Uttarakhand
उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं और शिक्षक-कर्मचारियों को मास्क पहनकर आना हुआ अनिवार्य।
देहरादून – उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं और शिक्षक-कर्मचारियों को मास्क पहनकर आना अनिवार्य होगा। इस आशय का आदेश मुख्य शिक्षा अधिकारी डॉ. मुकुल कुमार सती ने देहरादून जिले के सभी सरकारी, निजी और अशासकीय स्कूलों के प्रधानाचार्यों को जारी किया है।

साथ ही महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा के साथ-साथ देहरादून के जिलाधिकारी, सीएमओ और सभी खंड शिक्षा अधिकारियों व मंडलीय अपर निदेशक को भी इस संबंध में कार्यवाही के लिए पत्र भेजा है।
स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भेजे गए पत्र में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कहा है कि कोरोना संक्रमण से बचाव और रोकथाम के लिए स्कूलों में थर्मल स्कैनिंग और सैनिटाइजर की व्यवस्था की जाए। साथ ही स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी एसओपी का पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाए। पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पत्र का हवाला दिया है जिसमें सर्दी बढ़ने के साथ देश में कोरोना संक्रमण बढ़ने की आशंका जताई गई है।
Dehradun
देहरादून में रॉन्ग साइड चलना पड़ेगा भारी, लगने जा रहे ‘टायर किलर’, फट सकता है टायर

Dehradun News : देहरादून में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ पुलिस अब और सख्त कदम उठाने जा रही है। राजधानी की वन-वे सड़कों पर रॉन्ग साइड से वाहन चलाने वालों को रोकने के लिए जल्द ही स्पाइक बैरियर (टायर किलर) लगाए जाएंगे। इन बैरियरों पर अगर कोई वाहन गलत दिशा से प्रवेश करेगा तो उसके टायर पंचर हो सकते हैं, जिससे नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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देहरादून में रॉन्ग साइड चलना पड़ेगा भारी
देहरादून में जल्द ही रॉन्ग साइड से वाहन चलाने वालों को रोकने के लिए जल्द ही स्पाइक बैरियर लगाए जाएंगे। पुलिस विभाग ने इसके लिए विशेष स्पाइक बैरियर मंगवा लिए हैं। इन्हें शहर के उन वन-वे मार्गों पर लगाया जाएगा, जहां सबसे अधिक यातायात नियमों का उल्लंघन होता है। अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से रॉन्ग साइड ड्राइविंग की घटनाओं में कमी आएगी और सड़क दुर्घटनाओं पर भी नियंत्रण लगेगा।
लगने जा रहे ‘टायर किलर, फट सकता है टायर
फिलहाल शहर में कई प्रमुख स्थानों पर वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू है। इनमें परेड ग्राउंड के चारों ओर का मार्ग, आराघर टी-जंक्शन और होटल रिकी रिक से आईजी चौक तक का रास्ता प्रमुख हैं। इन इलाकों में अक्सर वाहन चालक गलत दिशा से प्रवेश कर लेते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और हादसों का खतरा बढ़ जाता है।

रोजाना तैनात करनी पड़ती है पुलिस
पुलिस अधिकारियों के अनुसार वन-वे व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगानी पड़ती है। इसके बावजूद कई चालक नियमों की अनदेखी करते हुए रॉन्ग साइड से वाहन चलाते हैं। ऐसे में केवल चालान या समझाइश पर्याप्त साबित नहीं हो रही थी, इसलिए अब तकनीकी समाधान के रूप में स्पाइक बैरियर लगाने का निर्णय लिया गया है।
ट्रैफिक व्यवस्था होगी बेहतर
पुलिस का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। अगर वाहन चालक वन-वे नियमों का पालन करेंगे तो जाम की समस्या कम होगी और दुर्घटनाओं का जोखिम भी घटेगा।
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देहरादून में नाले से एक युवक का शव मिलने से सनसनी, सड़क किनारे बने नाले में गिरने से हुई मौत

