Dehradun
विधानसभा सत्र के दौरान सदन में मोबाइल के उपयोग पर रोक, विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने दिए आदेश….

देहरादून : उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान सदन में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का स्पष्ट आदेश विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने दिया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब सदन के भीतर किसी भी प्रकार के मोबाइल फोन का उपयोग नहीं किया जाएगा।
रितु खंडूरी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी सदस्य को प्रश्नों का उत्तर देने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग करना जरूरी हो, तो वह सदन से बाहर जाकर यह कार्य कर सकते हैं। उन्होंने यह निर्णय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सदन के कार्यों में कोई विघ्न न आए, इस उद्देश्य से लिया है।

पिछले विधानसभा सत्र के दौरान, कुछ सदस्यों द्वारा मोबाइल फोन का उपयोग किए जाने को लेकर विरोध उत्पन्न हुआ था। इस कारण विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए मोबाइल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया। इस कदम से सदन की कार्यवाही की पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जाएगी।
विधानसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों से अनुरोध किया कि वे इस आदेश का पालन करें और सदन के भीतर किसी भी प्रकार के अव्यवस्था से बचने के लिए सहयोग प्रदान करें।
Uttarakhand
मंच पर भावुक हुई गीता धामी, कहा मुख्यमंत्री धामी ने चार सालों में नहीं ली एक भी छुट्टी

Uttarayani Kauthik Mahotsav 2026: समापन समारोह पर पहुंचे सीएम धामी
मुख्य बिंदु
Uttarayani Kauthik Mahotsav 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के परेड ग्राउंड में चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का आयोजन हुआ. ये आयोजन सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से आयोजित किया गया था . इस महोत्सव में उत्तराखंड की संस्कृति और लोक गीतों ने समां बांधा, इसके साथ ही महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया. पहली बार इस तरह का आयोजन देहरादून में आयोजित किया गया है. जिसमें प्रदेश के हर कोने की संस्कृति नजर आई.
जनता को संबोधित करते समय भावुक हुई गीता धामी
समापन समारोह के दौरान GEETA DHAMI ने जनता को संबोधित किया. संबोधन के दौरान गीता धामी भावुक हो गई. दरअसल, वो मातृशक्ति के बारे में बात कर रही थी. इस दौरान उन्होंने देश की कई महान वीरांगनाओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की माता विशना देवी न होती और वो परिवार की देखभाल न करती तो आज वो इस पद पर ना होते.

पुष्कर धामी ने परिवार से पहले राज्य को दी प्राथमिकता
इसी दौरान उन्होंने कहा की प्रदेश के मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी ने परिवार के लिए एक दिन भी नहीं निकाला. चार साल से लगातार प्रदेश की सेवा में लग रहे. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई कड़े नियम बनाए. 26 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी दी, नकल विरोधी कानून बनाया. फिर भी उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं.
सीएम पर लगाए जा रहे बेबुनियाद आरोप
GEETA DHAMI ने संबोधन के दौरान कहा कि कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि पुष्कर सिंह धामी धर्म के खिलाफ UCC लाए और लिव इन रिलेशन को मान्यता दी. जबकि धामी ने कोई नई मान्यता नहीं दी. लिव-इन रिलेशनशिप को मान्यता सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट पहले ही दे चुके हैं. धामी ने सिर्फ उसके लिए नियम बनाए.
पुष्कर सिंह धामी हैं धर्म के रक्षक
गीता धामी ने कहा पुष्कर सिंह धामी को धर्म रक्षक के नाम से जाना जाता है. आज पूरे प्रदेश में बहने खुद को धामी की लाई गई योजनाओं से सशक्त बना रहीं हैं. फिर भी कुछ लोग उन पर कई तरह के आरोप लगाकर भ्रम फैला रहे हैं.
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बड़ी खबर ! भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का जल्द बढ़ सकता है वेतन

उत्तराखंड में भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की तैयारी
Anganwadi workers salary: प्रदेश भर की भोजन माताओं और आशा कार्यकर्ताओं के लिए अच्छी खबर है. सरकार जल्द ही उनके मानदेय में बढ़ोतरी कर सकती है. उत्तराखंड में वर्तमान में 24000 भोजन माताएं कार्यरत हैं. जबकि 12000 आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या 40 हजार से अधिक है.
मुख्य बिंदु
Anganwadi workers salary: सरकार जल्द ले सकती है मानदेय बढ़ाने का फैसला
उत्तराखंड में भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जल्द ही खुशखबरी मिल सकती है. शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विभाग इस सम्बन्ध में शासन को प्रस्ताव भेज चुके हैं. इसके आलावा मध्य क्षेत्र परिषद की पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में हुई बैठक में भी उत्तराखंड सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था.
प्रदेश में 24 हजार भोजन माताएं कार्यरत
प्रदेश में पीएम पोषण योजना के तहत लगभग 24 हजार भोजन माताएं सेवाएं दे रही हैं. वर्तमान में उन्हें हर महीने तीन हजार रुपये वेतन मिलता है, जिसमें केंद्र सरकार का 900 रुपये और राज्यांश के रूप में 100 रुपये शामिल हैं, जबकि शेष दो हजार रुपये राज्य सरकार अलग से देती है. लेकिन बढ़ती महंगाई के बीच ये राशि अपर्याप्त मानी जा रही है, जिसे लेकर लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग उठ रही है.
ये भी पढ़ें- उत्तराखंड : आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सौगात, अब रिटायरमेंट पर मिलेंगे 4 लाख
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगी खुशखबरी
इसके अलावा प्रदेश में 40 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं भी कार्यरत हैं, जो काफी समय से मानदेय वृद्धि की मांग कर रही हैं. फिलहाल इन्हें केंद्र सरकार की ओर से 4500 रुपये और राज्य सरकार की ओर से हर महीने 4800 रुपये का मानदेय दिया जा रहा है. अब राज्य सरकार इन कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी पर गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि उनके कार्य को सम्मानजनक आर्थिक सहयोग मिल सके.
विभाग शासन को भेज चुका है रिपोर्ट
इसी कड़ी में सरकार ने प्रमुख सचिव आरके सुधांशु की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है. महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बंशीलाल राणा के मुताबिक, विभाग अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुका है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे मानदेय का पूरा विवरण शामिल है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और भोजन माताओं के साथ-साथ प्रदेश में कार्यरत करीब 12 हजार आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में भी वृद्धि किए जाने की दिशा में फैसला लिया जा सकता है.
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उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 का भव्य समापन, सीएम धामी ने प्रेरक व्यक्तियों को किया सम्मानित

