Dehradun
बजट में पुरानी पेंशन बहाली का निर्णय न होने से देश के 85 लाख एनपीएस कार्मिकों में आक्रोश – बी पी सिंह रावत !

देहरादून – पुरानी पेंशन बहाली की बात बजट में न होने से देश के 85 लाख एनपीएस कार्मिकों में आक्रोश है पूरे देश भर के लाखों एनपीएस कार्मिकों को उम्मीद थी कि इस बार केंद्र सरकार पुरानी पेंशन बहाली पर जरूर एक बड़ा निर्णय लेगी लेकिन बजट में पुरानी पेंशन बहाली की बात न करना एनपीएस कार्मिकों में मायूसी छा गई है।

राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत ने कहा है कि पुरानी पेंशन बहाली पर केंद्र सरकार द्वारा कोई भी निर्णय न लेना अत्यंत चिंताजनक है देश के लाखों कर्मचारी ,अधिकारी, शिक्षक ,डाक्टर ,नर्स ,स्वास्थ्य कर्मी, सफाई कर्मी, पुलिस कर्मी, रेलवे कर्मी ,बैंक कर्मी ,इंजीनियर, लेखपाल, पटवारी सभी को पूर्ण रूप से उम्मीद थी कि इस बार जरूर केंद्र सरकार पुरानी पेंशन का तोहफा देगी लेकिन इस बार भी केंद्र सरकार ने एनपीएस कार्मिकों को निराशा के सिवा और कुछ नहीं दिया ।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत ने कहा है कि विगत दस वर्षो से देश के लाखों एनपीएस कार्मिक पुरानी पेंशन बहाली मांग के लिए हर दिन देश की सड़को पर आंदोलन कर रहे है लेकिन मोदी जी के कान तक पुरानी पेंशन बहाली की बात नहीं पहुंच रही है ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार बहरी सरकार हो गए है जो देश के लाखों एनपीएस कार्मिकों की पीड़ा नहीं समझ रहे है
राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी सिंह रावत ने कहा है कि अब समय आ गया है कि ईट का जवाप पत्थर से दिया जाए लोक सभा चुनाव की तर्ज पर आने वाले सभी उप चुनाव के साथ साथ हरियाणा महाराष्ट्र और झारखंड राज्य के विधान सभा चुनाव में एनपीएस कार्मिक करारा जवाब देगे इसके लिए बड़े स्तर पर प्रचार प्रसार तेज किया जाएगा जिसमे कर्मचारी अपने परिवार जनों के साथ पुरानी पेंशन बहाली मुद्दे पर वोट करने की बात करेगे ।
बी पी सिंह रावत ने कहा है कि पुरानी पेंशन बहाली मांग के लिए देश भर के सभी एनपीएस कार्मिक एकजुट होकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने पर विचार कर रहे है तीन राज्यों के चुनाव से पहले दिल्ली रामलीला मैदान में एकजुट होकर पुरानी पेंशन बहाली के लिए हल्ला बोल महारैली कार्यक्रम आयोजित करेगे जिसमे राज्य कर्मचारी से लेकर केंदीय कर्मचारी सभी बड़ी सख्या में भागीदारी करेगे ।
बी पी सिंह रावत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से लाखों अनुनय विनय करने के बाबजूद भी पुरानी पेंशन बहाली पर कोई निर्णय न लेना बड़ा पीड़ा दायक है बी पी सिंह रावत ने कहा है कि पुरानी पेंशन का जो भी सरकार और नेता विरोध कर हो उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और समय आने पर पुतले तक फूकने का कार्यक्रम आयोजित करने पर विचार किया जाएगा।
बी पी सिंह रावत ने कहा है कि 2024 पुरानी पेंशन बहाली मांग के लिए स्वर्णिम समय है अभी तक के सभी आंदोलन देश के लाखों एनपीएस कार्मिकों ने शांति पूर्ण तरीके से आयोजित किए है अब समय आ गया है कि देश के सभी एनपीएस कार्मिकों को आर या पार के लिए तैयार रहना होगा पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन में कोई हानि होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी ।
Dehradun
उपनल कर्मियों पर सख्त सरकार, 3 दिन में कॉन्ट्रैक्ट करो, वरना होगी कार्रवाई, CS का बड़ा अल्टीमेटम

Dehradun News : उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी विभागों को उपनल कर्मियों के साथ अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) की प्रक्रिया तीन दिनों के भीतर पूरी करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तय समयसीमा का पालन नहीं करने वाले विभागाध्यक्षों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि (नेगेटिव रिमार्क) दर्ज की जाएगी।
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उपनलकर्मियों और विभागों के बीच कॉन्ट्रैक्ट पर अल्टीमेटम
सचिवालय में आयोजित सचिव समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभाग इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने विभागाध्यक्षों से कहा कि उपनल कर्मियों के साथ अनुबंध की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

3 दिन में कॉन्ट्रैक्ट करो, वरना होगी कार्रवाई
बैठक में कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) और वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (एसीआर) से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सरकार के पूर्व आदेशों का पूरी तरह पालन करते हुए पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया अगले एक महीने के भीतर शुरू की जाए। साथ ही सभी विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर एसीआर तैयार करने और बैच क्रिएशन का कार्य जल्द पूरा करें।
सभी विभागों से प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी विभागों से प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने, लंबित मामलों का समय पर निस्तारण करने और शासन के निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
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उत्तराखंड का ‘लेखक गांव’ बनेगा नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट, सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी

