Politics
राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को लगा बड़ा झटका, मनोज पांडे के साथ तीन और विधायक हुए बागी।

लखनऊ – राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। मनोज पांडेय के साथ ही उसके तीन अन्य विधायक बागी हो गए हैं। सपा के विधायक मनोज पांडे ने मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेज दिया है।

सपा के विधायक मनोज पांडे ने पत्र में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लिखा कि मैं मुख्य सचेतक के पद से इस्तीफा दे रहा हूं। इस्तीफा स्वीकार किया जाए। विधायक मनोज कुमार पांडे ने कहा कि “समाजवादी पार्टी विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक के पद से हमने इस्तीफा दे दिया है।
विधायक राकेश प्रताप सिंह अपनी पार्टी की दोनो मीटिंग में नही गए थे और उन्होंने बागी रुख अख्तियार कर रखा था। यह तीनों भाजपा के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। राकेश पांडे के सांसद बेटे रितेश पांडे दो दिन पहले भाजपा में शामिल हुए हैं।
राज्यसभा चुनाव पर भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि भाजपा के आठ उम्मीदवार हैं, सभी जीतकर दिल्ली जाने वाले हैं। जिनको डर था वे सुबह से ही गा रहे हैं कि भाजपा ने उनके विधायकों को छीन लिया है। उन लोगों को अपने घर को संभालना नहीं आया। किसी पर आरोप लगाने से पहले ये भी देख ले कि आपके घर के सदस्य क्यों आपसे भागना चाहते हैं? अखिलेश यादव को बहाना देने की आदत पड़ चुकी है। 2017 में बहाना दिया, 2019 में दिया और अब 2024 में भी एक और बहाना देंगे।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में उत्तराखंड से 4 चेहरे शामिल, पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत को मिली बड़ी जिम्मेदारी

Uttarakhand Politics : बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन की नई टीम का ऐलान हो गया है। नई टीम में नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम भी शामिल है। जबकि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में तीरथ सिंह रावत को मिली बड़ी जिम्मेदारी
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन की नई टीम में उत्तराखंड के पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। बता दें कि नितिन नवीन की नई टीम में 13 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री बनाये गये हैं। जिसमें से एक पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत भी हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में उत्तराखंड से 4 चेहरे शामिल
राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में उत्तराखंड से 4 चेहरे शामिल हैं। लिस्ट में से एक पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत का नाम शामिल है। इसके साथ ही गढ़वाल सासंद अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक बनाया गया है। बलूनी को लगातार तीसरी बार ये जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसके साथ ही उत्तराखंड के आलोक भट्ट को सोशल मीडिया सहसंयोजक बनाया गया है। जबकि महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए आंदोलनकारी करेंगे सामूहिक मुंडन, 15 से शुरू होगी पदयात्रा

Uttarakhand Politics : दिल्ली, कर्णप्रयाग, चौखुटिया, रुद्रप्रयाग में गरजे और देहरादून धरना स्थल पर 100 दिनों से अधिक के क्रमिक अनशन के बाद अब आर-पार की जंग शुरू हो गई है। उत्तराखंड की आत्मा और स्वाभिमान की लड़ाई अब अपने सबसे उग्र और ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
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गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए करेंगे सामूहिक मुंडन
स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की जनता के साथ वर्षों से किया जा रहा छल अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समिति इससे पहले दिल्ली, देहरादून, कर्णप्रयाग, चौखुटिया और रुद्रप्रयाग में उग्र प्रदर्शन कर अपनी मंशा साफ कर चुकी है और देहरादून धरना स्थल पर लगातार 100 से अधिक दिनों का ऐतिहासिक क्रमिक अनशन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि ये आंदोलन अब किसी के रोके रुकने वाला नहीं है।
समिति 15 से शुरू करेगी पदयात्रा
समिति के मुख्य संयोजक पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी, पार्थ रतूड़ी(पत्रकारिता छात्रा), गोपाल दत्त कुमेड़ी, सुधीर गैरोला और शैलेंद्र शेखर करगेती ने एक स्वर में हुंकार भरते हुए कहा कि सत्ता के नशे में सोई सरकारें कान खोलकर सुन लें कि जब तक गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया जाता, तब तक न हम बैठेंगे और न ही सरकार को चैन से बैठने देंगे।

अब जंग सीधी और आर-पार की होगी – समिति
समिति का कहना है कि हमारी रगों में उत्तराखंड का खून दौड़ रहा है और ये लड़ाई हमारी अस्मिता व भावी पीढ़ियों के हक की है। हमने ‘प्रण से प्राण तक’ का अटूट संकल्प लिया है और अगर सरकार सोचती है कि वह समय टालकर हमें थका देगी, तो ये उसकी सबसे बड़ी ऐतिहासिक भूल होगी क्योंकि अब जंग सीधी और आर-पार की होगी।
गैरसैंण तक निकाली जाएगी पदयात्रा
सरकार की हठधर्मिता और वादाखिलाफी के जवाब में समिति ने ऐतिहासिक आंदोलनों का शंखनाद कर दिया है। इसी क्रम में 13 अगस्त 2026 को प्रातः 9:00 बजे से देहरादून विधानसभा के बाहर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के संकल्प और सरकार के खिलाफ रोष के प्रतीक स्वरूप सामूहिक मुंडन किया जाएगा।
इसके तुरंत बाद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2026 को प्रातः 9:30 बजे से विधानसभा के बाहर से देहरादून से गैरसैंण तक ऐतिहासिक महा-पदयात्रा का आगाज होगा।
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विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, दिनेश कुंजवाल ने छोड़ा हाथ का साथ

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सभी दल अपने संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर पकड़ बढ़ाने में जुटे हुए हैं। इसी बीच अल्मोड़ा जिले की जागेश्वर विधानसभा सीट से कांग्रेस के लिए झटका देने वाली खबर सामने आई है।
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विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले कांग्रेस को लगा बड़ा झटका
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल ने कांग्रेस से दूरी बनाते हुए उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) का दामन थाम लिया है। दिनेश कुंजवाल के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भी यूकेडी में शामिल होने की बात सामने आई है। ऐसे में उनका ये राजनीतिक फैसला जागेश्वर क्षेत्र की सियासत में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
गोविंद सिंह कुंजवाल ने भतीजे ने छोड़ी पार्टी
जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र को लंबे समय से कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में गिना जाता है। यहां कुंजवाल परिवार की भी मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है। गोविंद सिंह कुंजवाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं और उन्होंने प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
कांग्रेस के लिए क्यों अहम है ये घटनाक्रम?
ऐसे राजनीतिक परिवार से जुड़े दिनेश कुंजवाल का कांग्रेस से अलग होकर यूकेडी में शामिल होना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। खासतौर पर ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव में अभी कुछ समय बाकी है और राजनीतिक दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

यूकेडी ने कांग्रेस के गढ़ में लगाई सेंध
उत्तराखंड क्रांति दल लंबे समय से राज्य की क्षेत्रीय राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। जागेश्वर में दिनेश कुंजवाल के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का यूकेडी में जाना पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर संगठन विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद जागेश्वर में कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक और संगठनात्मक पकड़ को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसका वास्तविक राजनीतिक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां लगातार तेज हो रही हैं। कांग्रेस, भाजपा और क्षेत्रीय दल अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
इसी कड़ी में जागेश्वर में यूकेडी की ओर से कांग्रेस के खेमे में सेंध लगाने की कोशिश को अहम माना जा रहा है। दिनेश कुंजवाल के साथ कार्यकर्ताओं का पार्टी बदलना कांग्रेस के लिए स्थानीय स्तर पर चुनौती खड़ी कर सकता है।
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