Dehradun News : सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित 4 दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 के समापन समारोह में रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।
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उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 का भव्य समापन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव–2026 के सफल आयोजन पर सेवा संकल्प फाउंडेशन को बधाई देते हुए कहा कि यह महोत्सव उत्तराखंड की आत्मा, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं और लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सीएम ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक जैसे सांस्कृतिक उत्सव न केवल प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करते हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और उत्पादों को भी एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, भाषा, परंपराओं और स्थानीय उत्पादों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को हर संभव सहयोग देती रहेगी।
हर क्षेत्र हमारी बालिकाएं, महिलाएं आगे – पद्म भूषण कोश्यारी
पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी ने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के सफल आयोजन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी लोगों का राज्य की संस्कृति के प्रति बड़ा प्रेम है। हमारे राज्य की परंपराओ के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष प्रेम है। हर क्षेत्र हमारी बालिकाएं, महिलाएं आगे हैं। हमारी मातृशक्ति निरंतर देश प्रदेश को आगे बढ़ा रही हैं।

अध्यक्ष केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड पद्मश्री प्रसून जोशी ने कहा कि हमारे उत्तराखंड की संस्कृति बांसुरी की तरह है, जिससे सुनने के लिए शांति की आवश्यकता है। पूरे विश्व में जो शोर है, उसमें उत्तराखंड की संस्कृति “बांसुरी” की तरह शांत है। उन्होंने कहा हमने अपनी भाषा को बचाना है, और इसके लिए बड़े तौर पर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा निर्णयों से हम तस्वीर बदल सकते हैं। हमने भाषा को बचाने का निर्णय लेना होगा। उन्होंने कहा कि मातृ भाषा पर गर्व करना बेहद जरूरी है।
कौथिक के माध्यम से पूरे राज्य की संस्कृति आई एक मंच पर
सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने कहा कि बीते 4 दिनों से इस महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति को जीवंत रखने का कार्य किया गया है। इस महोत्सव में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पाद, जीवनशैली को सुंदर रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा इस महोत्सव का शुभारंभ शंखनाद से हुआ था। इस कार्यक्रम का सफल आयोजन सभी की मेहनत का फल है।
गीता धामी ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक में पूरे राज्य से लोग आए। ये मात्र संस्था का नहीं बल्कि पूरे राज्य का आयोजन है। जिसमें पूरे राज्य से लोगों ने प्रतिभाग किया है। हमने इस कौथिक के माध्यम से पूरे राज्य की संस्कृति एक मंच पर दिखाया। उन्होंने कहा युवा पीड़ी को इतिहास से जोड़ते हुए उनका भविष्य बनाना है। उन्होंने कहा हमने अपने भविष्य को अपनी जड़ों से जोड़े रखना है।
आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण भी बेहद जरूरी
गीता धामी ने कहा कि आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण भी बेहद जरूरी है। जब तक संस्कृति जीवित है, तब तक हमारी पहचान और सम्मान है। हमारी सनातन संस्कृति ही सबसे पुरातन संस्कृति है। हमें गर्व है कि हम उत्तराखंड और भारत के लोग हैं। उन्होंने सभी से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की अधिक से अधिक खरीदारी करने की बात कही। उन्होंने कहा जिससे हम राज्य के अर्थव्यवस्था को बढ़ा सके और उत्तराखंड को आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाएं।
गीता धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू हुआ, सख्त नकल विरोधी लागू कर हजारों लोगों को रोजगार दिया है। आज उत्तराखंड नए आयाम स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वालों को किया सम्मानित
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया। सम्मानित व्यक्तियों ने अपने कार्यों से समाज में प्रेरणा और उदाहरण पेश किया है। इस अवसर पर महावीर लाल, अनुश्रिया गुलाटी, मनमोहन भारद्वाज, शशि थपलियाल, पुष्पा देवी, कन्हैया सिंह, संजना मंडल, अपर्णा पनेरू, चम्पा पांगती और राजमती देवी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करते हैं।
उत्तरायणी महोत्सव में लोकगीतों ने मचाई धूम
उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत करते हुए उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में इन्दर आर्या, बी.के सामंत मनमोहन बटकोरा, रेशमा शाह और अरविंद राणा के लोकगीतों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। उनकी स्वर और गायन की मधुर प्रस्तुति पर लोग झूम उठे और नाचने लगे।
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता से जुड़े आयोजनों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। महोत्सव के दौरान नशा मुक्ति अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई। सी.आई.एम.एस कॉलेज के छात्रों द्वारा ड्रग्स अब्यूज़ विषय पर प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने दर्शकों को तक सामाजिक संदेश को प्रभावी ढंग से पहुंचाया।
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