Rudraprayag
केदारनाथ धाम यात्रा: सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद केदारनाथ यात्रा मार्ग पर नहीं होगा घोड़े-खच्चरों का संचालन….

रुद्रप्रयाग: उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के आदेश के बाद केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद किसी भी घोड़े-खच्चर का संचालन प्रतिबंधित कर दिया गया है। नियम तोड़ने वाले संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तहसील प्रशासन ऊखीमठ और पशुपालन विभाग इस बात पर सख्ती से नजर रखे हुए हैं।
केदारनाथ यात्रा में लगभग पांच हजार घोड़े-खच्चर यात्रियों और सामग्री ढोने में मदद करते हैं। कुछ समय पहले संक्रमण फैलने के कारण इनकी आवाजाही रोकनी पड़ी थी, लेकिन पशुपालन विभाग द्वारा क्वारंटीन और स्वास्थ्य जांच के बाद अब केवल स्वस्थ और फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त घोड़े-खच्चरों को ही यात्रा मार्ग पर चलने की अनुमति दी जा रही है। इस प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए सात पशु चिकित्सकों की टीमें अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं।
हाईकोर्ट ने घोड़े-खच्चरों के पंजीकरण और स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य कर दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का संचालन केवल पंजीकृत और स्वस्थ्य जानवरों द्वारा ही किया जा सकता है और आधे रास्ते में आवाजाही बंद करना प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।
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Rudraprayag: घरवालों को बिना बताए केदारनाथ घूमने पहुंचा नाबालिक, पुलिस ने परिजनों को सौंपा बालक

रुद्रप्रयाग: पुलिस ने एक 13 वर्षीय बालक को सकुशल परिजनों को सौंप दिया है। नाबालिक बालक मध्यप्रदेश का रहने वाला है जो अपने घर वालों को बिना बताए केदारनाथ घूमने निकल पड़ा। इस सम्बन्ध में एक स्थानीय व्यापारी द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी गई।
घर वालों को बिना बताए केदारनाथ घूमने निकल पड़ा नाबालिक
जानकारी के मुताबिक, एक स्थानीय व्यापारी ने चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी कि एक नाबालिग बालक धीरेन्द्र प्रजापति, जिसकी उम्र लगभग 13 वर्ष है, अपने घर मध्य प्रदेश से भागकर रुद्रप्रयाग पहुंच गया है। सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण इकाई द्वारा बच्चे के पास पहुंचकर उससे विस्तृत वार्ता कर पूरी जानकारी प्राप्त की गई।
मध्यप्रदेश से रुद्रप्रयाग पहुंचा 13 वर्षीय धीरेन्द्र
बालक अपने परिजनों का नंबर नहीं बता पाया। जिसके बाद रुद्रप्रयाग पुलिस के द्वारा विभिन्न चैनलों के माधयम से बालक के परिजनों का पता लगाया गया है। जिसके बाद पुलिस ने बालक के माता-पिता से संपर्क कर बालक के सकुशल होने की जानकारी पहुंचाई। जिसके बाद टीम द्वारा बच्चे का मेडिकल चेकअप किया गया और आज बच्चे के परिजनों से संपर्क करके बच्चे को सकुशल परिजनों को सौंप दिया गया है।
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बद्रीनाथ हाइवे से जुड़े प्राथमिक विद्यालय घोलतीर की हालत जर्जर, प्रशासन नहीं ले रहा सुध
रुद्रप्रयाग: बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय घोलतीर पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन की दीवारों में चौड़ी दरारें नजर आती हैं, बरसात में कमरों के अंदर पानी टपकने लगता है और शौचालय की हालत बेहद खराब है। मैदान में भी पानी भरने से बच्चे खेल नहीं पाते।
रुद्रप्रयाग के घोलतीर प्राथमिक विद्यालय की हालत जर्जर
स्कूल की बदहाल स्थिति के कारण कई अभिभावक बच्चों को यहाँ नहीं भेज रहे हैं, जिससे छात्रों की संख्या घटकर अब केवल 13 रह गई है। ये भवन वर्ष 1973 में बनाया गया था और अब किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
तीन साल से चल रही है नवनिर्माण की मांग
स्थानीय लोग लगातार इसकी मरम्मत और नवनिर्माण की मांग कर रहे हैं। साल 2023 में भी ध्वस्तीकरण और नए भवन की मांग विभाग तक पहुंची थी, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
डीएम दिए कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने इस मामले पर कहा कि शिक्षा विभाग को स्कूल की स्थिति सुधारने और आवश्यक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए जाएंगे। ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार विभाग जल्द कार्रवाई करेगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।
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चाईल्ड हेल्पलाइन की सतर्कता से दो बच्चों का भविष्य हुआ सुरक्षित

चाईल्ड हेल्पलाइन की सतर्कता से दो बच्चों का भविष्य हुआ सुरक्षित
रुद्रप्रयाग : चाईल्ड हेल्पलाइन रुद्रप्रयाग को कुछ दिन पहले सूचना मिली कि सारी-छिनका निवासी दो भाई-बहिन जो बेसहारा बच्चे हैं। इनके माता-पिता दोनों ही मानसिक रूप से विक्षिप्त हैं। साथ ही उनके भरण-पोषण का कोई अन्य सहारा नहीं है।
सूचना मिलते ही इन बच्चों की मदद हेतु चाईल्ड हेल्पलाइन, बाल संरक्षण इकाई एवं बाल कल्याण समिति की पूरी टीम उक्त बच्चों के घर पर गई। जहां बच्चों द्वारा बताया गया कि उनके पिता द्वारा शराब पीकर घर पर हमेशा मारपीट व लड़ाई-झगड़ा किया जाता है, ऐसे में इन बच्चों का भविष्य बर्बादी के कगार पर है। बच्चों की परवरिश के लिए अन्य कोई सहारा भी नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चाईल्ड हेल्पलाइन, बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति रुद्रप्रयाग द्वारा बच्चों के सुरक्षित भविष्य व बच्चों के सर्वोत्तम हित हेतु चिल्ड्रेन विलेज बौराडी टिहरी गढ़वाल भेजने का निर्णय लिया गया है।
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