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देहरादून में देश का पहला ऑल एज-ऑल वेदर रनिंग ट्रैक तैयार कर रही सेना, प्लास्टिक वेस्ट मैटेरियल से बनाया जा रहा ट्रैक।
देहरादून – भारतीय सेना देहरादून के महिंद्रा ग्राउंड में देश का पहला ऑल एज-ऑल वेदर रनिंग ट्रैक बनवा रही है। खास बात यह है कि 850 मीटर लंबे इस ट्रैक के निर्माण में इस्तेमाल की जा रही टाइल्स और शेड को प्लास्टिक वेस्ट मैटेरियल से बनाया गया है। ट्रैक का 60 फीसदी काम पूरा हो गया है। बाकी काम भी चार से पांच माह में पूरा कर लिया जाएगा।

पिछले कुछ माह से इसका काम तेजी से चल रहा है। सेना के एक कर्नल रैंक के अधिकारी ने बताया कि बनने के बाद इसका इस्तेमाल सभी वर्ग और आयु के लोग दौड़ने व टहलने के लिए कर सकते हैं। उनका दावा है कि यह देश का अपनी तरह का पहला ऑल एज ऑल वेदर रनिंग ट्रैक होगा जिसमें प्लास्टिक वेस्ट मैटेरियल का इस्तेमाल हो रहा है।
रनिंग ट्रैक को आधुनिक तरीके से बनाया जा रहा है ताकि सभी आयु के लोग आसानी से गर्मी, सर्दी और बरसात में इसका इस्तेमाल कर सकें। इसका सबसे ज्यादा फायदा युवाओं को होगा। बरसात में अक्सर बारिश के चलते वे अभ्यास नहीं कर पाते। इस ट्रैक पर रोजाना अभ्यास कर सकेंगे।

ग्राउंड में ट्रैक किनारे जगह-जगह बेंच लगाने की भी योजना है। ये बेंच भी प्लास्टिक वेस्ट मैटेरियल से तैयार की गई हैं। बुजुर्गों को ध्यान में रखते हुए बेंच लग रही है ताकि थकने के बाद वे बैठकर आराम कर सके। ग्राउंड में प्लास्टिक वेस्ट से तैयार एक मोबाइल टॉयलेट की भी व्यवस्था की गई है।

सेना के कर्नल रैंक के अधिकारी ने बताया कि इस ग्राउंड में मैराथन के साथ ही अन्य आयोजन भी होंगे। ट्रैक के किनारे डिस्प्ले लगाने की योजना है ताकि दौड़ते समय पता चल सके कि कितनी दौड़ लगा ली है। डिस्पले के माध्यम से युवाओं को जागरूक करने का भी प्रयास किया जाएगा ताकि वे अच्छी दौड़ कर सकें। ग्राउंड में चारों तरफ से सोलर लाइट लगाने की भी योजना है।
सैन्य अधिकारी ने बताया कि इस ट्रैक को बनाने में थोड़ा समय लग रहा है। क्योंकि, कैंट क्षेत्र का प्लास्टिक कचरा एकत्र कर रिसाइकिल के लिए एक कंपनी को भेजा जाता है। कंपनी शेड, टाइल्स, बोर्ड आदि बनाकर भेजती है।
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बड़ी खबर : देहरादून में कल भी बंद रहेंगे स्कूल, भारी बारिश के चलते लिया गया फैसला

Dehradun News : लगातार हो रही बारिश और मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा फैसला लिया है। कल देहरादून जिले के कक्षा एक से लेकर 12वीं तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे।
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देहरादून में कल भी बंद रहेंगे स्कूल
देहरादून में कल भी सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। जिलाधिकारी के निर्देश पर 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को देहरादून जिले के कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, अशासकीय और निजी विद्यालयों के साथ-साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है।
भारी बारिश के चलते लिया गया फैसला
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान देहरादून में कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी वर्षा, तेज गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई है। संभावित खतरे को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर ये फैसला लिया गया है।
आदेश का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश
प्रशासन ने मुख्य शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी शिक्षण संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
जिला प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के आसपास न जाएं और मौसम विभाग व प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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Agnipath Yojna 2026: अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! देखें लेटेस्ट अपडेट…