Dehradun News : राजधानी के माजरा क्षेत्र में सड़क किनारे बने नाले में गिरने से 21 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई। शनिवार तड़के पुलिस और फायर सर्विस की टीम ने नाले से शव बाहर निकाला।
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देहरादून में नाले से एक युवक का शव मिलने से सनसनी
देहरादून में एक नाले से युवक का शव मिलने से सनसनी मच गई। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान अमित सेमवाल (21), पुत्र रामेश्वर प्रसाद, निवासी माजरा (पटेलनगर) के रूप में हुई है। शव को नाले से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सेंट जूड स्कूल की कैंटीन में काम करता था मृतक
मिली जानकारी के मुताबिक मृतक अमित शहर के सेंट जूड स्कूल की कैंटीन में कार्यरत था। शुक्रवार शाम करीब सात बजे ड्यूटी समाप्त होने के बाद वो पैदल अपने घर के लिए निकला था। लेकिन देर रात तक घर नहीं पहुंचा।

नाले में पड़ा मिला शव
रात करीब 12:45 बजे पुलिस को सूचना मिली कि माजरा क्षेत्र में सड़क किनारे बने नाले में एक युवक फंसा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची और काफी प्रयास के बाद युवक को बाहर निकाला। जांच में पता चला कि उसकी मौत हो चुकी थी।
पुलिस मामले की जांच में जुटी
प्रारंभिक जांच के अनुसार आशंका है कि अमित अंधेरे या फिसलन के कारण नाले में गिर गया और पानी के तेज बहाव या डूबने से उसकी जान चली गई। हालांकि, मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
Haldwani
सर्पदंश से बच सकती है जान! वन विभाग ने जारी किया 1926 हेल्पलाइन, जानिए क्या करें

Haldwani News : उत्तराखंड में मानसून के साथ सर्पदंश के मामलों में भी बढ़ोतरी होने लगी है। लगातार हो रही बारिश के कारण सांप आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल है। ऐसे में वन विभाग ने लोगों की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1926 जारी किया है।
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सर्पदंश से बचाव के लिए हेल्पलाइन नंबर हुआ जारी
बरसात का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के कई इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। खेतों, जंगलों और रिहायशी क्षेत्रों में सांप निकलने से लोगों की चिंता भी बढ़ जाती है। कई बार घबराहट और अंधविश्वास के कारण मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे में वन विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों लोगों से सतर्क रहने और सही समय पर सही कदम उठाने की अपील कर रहे हैं। हल्द्वानी वन प्रभाग ने जहां सांपों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए विशेष टीमें तैयार की हैं, वहीं सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के इलाज की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
वन विभाग ने जारी किया 1926 हेल्पलाइन
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार ने बताया कि वन प्रभाग की पांचों रेंजों में सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए प्रशिक्षित टीमें तैनात की गई हैं। पिछले एक वर्ष में आबादी वाले क्षेत्रों से करीब 700 सांपों का सफल रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है।

हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने लोगों से की अपील
हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने लोगों से अपील की कि घर या आसपास सांप दिखाई देने पर घबराएं नहीं और न ही उसे मारने की कोशिश करें। तत्काल वन विभाग के टोल फ्री नंबर 1926 पर सूचना दें, जिसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ देती है।
अब तक विभिन्न क्षेत्रों से 71 सर्पदंश के मरीज पहुंचे अस्पताल
सुशीला तिवारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. परमजीत सिंह के अनुसार इस वर्ष अब तक विभिन्न क्षेत्रों से 71 सर्पदंश के मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं। जून में 22 औऱ जुलाई माह में 38 सबसे अधिक सर्पदंश के मरीज अस्पताल में एडमिट हुए हैं, उन्होंने बताया कि यदि मरीज को समय पर अस्पताल लाया जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में सर्पदंश के इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं और एंटी स्नेक वेनम (ASV) मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। अब तक कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। हालांकि, दो मरीजों की मौत इसलिए हुई क्योंकि उन्हें अस्पताल पहुंचाने में काफी देर हो गई थी।
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