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पर्यटक अपडेट: नए साल पर होटल की बुकिंग होने पर मिलेगा प्रवेश…नही तो उठानी पड़ेगी परेशानी।

नैनीताल – नए साल पर नैनीताल के लिए उन ही सैलानियों के वाहनों को भेजा जाएगा जिनके बुकिंग वाले होटल में पार्किंग की सुविधा होगी। बिना पार्किंग वाले होटल में बुकिंग करने वाले सैलानियों को अस्थायी पार्किंग से शटल सेवा से नैनीताल जाना पड़ेगा।

31 दिसंबर के लिए नैनीताल पुलिस ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। पर्यटक वाहनों के दबाव के कारण जाम की समस्या से निपटने के लिए सभी पर्यटकों के वाहनों को नैनीताल शहर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मुक्तेश्वर, भीमताल, भवाली जाने वाले पर्यटकों को कालाढूंगी और हल्द्वानी से डायवर्ट कर दियाजाएगा। ऐसे पर्यटक अपने वाहन लेकर नैनीताल नहीं जा सकेंगे।
अन्य जिलों से मांगी फोर्स
एसएसपी नैनीताल प्रह्लाद नारायण मीणा ने कहा कि नैनीताल जिले में करीब 1600 पुलिस कर्मी कार्यरत हैं। नैनीताल पुलिस ने नए साल के लिए ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत जिलों से सब इंस्पेक्टर, सिपाही और ट्रैफिक इंस्पेक्टरों की मांग की है।
31 दिसंबर को पर्यटकों को वाहन के साथ तभी नैनीताल में प्रवेश मिल पाएगा जिनके बुक किए गए होटल में पार्किंग की व्यवस्था होगी। बिना पार्किंग वाले होटलों को बुक करने वाले पर्यटकों को शटल सेवा से भेजा जाएगा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अन्य जिलों से भी फोर्स मांगी गई है। 28 दिसंबर तक फोर्स उपलब्ध हो जाएगी।
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पानी और सड़क के लिए नैनीताल में आंदोलन, भूमियाधार के लोगों ने जमकर की नारेबाजी

Nainital News : नैनीताल के भूमियाधार के ग्रामीणों ने पानी और सड़क के लिए अपना आंदोलन तेज किया भूमियाधार के ग्रामीण कई दिनों से पानी और मोटर मार्ग के लिए धरना प्रदर्शन किया उनके समर्थन में समाजसेवी शीलू कुमार भी पहुंचे ग्रामीण का कहना है कि 10 वर्षों से विधायक सरिता आर्या का गढ़ होने के बावजूद भी यहां के ग्रामीण पानी और मोटर मार्ग के लिए तरस रहे हैं।
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पानी और सड़क के लिए नैनीताल में आंदोलन
आज पंकज बिष्ट नेतृत्व पर ग्रामीणों ने हल्द्वानी भवाली रोड एकत्रित होकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया मोटर मार्ग को लेकर ग्रामीणों के धरना प्रदर्शन पर बेतालघाट लोग औऱ समाजसेवी से जुड़े लोग भी इनके समर्थन में आए ग्रामीणो ने कहा की रोड नहीं वोट नहीं के नारे लगाए साफ तोर पर कहा चुनाव से पहले मोटर मार्ग नहीं बनी तो 2027 विधानसभा चुनाव का भविष्कार करने का ऐलान किया।
भूमियाधार के लोगों ने जमकर की नारेबाजी
ग्रामीणों को पानी और रोड की समस्या को लेकर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है वही शाम होते ही जंगली जानवरो के हमलो का खतरा भी होता है रात के समय गुलदार चहल कदमी करते हुए दिखाई देते हैं। वही लोगो ने कहा की मांगे जल्द पूरी नहीं हुई तो उग्र आंदोलन होगा।

ग्रामीणों ने लगाए रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे
सड़क पानी की मांग को इस दौरान ग्रामीणों ने रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि विधायक सरिता आर्या गृह क्षेत्र होने पर भी ग्रामीण अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे है।
लोगों ने कहा कि सड़क नहीं होने से उनको दिक्कतों का सामना करना पढ़ रहा है,खासकर बीमार और बुजुर्ग लोग सड़क नहीं होने से परेशान है। ग्रामीणों ने कहा अगर उनकी मांगे जल्द पूरी नहीं होती है तो वो उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।
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शुद्धिकरण केस में कांग्रेस के दावों पर सवाल! हाईकोर्ट ने याचिका की निस्तारित

