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अधिकारियों और अग्निशमन मशीनरी के साथ जंगलों की भड़कती आग को स्वयं बुझाने पहुंचे डीएम आशीष चौहान।

पौड़ी – जिला मुख्यालय स्थित टेका मार्ग पर आग लगने की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा आग को नियंत्रित करने में सफलता पाई। उच्च स्थानों में लगी आग पर काबू पाने के लिए फायर टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए आग पर नियंत्रण पाकर पूर्णरुप से बुझाया गया। जिलाधिकारी ने आम जनमानस से अपील करते हुए कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए सभी लोग आगे आएं और अपना सहयोग जिला प्रशासन को प्रदान करें। शनिवार देर रात को टेका मार्ग के जंगल में लगी आग पर काबू पाने के लिए जिलाधिकारी व संबंधित अधिकारियों ने आग बुझाने की कार्रवाई की। उनकी तत्परता और शीघ्रता के कारण आग को नियंत्रित करने में सफलता मिली। जिलाधिकारी ने जंगलों में आग लगने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कहा। साथ ही सख्त निर्देश भी दिए कि जो भी जंगल में आग लगाते हुए पाया जाता है, उस पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करें।

उन्होंने कहा कि आग लगने की सूचना को तुरंत वन विभाग के कंट्रोल रूम के टाल फ्री नम्बर- 18001804141 में पहुंचाएं, ताकि आग बुझाने की कार्रवाई की जा सके। उन्होंने वन विभाग, फायर टीम, राजस्व विभाग और संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश भी दिए।जिलाधिकारी ने कहा कि जंगलों में आग लगने से पर्यावरण पर घातक प्रभाव पड़ने के साथ ही वनस्पति, जंगली जानवर और पक्षियों की हत्या, जल स्रोत सूखना, भूस्खलन को बढ़ावा मिलना, जलवायु परिवर्तन बढ़ने का खतरा सहित अन्य नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि सभी को अपनी प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। इस दौरान डीएफओ सिविल सोयम प्रदीप कुमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट अनामिका, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका गौरव भसीन, एसडीओ वन विभाग लक्की शाह सहित अग्निशमन टीम, राजस्व टीम, स्थानीय पुलिस, आपदा प्रबंधन की टीम और जनपद स्तरीय अधिकारी और कार्मिक आग बुझाने वालों में शामिल थे।
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चौबट्टाखाल में उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
Pauri News : चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के गवाणी गांव में एक साल पहले बारिश में बहा पुल अब तक दोबारा नहीं बन सका है। पुल के टूटने से आसपास के कई गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। बरसात के दिनों में बच्चों को उफनती मछलाड नदी को पार कर स्कूल जाना पड़ रहा है, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
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चौबट्टाखाल में उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
चौबट्टाखाल में उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को बच्चे मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि अगस्त 2025 में हुई भारी बारिश के दौरान गवाणी गांव का पुल बह गया था। ये पुल ड्वीला मल्ला, ड्वीला तल्ला, देगला और तिमलपट समेत आसपास के गांवों को आपस में जोड़ता था। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गईं और करीब एक साल गुजरने के बावजूद इसका निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।

उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंच रहे बच्चे
पुल नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों को स्कूल जाने के लिए जोखिम भरा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। पानी के रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचने में बच्चों को करीब 3 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं, यदि बच्चे जंगल के रास्ते से स्कूल जाते हैं तो दूरी बढ़कर करीब 5 किलोमीटर हो जाती है।
जंगल वाले रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है।
एक साल बाद भी नहीं शुरू हुआ पुल का निर्माण
ग्रामीणों का कहना है कि पुल बहने के बाद से ही संबंधित विभाग और सरकार से इसके पुनर्निर्माण की मांग की जा रही है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही पुल का निर्माण शुरू होगा, लेकिन लगभग एक साल बीतने के बाद भी धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ।
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सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही!, गैस की दवा मांगी लेकिन अस्पताल ने थमा दी मिर्गी की दवा…

