Uttarakhand
गोवा में उत्तराखंड की सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा हर संभव सहायता दी जाएगी: अभिनव कुमार
गोवा – विशेष प्रमुख सचिव अभिनव कुमार से गुरुवार को गोवा में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल में प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने भेंट की। उन्होंने कहा कि सभी प्रवासियों का उत्तराखंड के विकास में अहम भूमिका है।

कुमार ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का उत्तराखंड को 2025 तक देश का आदर्श राज्य बनाने का लक्ष्य है। इसके मुख्यमंत्री द्वारा उत्तराखंड@25 के तहत हर वर्ग से भागीदारी का आहवान किया है। इसी उद्देश्य को प्रवासी संघटन भी आये। राज्य सरकार द्वारा प्रवासियों को हर सम्भव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गोवा में उत्तराखंड की सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा हर संभव सहायता दी जाएगी।

इस अवसर पर गढ़वाली कल्चरल एसोसिएशन के अध्यक्ष के.एल. कोटनाला ने गोवा आने पर विशेष प्रमुख सचिव अभिनव कुमार का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहली बार हुआ है जब किसी उत्तराखंड सरकार के किसी प्रतिनिधि द्वारा गोवा में निवास कर रहे प्रवासियों से संवाद किया है। कोटनाला ने कहा कि हम लोग यहां पर उत्तराखंड महोत्सव कार्यक्रम करना चाहते है, जिसमे राज्य सरकार से पूरा सहयोग चाहिए। इस अवसर पर भेंट करने वालो में पूर्व अध्यक्ष आर.डी. पालीवाल, सचिव यशपाल सिंह नेगी, द्वारिका प्रसाद आदि शामिल थे।
Uttarkashi
उत्तरकाशी में पापड़गाड़ में फिर धंसा गंगोत्री हाईवे, डरा रहीं बड़ी-बड़ी और चौड़ी होतीं दरारें

Uttarkashi News : उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र में पापड़गाड़ के पास गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बार फिर भू-धंसाव की स्थिति सामने आई है। सोमवार सुबह सड़क पर करीब 50 मीटर लंबी दरार दिखाई देने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई। कुछ ही घंटों में दरार चौड़ी होने लगी, जिसके चलते हाईवे पर लगभग चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा।
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उत्तरकाशी में पापड़गाड़ में फिर धंसा गंगोत्री हाईवे
उत्तरकाशी के भटवाड़ी क्षेत्र में पापड़गाड़ के पास गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन बढ़ गया है। एक बार फिर से बड़ी-बड़ी दरारें नजर आने लगी हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीम ने एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए केवल दोपहिया वाहनों को ही आवाजाही की अनुमति दी। बाद में सड़क पर बनी दरारों में मिट्टी और अन्य सामग्री भरकर यातायात को दोबारा शुरू कराया गया। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह फिलहाल अस्थायी व्यवस्था है और समस्या का स्थायी समाधान अभी भी जरूरी है।
पिछले साल भी धंस चुका है हाईवे
पापड़गाड़ क्षेत्र में भू-धंसाव कोई नई समस्या नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले साल अगस्त में आई आपदा के दौरान इसी हिस्से में करीब 100 मीटर तक सड़क का हिस्सा धंस गया था। इसके कारण गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब तीन दिनों तक आवाजाही पूरी तरह बंद रही थी।

उस दौरान धराली और हर्षिल क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान चलाने वाली टीमों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हाईवे बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने वाली राहत व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी।
वैकल्पिक मार्ग नहीं होने से बढ़ी चिंता
पापड़गाड़ के इस हिस्से को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि गंगोत्री हाईवे के बंद होने की स्थिति में लोगों के पास कोई प्रभावी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सड़क पर लगातार बढ़ रही दरारें स्थानीय ग्रामीणों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनी हुई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल की घटना के बाद भी अब तक इस संवेदनशील हिस्से के लिए स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं। प्रताप प्रकाश, संजीव नौटियाल और केशव नौटियाल समेत अन्य स्थानीय लोगों ने प्रशासन से भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र का तकनीकी निरीक्षण कराने और स्थायी सुरक्षा कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है।
Champawat
तीन साल से फाइलों में दबी घिंघारुकोट सड़क, मरीज आज भी कंधों पर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

Champawat News : सरकार गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने और पलायन रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन पाटी विकासखंड के सुदूरवर्ती घिंघारुकोट तोक की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। घिंघारुकोट तोक में मरीज को डोली से अस्पताल पहुंचने का मामला सामने आया है।
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तीन साल से फाइलों में दबी घिंघारुकोट सड़क
चंपावत जिले के घिंघारुकोट तोक में साल 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांव को चार किलोमीटर मोटर मार्ग से जोड़ने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा, लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। नतीजा ये है कि आज भी घिंघारुकोट के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं और दुर्गम पैदल रास्तों पर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
मरीज को डोली से पहुंचाया गया अस्पताल
गांव तक कोई मोटर मार्ग नहीं होने से बीमार मरीजों को आज भी डोली या परिजनों के कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को रोजाना उबड़-खाबड़ और जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब फिसलन और भूस्खलन के खतरे के बीच ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करते हैं।

कई बार मांग के बाद भी मिला केवल आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। जिससे योजना फाइलों तक ही सीमित होकर रह गई है।
गांव के बुजुर्गों का दर्द सबसे अधिक झकझोरने वाला है। उनका कहना है कि पूरी जिंदगी सड़क का इंतजार करते-करते बीत गई। अब उनकी अंतिम इच्छा सिर्फ इतनी है कि गांव तक सड़क पहुंच जाए, ताकि कम से कम अंतिम यात्रा सम्मान के साथ सड़क मार्ग से हो सके।
Uttarakhand
सल्ट में नवविवाहिता को जंगली जानवर ने बनाया निवाला, घर से कुछ ही दूरी पर मिला शव

Almora News :उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड से मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। डभरा सौराल ग्रामसभा के घोड़ीधार तोक में एक 21 वर्षीय नवविवाहिता पर किसी जंगली जानवर ने हमला कर दिया। कुछ देर बाद उसका शव जंगल से बरामद हुआ। घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुटी हैं।
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अल्मोड़ा के सल्ट में नवविवाहिता को जंगली जानवर ने बनाया निवाला
a में नवविवाहिता को जंगली जानवर ने निवाला बना लिया। इस खबर के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। मिली जानकारी के अनुसार, घोड़ीधार तोक निवासी शालिनी नेगी (21) सोमवार सुबह घर के पास गोबर फेंकने के लिए निकली थीं। इसी दौरान उन पर किसी वन्यजीव ने हमला कर दिया। आशंका है कि हमलावर जानवर उन्हें जंगल की ओर घसीट ले गया।
गोबर फेंकने के लिए निकली थीं मृतका
बताया जा रहा है कि काफी समय तक घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान जंगल में उनका शव मिला। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शव के गले पर गहरे घाव के निशान पाए गए हैं।
घटना के बाद से परिवार में मचा कोहराम
शव मिलने की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस, वन विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी।

किस वन्यजीव ने किया हमला? जांच जारी
फिलहाल ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमला बाघ, गुलदार या किसी अन्य वन्यजीव ने किया है। वन विभाग का कहना है कि घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही हमलावर वन्यजीव की आधिकारिक पहचान की जाएगी।
घटना के बाद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, हमलावर वन्यजीव की पहचान कर उसे पकड़ने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। अधिकारियों ने लोगों से जंगल और सुनसान इलाकों में अकेले जाने से बचने तथा सतर्क रहने की अपील की है।
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