरक सिंह रावत ने गिरफ्तारी को बताया तानाशाही
कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने अंकिता के माता-पिता को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे तानाशाही करार देते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला।
अंकिता भंडारी मामले में कथित VIP की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी की मांग है कि नियुक्ति के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और अंकिता को न्याय दिलाने के लिए मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
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27 अक्टूबर से गैरसैंण में जुटेगा उत्तराखंड विधानसभा का सदन, राज्यपाल ने दी सत्र को मंजूरी

Uttarakhand News : उत्तराखंड विधानसभा का आगामी सत्र 27 अक्टूबर से गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित होगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने सत्र की तारीख और समय को लेकर आधिकारिक सूचना जारी कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार, सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे से शुरू होगी।
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27 अक्टूबर से गैरसैंण में विधानसभा का मानसून सत्र
विधानसभा सचिवालय के अनुसार, ये उत्तराखंड की पंचम विधानसभा का वर्ष 2026 का तीसरा सत्र होगा। सत्र की तिथि निर्धारित होने के साथ ही इसके आयोजन की तैयारियां तेज होने की उम्मीद है। फिलहाल सत्र कितने दिन चलेगा, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। इसके अलावा सदन में रखे जाने वाले विधेयकों और प्रस्तावित कार्यसूची का भी अभी खुलासा नहीं किया गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने तैयारियों पर क्या कहा?
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सत्र की तैयारियों को लेकर कहा कि विधानसभा सचिवालय पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं, ताकि सत्र का संचालन सुचारु रूप से किया जा सके।

सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सदन में होगी चर्चा
गैरसैंण की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में होने वाला यह सत्र राज्य की विधायी गतिविधियों के लिहाज से अहम है। सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सदन में चर्चा होगी। हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच किन विषयों पर प्रमुखता से बहस होगी, यह विस्तृत कार्यसूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
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उत्तराखंड के नए राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन कौन हैं? MP से राजभवन तक का सफर जानिए

Dhal Singh Bisen Biography : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले बिसेन लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
विधायक से लेकर कैबिनेट मंत्री और लोकसभा सांसद तक की जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब उन्हें राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। आखिर कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन, मध्य प्रदेश से उनका क्या नाता है और कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर? आइए जानते हैं।
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उत्तराखंड के नए राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन कौन हैं?
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बरघाट विधानसभा क्षेत्र के पिपरिया में हुआ था। उनका राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश की विधानसभा से शुरू हुआ। वर्ष 1990 में वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 1993, 1998 और 2003 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने बरघाट सीट से जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने लगातार चार बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
मध्य प्रदेश सरकार में संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद डॉ. बिसेन को मध्य प्रदेश सरकार में भी अहम जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2003 से 2005 के बीच वे कैबिनेट मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने वन, परिवहन, स्कूल शिक्षा, खनिज और जेल जैसे विभागों का दायित्व संभाला। इसके बाद वर्ष 2011 से 2013 तक उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में काम किया।
2019 में पहुंचे लोकसभा, 2024 में कटा टिकट
राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने लोकसभा चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमाई। वर्ष 2019 के आम चुनाव में भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश की बालाघाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। चुनाव जीतकर वे पहली बार लोकसभा पहुंचे।
बालाघाट संसदीय क्षेत्र में सिवनी जिले के कुछ हिस्से भी शामिल हैं। बरघाट विधानसभा क्षेत्र में पहले विधायक के रूप में काम करने का अनुभव उनके लिए चुनावी राजनीति में उपयोगी रहा। हालांकि, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट नहीं दिया। अब राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति ने उनके राजनीतिक सफर को एक नई दिशा दी है।

पवार समाज से आते हैं डॉ. बिसेन
डॉ. ढाल सिंह बिसेन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के पवार समाज से संबंध रखते हैं। बालाघाट क्षेत्र में पवार समाज की उल्लेखनीय उपस्थिति रही है और यहां की चुनावी राजनीति में इस समुदाय की भूमिका भी अहम मानी जाती है।
बालाघाट लोकसभा सीट से सांसद रहे बोध सिंह भगत और डॉ. ढाल सिंह बिसेन के बाद वर्तमान सांसद भारती पारधी भी पवार समाज से आती हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर बिसेन का भी बालाघाट की राजनीति में प्रमुख स्थान रहा है।
डॉक्टर और किसान भी हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन
राजनीति के अलावा डॉ. ढाल सिंह बिसेन की पहचान होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़े व्यक्ति के रूप में भी रही है। वे मूल रूप से किसान हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव, विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व तथा राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभाने के बाद अब उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल की भूमिका सौंपी गई है।
मध्य प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. ढाल सिंह बिसेन के लिए राज्यपाल पद तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया पड़ाव है। अब उत्तराखंड में संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी पर सभी की निगाहें रहेंगी।
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