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चंपावत में दर्दनाक हादसा! 100 मीटर खाई में गिरी कार, दो की मौत

Champawat News : चंपावत में गुरूवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। कानाकोट-सिरतोली मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई।
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चंपावत में 100 मीटर खाई में गिरी कार
चंपावत जिले में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। पाटी क्षेत्र के कानाकोट-सिरतोली मार्ग पर एक कार अनियंत्रित होकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में कार सवार दोनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
दर्दनाक हादसे में दो लोगों की मौत
घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मिली जानकारी के मुताबिक, कार संख्या UK 04-6677 कानाकोट से लोहाघाट की ओर जा रही थी। सिरतोली के पास अचानक चालक का वाहन पर नियंत्रण नहीं रहा और कार सड़क से नीचे खाई में जा गिरी। हादसा दोपहर करीब ढाई बजे हुआ।

बिहार के रहने वाले थे दोनों मृतक
कार में वाहन स्वामी और चालक कमल सिंह बोहरा (58), निवासी कानाकोट और बबलू चौधरी (38), निवासी पश्चिमी चंपारण, बिहार सवार थे। दुर्घटना में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के दौरान वहां से गुजर रही अद्वैत आश्रम मायावती लोहाघाट की एंबुलेंस की मदद से दोनों घायलों को उपजिला अस्पताल लोहाघाट ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
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चंपावत में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार, दर्दनाक हादसे में एक की मौत, 3 घायल

Champawat News : चंपावत जिले के बनलेख क्षेत्र में मंगलवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। खटीमा से पिथौरागढ़ की ओर जा रही एक कार अचानक अनियंत्रित होकर करीब 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी।
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चंपावत में 150 मीटर गहरी खाई में गिरी कार
चंपावत में बनलेख क्षेत्र में देर शाम दर्दनाक हादसा हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक हादसे के समय वाहन में चार लोग सवार थे। दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। इनमें से एक घायल की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे बेहतर इलाज के लिए हल्द्वानी रेफर किया गया है।
दर्दनाक हादसे में एक की मौत
हादसे की सूचना मिलते ही चंपावत कोतवाली पुलिस और एसडीआरएफ की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद रेस्क्यू टीमों ने स्थानीय लोगों की मदद से अभियान शुरू किया। पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों ने खड़ी ढलान से नीचे उतरकर दुर्घटनाग्रस्त कार तक पहुंच बनाई और उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला।
रेस्क्यू के बाद सभी घायलों को 108 एंबुलेंस की सहायता से जिला अस्पताल चंपावत पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद एक व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया। वहीं दो घायलों का उपचार जिला अस्पताल में जारी है।

एक घायल की स्थिति गंभीर होने हायर सेंटर रेफर
एक घायल की स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी रेफर कर दिया। समय पर पुलिस और एसडीआरएफ के मौके पर पहुंचने से घायलों को खाई से निकालकर जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सका। राहत और बचाव अभियान में स्थानीय ग्रामीणों ने भी महत्वपूर्ण सहयोग किया।
हादसे के मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी
बता दें कि जिला प्रशासन ने इस दुर्घटना के कारणों की जांच के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं। जांच के बाद दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
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तीन साल से फाइलों में दबी घिंघारुकोट सड़क, मरीज आज भी कंधों पर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

Champawat News : सरकार गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने और पलायन रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन पाटी विकासखंड के सुदूरवर्ती घिंघारुकोट तोक की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। घिंघारुकोट तोक में मरीज को डोली से अस्पताल पहुंचने का मामला सामने आया है।
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तीन साल से फाइलों में दबी घिंघारुकोट सड़क
चंपावत जिले के घिंघारुकोट तोक में साल 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गांव को चार किलोमीटर मोटर मार्ग से जोड़ने की घोषणा की थी। घोषणा के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी थी कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होगा, लेकिन करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका। नतीजा ये है कि आज भी घिंघारुकोट के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं और दुर्गम पैदल रास्तों पर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
मरीज को डोली से पहुंचाया गया अस्पताल
गांव तक कोई मोटर मार्ग नहीं होने से बीमार मरीजों को आज भी डोली या परिजनों के कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को रोजाना उबड़-खाबड़ और जोखिम भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब फिसलन और भूस्खलन के खतरे के बीच ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करते हैं।

कई बार मांग के बाद भी मिला केवल आश्वासन
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। जिससे योजना फाइलों तक ही सीमित होकर रह गई है।
गांव के बुजुर्गों का दर्द सबसे अधिक झकझोरने वाला है। उनका कहना है कि पूरी जिंदगी सड़क का इंतजार करते-करते बीत गई। अब उनकी अंतिम इच्छा सिर्फ इतनी है कि गांव तक सड़क पहुंच जाए, ताकि कम से कम अंतिम यात्रा सम्मान के साथ सड़क मार्ग से हो सके।
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