Dehradun News : उत्तराखंड सरकार द्वारा साहित्य पर्यटन को प्रोत्साहित करने की घोषणा का देश के पहले लेखक गांव ने स्वागत किया है। लेखक गांव का मानना है कि राज्य सरकार की इस पहल से उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी तथा साहित्य आधारित पर्यटन को व्यापक और संस्थागत स्वरूप प्राप्त होगा।
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उत्तराखंड का ‘लेखक गांव’ बनेगा नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट
देश के प्रथम लेखक गांव ने अपनी स्थापना के बाद से साहित्य, संस्कृति, पर्यावरण और पर्यटन को एक सूत्र में जोड़ते हुए “साहित्य पर्यटन पथ” की अवधारणा पर निरंतर कार्य किया है। लेखक गांव का उद्देश्य केवल पर्यटन नहीं, बल्कि साहित्यकारों के जीवन, उनकी रचनाओं, जन्मस्थलों, कर्मभूमि और उनसे जुड़े सांस्कृतिक परिवेश को अनुभव कराने वाली एक नई पर्यटन संस्कृति विकसित करना रहा है। इसी दृष्टि से लेखक गांव ने साहित्य ग्रामों की अवधारणा को भी निरंतर आगे बढ़ाया है।
उत्तराखंड सरकार की पहल से मिलेगा व्यापक विस्तार
साल 2025 में सुमित्रानंदन पंत जयंती के अवसर पर हेनब गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के सहयोग से “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” का सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन लेखक गांव में किया गया। तदोपरांत 23 मई 2026 को लेखक गांव द्वारा “साहित्य पर्यटन पथ” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें साहित्यकारों, पर्यटन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं शोधकर्ताओं ने उत्तराखंड में साहित्य पर्यटन की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

कई ऐतिहासिक स्थलों को किया जा सकता है विकसित
लेखक गांव का मानना है कि उत्तराखंड में अनेक ऐसे साहित्यिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जिन्हें साहित्य ग्राम और साहित्य पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सकता है। इनमें कौसानी प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली, रामगढ़ गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर और महादेवी वर्मा की साहित्य साधना से जुड़ा स्थल, मायावती स्वामी विवेकानंद की तपोभूमि भी है।
अल्मोड़ा महात्मा गांधी के प्रवास से जुड़ा क्षेत्र, कालीमठ आदि कवि कालिदास की जन्मस्थली, कण्वाश्रम ऋषि कण्व और चक्रवर्ती सम्राट भरत की परंपरा से जुड़ा क्षेत्र, माणा महर्षि वेदव्यास की तपस्थली, दुगड्डा इतिहासकार डॉ. शिवप्रसाद डबराल की कर्मभूमि, पाली हिंदी के प्रथम डी.लिट्. डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल तथा मालकोटी (पट्टी तल्ला नागपुर) सुप्रसिद्ध कवि चंद्रकुँवर बर्त्वाल की जन्मस्थली जैसे अनेक साहित्यिक स्थल शामिल हैं, जिन्हें एक समेकित “साहित्य पर्यटन पथ” के रूप में विकसित किया जा सकता है।
“सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ यात्रा” का जल्द होगा शुभारंभ
लेखक गांव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’ ने कहा कि साहित्य पर्यटन केवल पर्यटन नहीं, बल्कि समाज को अपनी सांस्कृतिक स्मृतियों, साहित्यिक विभूतियों और प्रकृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। लेखक गांव इस दिशा में निरंतर कार्य करता रहा है और आगे भी राज्य सरकार, पर्यटन विभाग, शैक्षणिक संस्थानों तथा साहित्यिक जगत के सहयोग से इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
इसी क्रम में आगामी सितंबर माह में लेखक गांव से “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ यात्रा” का शुभारंभ किया जाएगा। यह यात्रा कौसानी तक जाएगी, जहाँ सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली पर साहित्यिक आयोजन एवं लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा।
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देहरादून में BSNL कर्मचारियों का प्रदर्शन, सरकार और प्रबंधन से की बड़ी मांगें, तीन दिन तक चलेगा धरना

Dehradun News : बीएसएनएल उत्तराखंड सर्किल में कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार से तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। ऑल यूनियन एंड एसोसिएशन ऑफ बीएसएनएल–उत्तराखंड सर्किल के आह्वान पर 28 से 30 जुलाई तक चलने वाले इस आंदोलन के पहले दिन परिमंडल कार्यालय, पटेल नगर, देहरादून में कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया।
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देहरादून में BSNL कर्मचारियों का प्रदर्शन
आज देहरादून में बीएसएनएल उत्तराखंड सर्किल में कर्मचारियों ने अपना तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। धरना शुरू होने से एक दिन पहले यानी 27 जुलाई को कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में ब्लैक बैज लगाकर विरोध दर्ज कराया था। अब तीन दिवसीय आंदोलन के माध्यम से कर्मचारी अपनी लंबित मांगों के जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।

सरकार और प्रबंधन से की बड़ी मांगें
यूनियन की प्रमुख मांगों में उत्तराखंड में लागू किए जा रहे संगठनात्मक पुनर्गठन (ऑर्गेनाइजेशनल रीस्ट्रक्चरिंग) के पायलट प्रोजेक्ट को वापस लेने की मांग शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि इस योजना को लागू करने से पहले सभी मानव संसाधन (HR) से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए।
तीन दिन तक चलेगा धरना
बता दें कि यूनियन ने 1 जनवरी 2017 से लंबित तीसरे पीआरसी के तहत वेतन संशोधन (Wage Revision) का लाभ कर्मचारियों को दिए जाने की भी मांग उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन संशोधन से जुड़ी “अफोर्डेबिलिटी क्लॉज” में आवश्यक छूट देकर इसका लाभ सभी कर्मचारियों तक पहुंचाया जाए।
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