Haldwani
एनएसजी कमांडो की दिल्ली में फायर ड्रिल में मौत,19 नवंबर को होने वाली थी शादी !

लालकुआं: लालकुआं के बिंदुखत्ता क्षेत्र के निवासी 30 वर्षीय एनएसजी कमांडो नरेंद्र सिंह भंडारी की दिल्ली में एक फायर ड्रिल के दौरान गोली लगने से दर्दनाक मौत हो गई। इस खबर से उनके परिवार में शोक की लहर फैल गई है। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, नरेंद्र की मौत मंगलवार शाम लगभग 6 से 7 बजे के बीच हुई, जब वह दिल्ली में फायर ड्रिल में भाग ले रहे थे। हादसे के बाद उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से उनके घर लाने की प्रक्रिया जारी है।
नरेंद्र सिंह भंडारी पिछले 10 वर्षों से एनएसजी कमांडो के रूप में कुमाऊं रेजीमेंट के तहत सेवा दे रहे थे। उनके पिता स्व. गोपाल सिंह भंडारी भी एक पूर्व सैनिक थे, जिनका दो वर्ष पहले निधन हो चुका था। नरेंद्र के बड़े भाई यशवंत सिंह भंडारी एक कृषक हैं, जबकि मझले भाई माधव सिंह रेलवे में लोको पायलट के पद पर कार्यरत हैं। उनकी छोटी बहन हीरा भंडारी और मां माधवी देवी सहित पूरे परिवार का बुरा हाल है, जिन्होंने इस दुखद समाचार को सुनते ही रो-रो कर दुख व्यक्त किया।
बताया जा रहा है कि नरेंद्र की शादी आगामी 19 नवंबर को हल्द्वानी के एक बैंकट हॉल में होने वाली थी, और उनकी शादी लोहाघाट निवासी एक युवती से तय हुई थी। शादी के कार्ड भी वितरित किए जा चुके थे। परिवार इस हादसे से पूरी तरह सदमे में है।
नरेंद्र सिंह भंडारी का पार्थिव शरीर दोपहर बाद उनके घर पहुंचेगा, और गुरुवार को उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- एनएसजी कमांडो नरेंद्र भंडारी की दिल्ली में फायर ड्रिल के दौरान गोली लगने से मौत।
- परिवार में शोक की लहर, शादी के कार्ड भी बंट चुके थे।
- 10 वर्षों तक कुमाऊं रेजीमेंट और जम्मू-कश्मीर में रहे थे तैनात।
- पार्थिव शरीर गुरुवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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Haldwani
हल्द्वानी में खौफनाक मंजर! उफनती भाखड़ा नदी में फंसे दो लोग, बाल-बाल बची जान

Haldwani News : लगातार हो रही बारिश अब उत्तराखंड में खतरे की घंटी बनती जा रही है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने कुछ देर के लिए हर किसी की सांसें रोक दीं। फतेहपुर क्षेत्र की उफनती भाखड़ा नदी पार करते समय दो लोग तेज बहाव में फंस गए।
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हल्द्वानी में उफनती नदी में बहने ही वाले थे दो लोग
नैनीताल जिले के फतेहपुर क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच सोमवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया। भाखड़ा नदी पार करने के दौरान बाइक सवार दो लोग अचानक तेज बहाव में फंस गए। स्थिति गंभीर होती देख आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
भाखड़ा नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से पड़ी जान खतरे में
इन दिनों मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इसी बीच फतेहपुर की भाखड़ा नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से दो लोगों की जान खतरे में पड़ गई।

बाइक के साथ नदी पार करने का कर रहे थे प्रयास
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों व्यक्ति बाइक के साथ नदी पार करने का प्रयास कर रहे थे। तभी नदी का बहाव तेज हो गया और वे बीच धारा में फंस गए। उन्हें संघर्ष करते देख आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए राहत कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई की बदौलत दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बरसात के दौरान नदी का बढ़ जाता है जलस्तर
ग्रामीणों का कहना है कि खेती, स्कूल, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए उन्हें रोज इसी रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से हर बार दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द स्थायी पुल निर्माण की मांग दोहराई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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हल्द्वानी के लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा, रेत में दबने से मजदूर की मौत

