Dehradun
पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने यातायात व्यवस्था के सम्बन्ध में की गयी कार्यवाही के उपायों की समीक्षा, दिए ये निर्देश।

देहरादून – आज दिनांक 26 मार्च, 2024 को अभिनव कुमार, पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड द्वारा राज्य की यातायात व्यवस्था एवं सड़क सुरक्षा के सम्बन्ध में पुलिस मुख्यालय के सभागार में गोष्ठी आयोजित की गई।

उक्त गोष्ठी में जनपदों में यातायात व्यवस्था के अन्तर्गत प्रवर्तन की कार्यवाही, सड़क दुर्घटना के आकड़ों, पार्किंग, यातायात जनशक्ति एवं ट्रैफिक जाम के सम्बन्ध में की गई कार्यवाही के उपायों की समीक्षा की गई।
उक्त गोष्ठी में पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड द्वारा निम्न निर्देश दिये गये–
1. देहरादून की पार्किंग व्यवस्था के सुधार हेतु निर्देश दिये गये है कि नगर की पार्किंग का एक विस्तृत आंकड़ा तैयार किया जाए और आंकलन किया जाए कि जिन व्यवसायिक भवनों को MDDA द्वारा बेंसमेट/कॉम्पलेक्स पार्किंग की अनुमति प्रदान की गई है,उन पार्किंग को तत्काल खुलवाया जाए। उक्त सम्बन्ध पहले पुलिस अधीक्षक, यातायात देहरादून सभी व्यवसायिक भवनों के स्वामी एवं व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों के साथ पार्किंग के सम्बन्ध में बैठक करेंगे और बेंसमेट/कॉम्पलैक्स पार्किंग को खुलवायेंगे। यदि कोई उक्त गोष्ठी के बाद भी पार्किंग नही खुलवाता है तो उक्त के विरुद्व आवश्यक कार्यवाही करेंगे।
2. देहरादून के समस्त स्कूलों/कालेजों में यातायात दबाव को कम करने के लिए नगर के समस्त सरकारी एवं प्राईवेट स्कूलों/कालेजों के प्रबन्धकों के साथ गोष्ठी आयोजित कर खुलने एवं बंद होने के टाईम को स्टैगर कर इसको तत्काल क्रियान्वित किया जाए तथा वाहनों को जितना सम्भव हो सके स्कूलों/कालेजों में पार्क कराया जाए।
3. यातायात जनशक्ति की समीक्षा में निर्देश दिये गये है कि यातायात व्यवस्था में कार्य कर रहे समस्त यातायात कर्मियों की ड्यूटी प्वाईंट के आधार पर मूल्यांकन कर जनशक्ति का ऑडिट करा लिया जाए इसके पश्चात भी यदि अतिरिक्त कर्मियों की आवश्यकता प्रतीत होती है तो प्रस्ताव तैयार किया जाए।
4. यातायात प्रबन्धन में नवीन इनोवेशन सुधार हेतु आईआईटी रुड़की अथवा किसी अन्य संस्थान से कन्सलटींग रखा जाए।
5. टोईंग की कार्यवाही के दौरान जाम की स्थिति उत्पन्न न हों इसके लिए टोईंग की कार्यवाही को पीक ऑवर में करने से बचा जाए।
6. यातायात व्यवस्था में सड़कों पर निकलने वाले जूलूसों का डाटा बेस तैयार किया जाए और मुख्य मार्गों को जूलूस/रैलियों को प्रतिबन्धित किया जाए।
7. सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा के उपरान्त यह निर्देश दिये गये है कि बड़े जनपदों में टॉप 10 दुर्घटना स्पॉट तथा अन्य छोटे जनपदो में टॉप 05 दुर्घटना स्पॉट को चिन्हित कर उक्त स्थलों पर प्रवर्तन की कार्यवाही हेतु प्रवर्तन अधिकारियों एवं प्रवर्तन उपकरणों को तैनात किया जाए।
उक्त गोष्ठी में अमित सिन्हा, अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन उत्तराखण्ड, ए.पी. अंशुमान, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तराखण्ड, मुख्तार मोहसिन, पुलिस महानिरीक्षक/निदेशक यातायात उत्तराखण्ड, बरिन्दरजीत सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक, प्रशिक्षण, उत्तराखण्ड आदि मौजूद रहें।
Uttarakhand
Dehradun News : सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात अदला-बदली का गंभीर आरोप,परिजनों ने की DNA टेस्ट और CCTV फुटेज की मांग…

Dehradun News: सरकारी अस्पताल में नवजात की अदला-बदली ,कागजों में ‘Baby Boy’ दर्ज होने से गहराया शक
देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही और नवजात शिशु की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच, CCTV फुटेज और DNA टेस्ट कराने की मांग की है।
जन्म से जुड़े कागजातों में गड़बड़ी से बढ़ा शक
परिजनों के अनुसार, महिला को 22 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में सामान्य प्रसव की बात कही गई, लेकिन 24 अगस्त की रात अचानक सिजेरियन ऑपरेशन (C-section) करने का फैसला लिया गया।
विवाद तब शुरू हुआ जब ऑपरेशन के बाद अस्पताल की ओर से परिजनों को दिए गए कागजात में स्पष्ट रूप से ‘लड़का’ (Baby Boy) पैदा होने का उल्लेख था। हालांकि, जब नवजात को परिजनों को सौंपा गया, तो वह लड़की थी। परिजनों द्वारा सवाल उठाने पर अस्पताल कर्मचारियों ने इसे महज ‘लिखने की गलती’ (Clerical Error) बताकर पल्ला झाड़ लिया।