Pauri News : उत्तराखंड सरकार चाहे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर लाख दावे करे लेकिन आए दिन कोई ना कोई ऐसी वीडियो जरूर सामने आ जताी है जो लचर स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल कर रख देता है।
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गैस की दवा मांगी लेकिन अस्पताल ने थमा दी मिर्गी की दवा
उत्तराखंड में कभी-कभी तो स्वास्थ्य विभाग के ऐसे कारनामे सामने आते हैं तो सोचने पर मजबूर करते हैं। ताजा मामला पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार से सामने आया है। यहां एक मरीज को गैस की समस्या हुई थी और डॉक्टर ने गैस की ही दवाई लिखी लेकिन दवा वितरण केंद्र से उन्हें गैस की दवाई के बदले मिर्गी की दवाई दे दी गई।
अस्पताल की लापरवाही का ऐसे हुआ खुला
मिली जानकारी के अनुसार, कोटद्वार निवासी रेखा नाम की महिला को बीती रात गैस की समस्या हुई थी। इलाज के लिए वो बेस अस्पताल पहुंचीं, जहां वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जे.सी. ध्यानी ने जांच के बाद गैस की दवा लिखी। आरोप है कि दवा वितरण केंद्र से उन्हें गैस की दवा की बजाय मिर्गी की दवा दे दी गई।
राहत की बात यह रही कि रेखा ने दवा खाने से पहले उसकी जांच कर ली। दवा पर लिखी जानकारी देखकर उन्हें गलती का पता चला। इसके बाद वो अपने परिजनों के साथ अस्पताल पहुंचीं और इस लापरवाही को लेकर नाराजगी जताते हुए हंगामा किया।

अस्पताल की दवा वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
बाद में डॉ. जे.सी. ध्यानी ने मरीज और उनके परिजनों को समझाकर मामला शांत कराया। हालांकि, इस घटना ने अस्पताल की दवा वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर मरीज बिना जांच किए दवा का सेवन कर लेती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। लेकिन ये पहला मामला नहीं है आए दिन प्रदेशभर से ऐसे मामले सामने आते रहते हैं।
क्या स्वास्थ्य विभाग करवाएगा मामले की जांच ?
इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पतालों में दवा वितरण प्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर रेखा ने दवा खाने से पहले उसकी जांच नहीं की होती, तो इस लापरवाही की कीमत कौन चुकाता? अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या फिर ये मामला भी कुछ दिनों की चर्चा बनकर फाइलों में दब जाएगा।
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सतपुली में पहाड़ी से भारी बोल्डर गिरने से पिकअप वाहन आया चपेट में, चालक सुरक्षित

Pauri News : पौड़ी जिले के सतपुली गुमखाल सतपुली एनएनच 534 हाईवे पर सतपुली मल्ली के निकट सब्जी से भरा पिकअप वाहन में पहाड़ से बड़ा बोल्डर गिरने के कारण चपेट में आ गया।
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सतपुली में पहाड़ी से बोल्डर गिरने से पिकअप वाहन आया चपेट में
पौड़ी में अचनाक से बोल्डर गिरने के कारण एक पिकअप वाहन उसके चपेट में आ गया। जिस से मौके पर हड़कंप मच गया। उप जिलाधिकारी रेखा आर्य और सतपुली थाना उपनिरीक्षक रियाज अहमद ने बताया कि शनिवार सुबह लगभग 7 बजे मिली सूचना पर थाना सतपुली पुलिस टीम और एसडीआरएफ टीम के मौके पर पहुंची।
वन विभाग गेस्ट हाउस के पास हुआ हादसा
उन्होंने बताया कि एक पिक-अप वाहन सतपुली मल्ली के पास वन विभाग गेस्ट हाउस से करीब 200 मीटर पहले मलवे की चपेट में आ गया है। मौके पर वाहन के अन्दर देखा को कोई व्यक्ति मौजूद नहीं मिला। जिसके बाद वाहन को रास्ते से हटाया गया।

उत्तर प्रदेश का रहने वाला है वाहन चालक
वाहन के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने पर वाहन स्वामी से सम्पर्क किया गया। तो पता वाहन चालक और स्वामी से वार्ता करने पर उसने अपना नाम रईस अहमद पुत्र शफीक अहमद निवासी- क़स्बा जलालाबाद जिला-बिजनौर का होना बताया।
अचानक वाहन पर पत्थर गिरने से चालक निकल गया था बाहर
इसके साथ ही बताया कि वो कल रात कोटद्वार से सब्जी लेकर आ रहा था तो समय करीब 11.30 बजे रात में बारिश के कारण रोड़ में बड़े- बड़े पत्थर और मलबा आने के कारण रोड बंद थी। पत्थर गिरने का और अधिक अंदेशा हो रहा था जिस कारण ववो गाड़ी को वहीं पर छोड़ कर बाहर आ गया था। उसके बाद और पत्थर गाड़ी से टकरा गए तो वो खुद सुरक्षित पाटीसैंण चला गया था।
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