Haldwani News : उत्तराखंड के लालकुआं में एक स्टोन क्रशर पर हुए दर्दनाक हादसे ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्दूचौड़ निवासी 30 वर्षीय मजदूर पवन सिंह की काम के दौरान रेत में दबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि डंपर में रेत भरने की प्रक्रिया के दौरान हुई कथित लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
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लालकुआं में स्टोन क्रशर पर दर्दनाक हादसा
लालकुंआ में दर्दनाक हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। मिली जानकारी क मुताबिक हल्दूचौड़ निवासी पवन सिंह रोज की तरह सुबह काम पर गया था। स्टोन क्रशर में वह डंपर के किनारों पर कट्टे लगा रहा था ताकि रेत बाहर न गिरे।
रेत में दबने से मजदूर की मौत
इसी दौरान लोडर चालक ने कथित तौर पर बिना ये देखे कि डंपर में कोई व्यक्ति मौजूद है या नहीं, उसमें रेत डालनी शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में पवन भारी मात्रा में रेत के नीचे दब गया। बरसात के कारण रेत गीली और अधिक भारी थी, जिससे उसके बाहर निकलने की कोई संभावना नहीं बची।
रेत खाली करते समय चला हादसे का पता
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ समय बाद जब डंपर से रेत उतारी जा रही थी, तब मजदूरों को रेत के नीचे पवन के दबे होने की जानकारी मिली। इसके बाद सभी ने मिलकर उसे बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। माना जा रहा है कि रेत के दबाव और दम घुटने की वजह से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद कार्यस्थल पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मशीन चलाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता कि डंपर के अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भारी मशीनों के संचालन के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना आवश्यक है। मशीन शुरू करने से पहले कर्मचारियों की मौजूदगी की पुष्टि करना, आपसी समन्वय बनाए रखना और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना ऐसे हादसों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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हल्द्वानी में बड़ा हादसा, निर्माणाधीन पानी के टैंक में दम घुटने से मां और दो बेटों की मौत

Haldwani News : हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में मंगलवार शाम एक बेहद दुखद हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई। निर्माणाधीन भूमिगत पानी के टैंक के भीतर जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण मां और उसके दो बेटे बेहोश हो गए। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
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निर्माणाधीन पानी के टैंक में दम घुटने से मां और दो बेटों की मौतह
हल्द्वानी में गौलापार की कुंवरपुर न्याय पंचायत के मानपुर गांव निवासी धर्मेंद्र बिष्ट ने अपने घर के पास कुछ समय पहले भूमिगत पानी का टैंक बनवाया था। मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे टैंक की शटरिंग हटाने का काम चल रहा था। इसी दौरान धर्मेंद्र टैंक के अंदर उतर गए, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं आए।
जब धर्मेंद्र की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उनके छोटे भाई खुशाल सिंह उन्हें देखने के लिए टैंक में उतरे। कुछ ही देर बाद वह भी अंदर ही अचेत हो गए।
बेटों को बचाने उतरी मां भी हुई बेहोश
दोनों बेटों के बाहर न आने पर उनकी मां सरस्वती देवी को अनहोनी की आशंका हुई। वह भी टैंक के अंदर गईं, लेकिन वहां मौजूद गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण वह भी बेहोश होकर गिर गईं।
बचाव के दौरान एक और व्यक्ति हुआ अचेत
परिजनों और ग्रामीणों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। गांव के सब्जी विक्रेता भोज राम ने तीनों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन टैंक में उतरते ही वह भी अचेत हो गए। हालांकि, ग्रामीणों ने तुरंत सभी को बाहर निकाला, जिससे भोज राम को होश आ गया, लेकिन मां और दोनों बेटों की हालत गंभीर बनी रही।
अस्पताल में डॉक्टरों ने तीनों को किया मृत घोषित
ग्रामीण तुरंत तीनों को सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद धर्मेंद्र बिष्ट, खुशाल सिंह और उनकी मां सरस्वती देवी को मृत घोषित कर दिया।
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