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Anasuya Mela : विधि-विधानपूर्वक दो दिवसीय अनसूया मेला शुरू, संतान प्राप्ति के लिए देशभर से पहुंचते हैं लोग

संतान दायिनी शक्ति शिरोमणि माता अनसूया का दो दिवसीय मेला विधि विधान व पूजा-पाठ के साथ बुधवार को शुरू हो गया। जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट और बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने पूजा अर्चना कर मेले का शुभारंभ किया।
विधि-विधानपूर्वक दो दिवसीय Anasuya Mela शुरू
उत्तराखंड में यूं तो कई मेले होते हैं। लेकिन चमोली जिले में होने वाला अनसूया मेला बेहद ही खास है। इस मेले में ना केवल राज्य से बल्कि देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। बुधवार को विधि-विधानपूर्वक अनसूया मेले का शुभारंभ हो गया है। दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर क्षेत्र की सभी देवियों डोलियां भी सती मां अनसूया के दरबार पहुंची। मां अनसूया मंदिर में दत्तात्रेय जयंती पर सम्पूर्ण भारत से हर वर्ष निसंतान दंपत्ति और भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पहुंचते है। जिला प्रशासन ने मेले के दौरान पूरे पैदल मार्ग पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम किए है।
हर साल आयोजित होता है दो दिवसीय अनसूया मेला
बता दें कि पौराणिक काल से दत्तात्रेय जयंती पर हर वर्ष सती माता अनसूया में दो दिवसीय मेला आयोजित किया जाता है। मां अनुसूया मेले में निसंतान दंपत्ति और भक्तजन अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए पहुंचते है। मान्यता है कि मां के दर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। मां सबकी झोली भर्ती है। इसलिए निसंतान दंपत्ति पूरी रात जागकर मां की पूजा अर्चना कर करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में जप और यज्ञ करने वालों को संतान की प्राप्ति होती है।
यहीं हुआ था तीन मुख वाले दत्तात्रेय का जन्म
मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर माता अनसूया ने अपने तप के बल पर त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और शंकर) को शिशु रूप में परिवर्तित कर पालने में खेलने पर मजबूर कर दिया था। बाद में काफी तपस्या के बाद त्रिदेवों को पुनः उनका रूप प्रदान किया और फिर यहीं तीन मुख वाले दत्तात्रेय का जन्म हुआ। इसी के बाद से यहां संतान की कामना को लेकर लोग आते हैं। यहां दत्तात्रेय मंदिर की स्थापना भी की गई है। स्थानीय लोग बताते हैं कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने मां अनसूया के सतीत्व की परीक्षा लेनी चाही थी, तब उन्होंने तीनों को शिशु बना दिया। ये त्रिरूप दत्तात्रेय भगवान बने और उनकी जयंती पर यहां मेला और पूजा अर्चना होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. अनसूया मेला कहाँ लगता है?
अनसूया मेला उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माता अनसूया देवी मंदिर परिसर में आयोजित किया जाता है।
2. अनसूया मेला कब आयोजित होता है?
यह पारंपरिक मेला हर वर्ष दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर दो दिनों तक आयोजित किया जाता है।
3. अनसूया मेले की खासियत क्या है?
मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि देशभर से निसंतान दंपत्ति और देवभक्त मां अनसूया से संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर यहां आते हैं।
4. मेले के दौरान कौन-कौन सी धार्मिक गतिविधियाँ होती हैं?
मां अनसूया की विशेष पूजा-अर्चना
पूरी रात जागकर अनुष्ठान
जप और यज्ञ
देवडोलियों का आगमन
दत्तात्रेय जयंती पर विशेष समारोह
5. क्या निसंतान दंपत्ति को संतान प्राप्ति की मान्यता है?
हाँ, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां अनसूया के दरबार में जप और यज्ञ करने से संतान की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि मां किसी भक्त को खाली हाथ नहीं लौटातीं।
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बद्रीनाथ से कांग्रेस का बड़ा अभियान शुरू, न्याय यात्रा लेकर जनता के बीच पहुंचे गणेश गोदियाल

Chamoli News :उत्तराखंड में कांग्रेस ने जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी न्याय यात्रा की शुरुआत बदरीनाथ धाम से की है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में निकाली जा रही इस यात्रा के जरिए पार्टी जनता के अधिकारों, समस्याओं और न्याय से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाना चाहती है।
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बद्रीनाथ से कांग्रेस का बड़ा अभियान शुरू
बद्रीनाथ से कांग्रेस का बड़ा अभियान शुरू हो गया है। कांग्रेस इस अभियान को प्रदेशभर में विस्तार देने की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि यात्रा के माध्यम से लोगों के बीच पहुंचकर उनकी परेशानियों और अपेक्षाओं को समझा जाएगा। साथ ही जनहित से जुड़े मुद्दों पर जनता की आवाज को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
देहरादून में भी निकाली गई न्याय यात्रा
इससे पहले देहरादून में भी कांग्रेस ने न्याय यात्रा का शुभारंभ किया था। चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने टपकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना कर अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और न्याय की कामना की।