Agnipath Yojna 2026 Latest Updates
भारतीय सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) में युवाओं की भर्ती के लिए शुरू की गई अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) एक बार फिर देश भर में चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई है। साल 2022 में शुरू हुई इस क्रांतिकारी योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर साल 2026 के अंत तक अपना 4 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। इसी बीच, रक्षा गलियारों से अग्निवीरों के भविष्य को लेकर कई बड़ी और सकारात्मक खबरें सामने आ रही हैं, जो इस योजना का स्वरूप बदल सकती हैं।
यदि आप भी भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा का जज्बा रखते हैं या अग्निवीर भर्ती 2026 की तैयारी कर रहे हैं, तो यह विस्तृत और व्यापक लेख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं अग्निपथ योजना क्या है, इसकी चयन प्रक्रिया, सैलरी स्ट्रक्चर, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ और 2026 में इसमें होने वाले बड़े बदलावों के बारे में।
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1. अग्निपथ योजना क्या है? (What is Agnipath Yojna?)
अग्निपथ योजना भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा 14 जून 2022 को शुरू की गई एक अल्पकालिक सैन्य भर्ती प्रणाली है। इसके तहत देश के युवाओं को 4 साल की अवधि के लिए भारतीय थल सेना (Indian Army), नौसेना (Indian Navy) और वायु सेना (Indian Air Force) में सेवा करने का अवसर मिलता है। इस योजना के माध्यम से सेना में भर्ती होने वाले जवानों को ‘अग्निवीर’ (Agniveers) के नाम से जाना जाता है।
सरकार का इस योजना को लाने के पीछे मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के प्रोफाइल को और अधिक युवा (Youthful Profile) बनाना, औसत आयु को 32 वर्ष से घटाकर 26 वर्ष करना और सेना को आधुनिक तकनीकों (जैसे ड्रोन, एआई, और डिजिटल युद्ध प्रणालियों) से लैस करना है।
2. साल 2026 में सबसे बड़ा बदलाव: क्या 25% से ज्यादा जवान होंगे परमानेंट?
अग्निपथ योजना के मूल नियमों के अनुसार, 4 साल की सेवा पूरी होने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी कैडर (15 साल की नियमित सेवा के लिए) में बरकरार रखा जाना था, जबकि शेष 75 प्रतिशत को सेवामुक्त कर दिया जाना तय था।
लेकिन वर्ष 2026 में सबसे बड़ी ‘गुड न्यूज’ यह आ रही है कि तीनों सेनाओं ने परिचालन आवश्यकताओं और जमीनी अनुभवों के आधार पर इस रिटेंशन दर (Retention Rate) को बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है:
- भारतीय नौसेना (Indian Navy): तकनीकी और विशिष्ट कार्यप्रणाली को देखते हुए नौसेना लगभग 75 प्रतिशत तक अग्निवीरों को स्थायी रूप से बनाए रखने की मांग कर रही है।
- थल सेना और वायु सेना (Army & IAF): दोनों सेनाएं वर्तमान 25% की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने के पक्ष में हैं।
ऐसा क्यों किया जा रहा है?
सेना के अधिकारियों का मानना है कि पिछले 4 वर्षों में अग्निवीरों ने कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया है, कई बड़े अभियानों में हिस्सा लिया है और आधुनिक हथियारों का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया है। ऐसे में पूरी तरह से प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम इन जवानों को केवल 4 साल बाद बाहर करना व्यावहारिक नहीं होगा। अधिक रिटेंशन से सेना के पास अनुभवी सैनिकों का एक मजबूत पूल हमेशा उपलब्ध रहेगा।
3. अग्निवीर पात्रता और चयन प्रक्रिया 2026 (Eligibility & Selection Process)
यदि आप अग्निपथ योजना के तहत आवेदन करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित योग्यताओं को पूरा करना आवश्यक है:
पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria):
- आयु सीमा: उम्मीदवार की आयु 17.5 वर्ष से 21 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- शैक्षणिक योग्यता: पदों के अनुसार (जैसे जनरल ड्यूटी, टेक्निकल, क्लर्क आदि) उम्मीदवार का 10वीं या 12वीं पास होना अनिवार्य है।
- लिंग: इस योजना के तहत पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र हैं।
चयन प्रक्रिया के चरण:
- केंद्रीयकृत ऑनलाइन परीक्षा (CEE): सबसे पहले उम्मीदवारों को कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा पास करनी होती है।
- शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और मापन (PMT): लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को दौड़, बीम, और अन्य शारीरिक परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।
- चिकित्सीय परीक्षण (Medical Test): अंतिम चरण में पूर्ण चिकित्सा जांच की जाती है, जिसके बाद मेरिट लिस्ट जारी होती है।
4. अग्निवीर सैलरी और ‘सेवा निधि’ पैकेज (Salary Structure & Seva Nidhi)
अग्निवीरों को 4 साल की सेवा के दौरान एक आकर्षक और कस्टमाइज्ड मासिक पैकेज दिया जाता है, जो हर साल बढ़ता है। इसके साथ ही उन्हें रिस्क और हार्डशिप अलाउंस भी मिलता है।
| वर्ष | मासिक वेतन (Gross Salary) | इन-हैंड सैलरी (70%) | अग्निवीर कॉर्पस फंड (30%) |
| प्रथम वर्ष | ₹30,000 | ₹21,000 | ₹9,000 |
| द्वितीय वर्ष | ₹33,000 | ₹23,100 | ₹9,900 |
| तृतीय वर्ष | ₹36,500 | ₹25,550 | ₹10,950 |
| चतुर्थ वर्ष | ₹40,000 | ₹28,000 | ₹12,000 |
सेवा निधि पैकेज (Seva Nidhi Package):
अग्निवीर के वेतन से जो 30% हिस्सा काटा जाता है, उतना ही योगदान (Matching Contribution) भारत सरकार भी देती है। 4 साल की अवधि समाप्त होने पर, संचित ब्याज सहित प्रत्येक अग्निवीर को लगभग ₹11.71 लाख का एकमुश्त ‘सेवा निधि’ पैकेज दिया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी राशि पूरी तरह से आयकर (Income Tax) से मुक्त होती है।
5. जीवन सुरक्षा और अन्य वित्तीय लाभ
अग्निपथ योजना के तहत जवानों की सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है:
- गैर-अंशदायी जीवन बीमा: सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों को ₹48 लाख का मुफ्त जीवन बीमा कवर मिलता है।
- ड्यूटी के दौरान शहादत पर: यदि कोई अग्निवीर सेवा के दौरान शहीद होता है, तो उसके परिवार को ₹1 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता (सेवा निधि और गैर-सेवा अवधि का वेतन मिलाकर) दी जाती है।
- दिव्यांगता की स्थिति में: ड्यूटी के दौरान अक्षमता की गंभीरता के आधार पर ₹44 लाख तक की अनुग्रह राशि का प्रावधान है।
6. 4 साल बाद क्या हैं करियर के विकल्प? (Future Opportunities)
जो 75% या 50% अग्निवीर (नए नियमों के आधार पर) 4 साल बाद सेवामुक्त होंगे, उन्हें समाज में पुनर्वास के लिए कई तरह के विशेष अवसर दिए जा रहे हैं:
- सुरक्षा बलों में आरक्षण: गृह मंत्रालय (MHA) ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) जैसे BSF, CISF, CRPF और असम राइफल्स में पूर्व-अग्निवीरों के लिए 10% रिक्तियां आरक्षित की हैं।
- राज्य पुलिस में प्राथमिकता: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे कई राज्यों ने अपनी पुलिस और संबद्ध सेवाओं की भर्तियों में पूर्व-अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है।
- कॉर्पोरेट और बैंक लोन: कई बड़ी निजी कंपनियों (जैसे टाटा, महिंद्रा) ने पूर्व-अग्निवीरों को नौकरी देने की इच्छा जताई है। इसके अलावा, जो युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें बैंक ‘सेवा निधि’ के आधार पर प्राथमिकता से लोन प्रदान करते हैं।
- शैक्षणिक डिग्री: रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के समन्वय से पूर्व-अग्निवीरों के लिए विशेष डिप्लोमा और ग्रेजुएशन क्रेडिट सिस्टम तैयार किया गया है, ताकि वे अपनी आगे की पढ़ाई आसानी से पूरी कर सकें।
निष्कर्ष (Conclusion)
अग्निपथ योजना 2026 न केवल भारतीय सेना को अत्याधुनिक और युवा बना रही है, बल्कि देश के युवाओं के लिए करियर के नए द्वार भी खोल रही है। वर्ष 2026 में सेना द्वारा रिटेंशन रेट (स्थायी होने की सीमा) को 25% से बढ़ाकर 50% या 75% करने की मांग ने युवाओं के बीच इस योजना के प्रति आकर्षण और भरोसे को और मजबूत कर दिया है। यदि आप अनुशासित जीवन, देश सेवा और एक सुरक्षित वित्तीय भविष्य की चाह रखते हैं, तो अग्निपथ योजना आपके सपनों को उड़ान देने का एक बेहतरीन माध्यम है।
अस्वीकरण: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक सूचनाओं के विश्लेषण पर आधारित है। भर्ती की सटीक तारीखों और नियमों में बदलाव की अंतिम पुष्टि के लिए हमेशा भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट (joinindianarmy.nic.in) पर जाएँ।
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एक रील और 1 साल पुरानी चोरी का राज बेनकाब!, सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह से ने पहुंचाया जेल