पीड़ित परिवार की प्रमुख मांगे
अस्पताल के जवाब से असंतुष्ट परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर निम्नलिखित मांगे रखी हैं:
- CCTV फुटेज सुरक्षित करना: डिलीवरी के दौरान ओटी (OT) के बाहर, एग्जिट गेट और गलियारों की वीडियो रिकॉर्डिंग परिजनों को दिखाई जाए और सुरक्षित रखी जाए।
- DNA जांच: उस दिन अस्पताल में जन्मे सभी बच्चों और परिजनों को सौंपे गए नवजात का निष्पक्ष DNA टेस्ट कराया जाए।
- कथित वीडियो की जांच: परिजनों का दावा है कि उनके पास एक वीडियो रिकॉर्डिंग है, जिसमें अस्पताल की एक नर्स यह कहती दिख रही है कि नवजात को ओटी के बाहर से लाया गया था।
प्रशासनिक ढिलाई पर कड़ी कार्रवाई की मांग
शिकायत दर्ज कराए एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद परिजनों का आरोप है कि उन्हें जांच को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है और न ही फुटेज उपलब्ध कराई गई है। परिजनों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर यदि किसी भी स्तर पर नवजात की अदला-बदली या जानबूझकर की गई गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषी कर्मचारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
Dehradun
रक्षाबंधन पर फ्री बस सेवा का लाभ ले रहीं महिलाएं, कल भी रोडवेज में होगा मुफ्त सफर

Dehradun News : उत्तराखंड में आज रक्षाबंधन का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना कर रही हैं। वहीं भाई भी बहनों की सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प ले रहे हैं।
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रक्षाबंधन पर फ्री बस सेवा का लाभ ले रहीं महिलाएं
रक्षाबंधन के इस खास मौके पर उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी है। राज्य की महिलाएं आज यानी 28 अगस्त के साथ-साथ 29 अगस्त को भी उत्तराखंड रोडवेज की बसों में बिना किराया दिए यात्रा कर सकेंगी।
दो दिन महिलाओं से नहीं लिया जाएगा बस का किराया
सरकार के आदेश के मुताबिक, रक्षाबंधन के अवसर पर उत्तराखंड के भीतर संचालित उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को 100 प्रतिशत किराया छूट दी जा रही है। यानी प्रदेश की सीमा के भीतर रोडवेज बस से सफर करने वाली महिलाओं से टिकट का किराया नहीं लिया जाएगा।

महिला सम्मान और सशक्तिकरण से जोड़ा फैसला
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार का प्रयास है कि रक्षाबंधन जैसे पर्व पर महिलाओं को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। मुफ्त बस सेवा का उद्देश्य उनके आवागमन को आसान बनाना और आर्थिक बोझ कम करना है।
सरकार करेगी रोडवेज के खर्च की भरपाई
महिलाओं को मुफ्त यात्रा देने से उत्तराखंड परिवहन निगम पर पड़ने वाले आर्थिक भार की भरपाई भी राज्य सरकार करेगी। शासन की ओर से जारी आदेश में इस व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है।
अपर सचिव उत्तराखंड शासन रीना जोशी की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार, निशुल्क यात्रा के कारण परिवहन निगम को होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
Dehradun
उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी होगी और मजबूत, 13 संवेदनशील झीलों पर सरकार की नजर

Uttarakhand News : उत्तराखंड के ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों में ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज करने का फैसला लिया है। सरकार अब संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की नियमित निगरानी के साथ-साथ संभावित आपदा से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर चेतावनी तंत्र विकसित करेगी।
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उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों की निगरानी होगी और मजबूत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की वैज्ञानिक तरीके से लगातार निगरानी की जाए। इसके तहत झीलों के जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भूगोल और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों का समय-समय पर आकलन किया जाएगा।
संवेदनशील इलाकों में लगेंगे आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम
सरकार की योजना ऐसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की है, जहां ग्लेशियर झीलों के कारण अचानक बाढ़ या अन्य आपदा का खतरा अधिक हो सकता है। इसके लिए सेंसर, जलस्तर मापने वाले उपकरण और बेहतर संचार प्रणाली जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया है कि सिर्फ चेतावनी प्रणाली लगाने से काम पूरा नहीं होगा। संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सुरक्षित निकासी मार्ग, प्रभावित क्षेत्र का पूर्व चिन्हांकन, स्थानीय चेतावनी व्यवस्था और राहत-बचाव की तैयारियों को भी मजबूत किया जाए।

नेपाल की आपदा के बाद उत्तराखंड में तैयारियों की समीक्षा
नेपाल में हाल में सामने आई आपदा के बाद उत्तराखंड में भी संभावित जोखिमों को लेकर प्रशासन ने तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय रुहेला और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल रघुवीर सिंह भंडारी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।
जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि दिखाई देने पर उसकी जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा गया है।
उत्तराखंड में 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इनमें से चार झीलों का सर्वेक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है।
अब बाकी संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। इस प्रक्रिया में झील की मौजूदा स्थिति, पानी के स्तर में बदलाव, संभावित खतरे और झील के नीचे आने वाले क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
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