Chamoli
बद्रीनाथ धाम में ठहर सकते है एक दिन में 20,000 श्रद्धालु, जानिए कितने है होटल,धर्मशाला।

बद्रीनाथ धाम – बदरीनाथ धाम में तीर्थयात्रियों को ठहरने की पर्याप्त जगह मिल जाती है। यहां एक दिन में लगभग 20,000 श्रद्धालु ठहर सकते हैं। यहां होमस्टे नहीं हैं, लेकिन 180 छोटे-बड़े होटल और 28 धर्मशालाएं हैं। बदरीनाथ धाम में वातानुकूलित होटल भी हैं जिनका एक दिन का किराया 38,000 रुपये है, जबकि अन्य होटलों में 1000 से लेकर 5000 तक किराये पर कमरा मिल जाता है। वहीं धर्मशालाओं में 300 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का कमरा मिल जाता है।

धाम में बीकेटीसी के दो धर्मशालाएं भी थीं। इन धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं के निशुल्क ठहरने की व्यवस्था थी, लेकिन इन धर्मशालाओं को मास्टर प्लान के तहत ध्वस्त कर दिया गया है। वहीं ज्योतिर्मठ की धर्मशालाओं में साधु-संतों व निर्धन श्रद्धालुओं को निशुल्क ठहरने की व्यवस्था मिल जाती है।
धाम में गढ़वाल मंडल विकास निगम का गेस्ट हाउस भी है। इसमें 560 लोग ठहर सकते हैं। यहां 4500 से लेकर 5800 रुपये किराये पर कमरे मिल जाते हैं। इसमें खाने की सुविधा भी दी जाती है, जबकि 500 बेड की डोरमेटरी भी है, यहां 700 रुपये प्रति बेड (डिनर सहित) की सुविधा है। जीएमवीएन के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक रावत ने बताया कि यात्रा पड़ाव जोशीमठ, पीपलकोटी, कर्णप्रयाग, गौचर, गोपेश्वर में भी निगम के गेस्ट हाउस स्थित हैं।

Chamoli news : उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार शाम बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लामबगड़ के पास एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। यहां तेज टक्कर के बाद पिकअप और राजस्थान नंबर की कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में कुल आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है।
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चमोली में दर्दनाक सड़क हादसा
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम लामबगड़ के समीप पिकअप और कार की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। पिकअप में छह लोग सवार थे, जबकि कार में दो यात्री मौजूद थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहनों के अगले हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई।
स्थानीय लोगों ने पहुंचकर चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
दुर्घटना की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य में जुट गए। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय लोगों और रेस्क्यू टीम की मदद से वाहनों में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया। इसके बाद सभी आठ घायलों को जेपी कंपनी के नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।
चार घायलों की हालत गंभीर, जोशीमठ रेफर
अस्पताल में डॉक्टरों ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया। चार लोगों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जोशीमठ रेफर कर दिया गया है। वहीं, अन्य चार घायलों का जेपी अस्पताल में उपचार जारी है। कार में सवार यात्रियों को हल्की चोटें आई हैं.
चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक, दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य किया। फिलहाल हादसा किन कारणों से हुआ, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पहाड़ी रास्तों पर लगातार हो रहे सड़क हादसे एक बार फिर यातायात नियमों के पालन और वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत को उजागर कर रहे हैं।
Breakingnews
चमोली में चारधाम यात्रियों को ले जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश, पायलट समेत 6 लोगों की मौत