Nainital News : शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद कांग्रेस के राजनीतिक नैरेटिव पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस मुद्दे को कांग्रेस ने उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक जोर-शोर से उठाया और राहुल गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे तक ने इसे दलित सम्मान से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा, अब उसी मामले में कांग्रेस अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश नहीं कर पा रही है।
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शुद्धिकरण केस में कांग्रेस के दावों पर सवाल !
दरअसल, 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा की थी। इसके तीन दिन बाद, 11 अगस्त को इसी मैदान में धार्मिक अनुष्ठान और गंगाजल छिड़कने का मामला सामने आया। कांग्रेस ने इसे ‘शुद्धिकरण’ बताते हुए दलित समाज के अपमान से जोड़ दिया और आरोप लगाया कि यह आयोजन खड़गे की जातिगत पहचान के कारण किया गया। दूसरी ओर भाजपा शुरू से इसे तथ्यहीन आरोप बताते हुए कांग्रेस पर संवेदनशील विषय को राजनीतिक और जातिगत रंग देने का आरोप लगाती रही है।
हाईकोर्ट ने याचिका की निस्तारित
मामला हल्द्वानी तक सीमित नहीं रहा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे राज्यसभा में उठाया और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला। इस तरह हल्द्वानी से उठा विवाद देहरादून होते हुए दिल्ली की राजनीति तक पहुंच गया।
इसके बाद देहरादून निवासी बैजनाथ की ओर से नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिका में मामले से जुड़े वीडियो, CCTV फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के साथ प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई। 7 सितंबर को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत के सामने जांच और दर्ज FIR की स्थिति रखी तथा मामले से जुड़े वीडियो साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भरोसा दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए पुलिस जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर संतोष जताया।

कांग्रेस के दावे को लेकर खड़ा हो रहा सवाल
हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद अब सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के उस दावे को लेकर खड़ा हो रहा है, जिसमें पूरे प्रकरण को सीधे दलित अपमान और जातिगत भेदभाव से जोड़ दिया गया था। कांग्रेस बताए कि उसके पास ऐसा कौन-सा वीडियो, बयान, दस्तावेज या प्रत्यक्ष प्रमाण है जिससे यह साबित होता हो कि धार्मिक अनुष्ठान मल्लिकार्जुन खड़गे की जातिगत पहचान के कारण किया गया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी लगातार स्पष्ट कर चुके हैं कि इस प्रकरण से राज्य सरकार या भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है और जिस संगठन ने धार्मिक आयोजन किया, उससे सरकार का कोई संबंध नहीं है। वहीं आयोजन में दलित समाज से जुड़े लोगों की मौजूदगी की बात भी सामने आई है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा पूरे मामले को दलित अस्मिता से जोड़कर पेश करने के आधार को लेकर राजनीतिक सवाल और तेज हो गए हैं।
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नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पानी से 2 की मौत, 200 से भी ज्यादा लोग हुए बीमार

Nainital News : पानी जिसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन नैनीताल के ज्योलीकोट में यही पानी जिंदगी बचाने के बजाय जिंदगी छीन रहा है। जिस पानी को लोग भरोसे के साथ पी रहे थे, वही पानी बीमारी का ऐसा जहर बन गया कि दो जिंदगियां चली गईं और सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंच गए।
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नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पानी से 2 की मौत
नैनीताल के ज्योलीकोट में दूषित पेयजल का मामला अब गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। पांच गांवों के करीब 200 लोग पीलिया, बुखार और उल्टी-दस्त की चपेट में हैं। 60 से ज्यादा मरीज नैनीताल, हल्द्वानी, बरेली और दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती हैं। दो लोगों की मौत भी हो चुकी है।
200 से भी ज्यादा लोग हुए बीमार
ग्रामीणों का आरोप है कि 20 जून से ही पानी में झाग, बदबू और लोगों के बीमार पड़ने की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन करीब दो महीने तक कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के अनशन के बाद 27 अगस्त को दूषित पेयजल लाइन काटी गई। सबसे गंभीर बात यह है कि जल संस्थान की जांच में पेयजल स्रोत में सीवेज मिलने की पुष्टि हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक दुर्गापुर पेयजल संयंत्र के ऊपर ही सीवर ट्रीटमेंट प्लांट है और लंबे समय से सीवर का पानी पेयजल लाइन में रिस रहा था।

दो लोगों की मौत के बाद जागा प्रशासन
दूषित पानी से बीमार 26 वर्षीय नीमा की बरेली में और 16 वर्षीय उमेश्वर जीना की दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में मौत हो गई। वहीं 50 से 60 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं और बीडी पांडे अस्पताल में 25 से ज्यादा पीलिया पीड़ित भर्ती बताए जा रहे हैं।
अब जल संस्थान ने दूषित स्रोत बंद कर दिया है। सीवर और पेयजल लाइनों को अलग करने का काम चल रहा है और दूसरे स्रोतों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। डीएम ने सात दिन के लिए स्कूल बंद करने, जल स्रोतों के क्लोरीनेशन और घर-घर स्वास्थ्य शिविर के निर्देश दिए हैं।
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