Dehradun News : देहरादून के जाखन इलाके से चोरी का ऐसा मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह ने एक साल पुरानी चोरी का राज खोल दिया।
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एक रील और 1 साल पुरानी चोरी का राज बेनकाब !
देहरादून के जाखन की रहने वाली नितीशा वत्स के फ्लैट से करीब एक साल पहले दो डायमंड की अंगूठियां, एक सोने की चेन और डायमंड हार्ट पेंडेंट रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे।
उन्हें शुरू से अपनी घरेलू सहायिका विमला देवी पर शक था, लेकिन सबूत न होने के कारण वे कुछ नहीं कर पा रही थीं। लेकिन कहते हैं, अपराधी कोई न कोई गलती जरूर करता है। इस मामले में भी यही हुआ।
सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह से ने पहुंचाया जेल
हाल ही में नितीशा सोशल मीडिया देख रही थीं, तभी उनकी नजर विमला देवी के व्हाट्सएप स्टेटस और इंस्टाग्राम रील पर पड़ी। वीडियो में विमला के गले में वही चोरी हुई सोने की चेन और डायमंड हार्ट पेंडेंट साफ दिखाई दे रहे थे। रील बनाकर दिखावा करने की कोशिश में वो खुद ही अपने खिलाफ सबसे बड़ा सबूत छोड़ बैठी।

डिजिटल सबूतों की जांच में जुटी पुलिस
इसके बाद नितीशा ने बिना देर किए रील के स्क्रीनशॉट सुरक्षित किए। गहनों के बिल जुटाए और राजपुर थाने में शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी नौकरानी को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस आरोपी तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया से मिले इन डिजिटल सबूतों की भी जांच कर रही है।
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