Chamoli News : उत्तराखंड के चमोली जिले में बदरीनाथ धाम से देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए उड़ान भरने वाला एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा जोशीमठ के पास हाथी पर्वत क्षेत्र में हुआ। हेलीकॉप्टर में पायलट समेत छह लोग सवार थे। चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि की है।
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चमोली में चारधाम यात्रियों को ले जा रहा हेलीकॉप्टर क्रैश
हेलीकॉप्टर ने दोपहर 1:14 बजे बर्फबारी के बीच बदरीनाथ धाम से देहरादून के लिए उड़ान भरी थी। जोशीमठ घाटी के ऊपर पहुंचने के दौरान हेलीकॉप्टर का संपर्क टूट गया। इसके साथ ही ट्रैकिंग सिस्टम भी उसकी लोकेशन पता नहीं लगा सका। कुछ देर बाद हाथी पर्वत के पास हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली।
पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत
प्रशासन के अनुसार, भारतीय सेना ने सबसे पहले चमोली के जिलाधिकारी को हादसे की जानकारी दी। इसके बाद सेना, जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें सर्च एवं रेस्क्यू अभियान के लिए मौके पर रवाना की गईं। हादसे के बाद एहतियातन ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के सभी हेलीकॉप्टरों की उड़ानों पर रोक लगा दी गई।
कई कंपनियों के बीच बंटी थीं परिचालन और रखरखाव की जिम्मेदारियां
यूसीएडीए के हेड ऑफ ऑपरेशंस के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर स्काई पल्स कंपनी का था। इसे चार्टर उड़ानों के संचालन के लिए शिव भोले ट्रेवल मार्ट को दिया गया था। जानकारी के अनुसार, शिव भोले ट्रेवल मार्ट के पास अपना एनएसओपी (नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर परमिट) नहीं था। कंपनी ने डीजीसीए में परमिट के लिए आवेदन किया था, जिसकी प्रक्रिया जारी थी। इस दौरान उड़ानों के संचालन के लिए दूसरी कंपनी के परमिट का इस्तेमाल किया जा रहा था।
संचालन से लेकर रखरखाव तक की जिम्मेदारी अलग-अलग कंपनियों के पास
हेलीकॉप्टर के संचालन से लेकर रखरखाव तक की जिम्मेदारी अलग-अलग कंपनियों के पास थी। हेलीकॉप्टर का वास्तविक मालिक स्काई पल्स था, जबकि इसका संचालन लीज पर शिव भोले ट्रेवल मार्ट कर रहा था। उड़ान भरने वाले पायलट चिप्सन कंपनी के थे और हेलीकॉप्टर के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी शौर्य एयरोनॉटिक्स के पास थी। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर के स्वामित्व, संचालन, परमिट और रखरखाव से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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गैरसैंण में 11 घंटे भी नहीं चला विधानसभा सत्र, हंगामे के बीच ₹7,844 करोड़ का बजट पास

Gairsain News : उत्तराखंड के गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित विधानसभा सत्र विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के दौरान धामी सरकार ने ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट पारित कराया। इसके साथ ही सदन में कुल 10 विधेयकों को भी मंजूरी दी गई।
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गैरसैंण में 11 घंटे भी नहीं चला विधानसभा सत्र
विधानसभा सत्र के दूसरे दिन सदन में विपक्ष ने कार्यवाही की अवधि कम रखे जाने को लेकर विरोध जताया। विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि इतने कम समय में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो सकी। विरोध के दौरान सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी विधायकों ने वेल में कागज फेंके और काले झंडे लहराकर अपना विरोध दर्ज कराया।
हंगामे के बीच पारित हुए 10 विधेयक
विपक्ष के विरोध के बीच सदन की कार्यवाही जारी रही और सरकार का अनुपूरक बजट पारित हो गया। इसके अलावा 10 विधेयकों को भी सदन की मंजूरी मिल गई। बजट पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने 28 अक्टूबर को दोपहर करीब 1 बजकर 10 मिनट पर सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

11 घंटे भी नहीं चल पाया विधानसभा सत्र
भराड़ीसैंण में आयोजित यह विधानसभा सत्र अपनी निर्धारित अवधि और सदन में हुई चर्चा को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहा। विपक्ष ने कम समय में सत्र समेटे जाने पर सवाल उठाए और जनता से जुड़े मुद्दों पर अधिक चर्चा की मांग की। वहीं, हंगामे के बीच अनुपूरक बजट और विधेयकों के पारित होने के बाद कार्यवाही समाप्त हो गई।
इस तरह उत्तराखंड विधानसभा का यह सत्र कुल मिलाकर 11 घंटे भी नहीं चल सका। सत्र के दौरान जहां सरकार ने बजट और विधायी कार्यवाही पूरी की, वहीं विपक्ष ने कम अवधि और जनहित के मुद्दों पर चर्चा की कमी को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।
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