देहरादून में कांग्रेस भवन से राजपुर और मसूरी विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत राजपुर विधानसभा क्षेत्र में चौक, घंटाघर और पलटन बाजार से होते हुए राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स तक पदयात्रा प्रस्तावित थी।
दूसरे विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचेगी यात्रा
कांग्रेस न्याय यात्रा को केवल एक क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय प्रदेशव्यापी अभियान का रूप देना चाहती है। इसके तहत आने वाले दिनों में सहसपुर, विकासनगर, चकराता, धर्मपुर, कैंट और ऋषिकेश समेत अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी यात्रा निकालने की योजना है।

पार्टी के मुताबिक, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनता से सीधा संवाद स्थापित करना और उनके सवालों को सामने लाना है। कांग्रेस इसे न्याय, अधिकार और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर जनसंपर्क बढ़ाने की पहल के रूप में पेश कर रही है।
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उत्तराखंड में भालू का आतंक, जोशीमठ में एक ही परिवार के 4 लोगों पर किया हमला

Chamoli News : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भालुओं की बढ़ती सक्रियता लोगों के लिए खतरा बनती जा रही है। चमोली जिले के जोशीमठ में भालू ने एक ही परिवार के चार सदस्यों पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना
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जोशीमठ में एक ही परिवार के 4 लोगों पर किया हमला
जोशीमठ के सिंहधार वार्ड में देर रात करीब तीन बजे भालू ने गौशाला पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि हमले में एक गाय भी घायल हुई है। बचाने के लिए गौशाला गए एक ही परिवार के चार लोगों पर भी भालू ने हमला कर दिया।
घटना के बाद सभी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। इस घटना से क्षेत्र में दहशत का माहौल है और स्थानीय लोग अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
हमले के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। लोगों ने प्रभावित इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, वन विभाग की टीम तैनात करने और भालू की गतिविधियों पर निगरानी रखने की मांग की है।
आबादी वाले क्षेत्रों में बढ़ रहा वन्यजीवों का खतरा
पहाड़ी क्षेत्रों में जंगलों से निकलकर वन्यजीवों के आबादी वाले इलाकों तक पहुंचने की घटनाएं लोगों की चिंता बढ़ा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाना जरूरी है। जोशीमठ की इस घटना के बाद लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
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हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बीच अंतिम अरदास, शीतकाल के लिए बंद हुए कपाट

Chamoli News : सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को साल की अंतिम अरदास के बाद शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस वर्ष यात्रा के दौरान 3,84,573 से अधिक श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे में मत्था टेका।
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हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बीच अंतिम अरदास
हेमकुंड साहिब के कपाट आज बंद हो गए हैं। कपाट बंद होने के इस विशेष अवसर पर करीब चार हजार श्रद्धालु मौजूद रहे और ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। इस मौके पर पाकिस्तान से आए 40 सदस्यीय सिख श्रद्धालुओं के जत्थे ने भी अंतिम अरदास में भाग लिया। एक दिन पहले हुई भारी बर्फबारी के कारण हेमकुंड साहिब का पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक गया था। इसके बावजूद श्रद्धालु बर्फीले रास्तों से होकर धाम पहुंचे और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुए।
शीतकाल के लिए बंद हुए कपाट
शुक्रवार को हुई सीजन की अंतिम बर्फबारी ने हेमकुंड साहिब की खूबसूरती को और बढ़ा दिया। चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछने से पूरा क्षेत्र बेहद मनमोहक नजर आया। कपाट बंद होने के दिन भी श्रद्धालुओं को बर्फ से ढके धाम के अद्भुत नजारे देखने का अवसर मिला।

सुबह 10 बजे शुरू हुई कपाट बंद होने की प्रक्रिया
कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया शनिवार सुबह 10 बजे सुखमनी साहिब के पाठ के साथ शुरू हुई। इसके बाद शब्द कीर्तन किया गया। दोपहर 12:30 बजे अंतिम अरदास हुई और दोपहर एक बजे हुक्मनामा लिया गया।
सेना के बैंड की मधुर धुनों के बीच पंच प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब को दरबार साहिब से सचखंड में सुशोभित किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद हेमकुंड साहिब के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
लक्ष्मण मंदिर के कपाट कल होंगे बंद
हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने के साथ ही लोकपाल घाटी के अन्य धार्मिक स्थलों में भी शीतकालीन बंदी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लक्ष्मण मंदिर के कपाट रविवार को बंद किए जाएंगे। मंदिर के पुजारी मनीष पांडे के अनुसार, कपाट बंद करने से संबंधित सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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