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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा के विभिन्न बूथों पर जाकर मतदान का लिया जायजा, कार्यकर्ताओं से भेंट कर बढाया हौसला।

खटीमा – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज शुक्रवार लोकतंत्र के महापर्व के दौरान खटीमा में विभिन्न बूथों पर जाकर वहां पर मतदान का जायजा लिया।

इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से भेंट कर उनका हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि खटीमा के साथ ही मतदान को लेकर पूरे प्रदेश में लोगों के बीच जबरदस्त उत्साह है और निश्चित तौर पर देश में एक सक्षम व सशक्त सरकार बनने जा रही है।
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सांसद निधि में माननीयों ने किया बड़ा खेल, उत्तराखंड का पैसा UP में बांट दिया, RTI में हुआ बड़ा खुलासा

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड के सांसदों का गजब खेल, सांसद निधि को दूसरे राज्यों में बांट दिया
Uttarakhand Politics : उत्तराखंड की राजनीति से ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने जनता को हैरान कर दिया है। उत्तराखंड के माननीयों यानी कि सांसदों ने सांसद नीधि का पैसा उत्तराखंड में लगाने की जगह उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बांट दिया। सांसद निधि के इस गड़बड़झाले का खुलासा आरटीआई में हुआ है।
सांसद निधि में माननीयों ने किया बड़ा खेल
Uttarakhand में आए दिन घोटाले सामने आते रहते हैं। कभी अधिकारियों के घोटाले तो कभी मंत्रियों के घोटाले की खबरें सामने आती हैं। अब एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों से घोटाले की खबर सामने आ रही है। जहां प्रदेश के विकास के लिए मिलने वाली सांसद निधि को उत्तराखंड के सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बांट दिया।
Uttarakhand का पैसा UP में बांट दिया
उत्तराखंड के कई गांव जहां आज भी पानी, सड़क और स्वास्थ्य समेत कई बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। वहीं राज्य के सांसद अपनी निधि का एक बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में खर्च कर रहे हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) में इसका खुलासा हुआ है।
आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में ट्यूबवेल लगवाने, स्कूल व सामुदायिक भवन निर्माण और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए 1.28 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। ये हाल तब हैं जब उत्तराखंड में आए दिन सड़क और पानी के लिए लोग आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

UP में सांसद निधि बांटने वाला सांसद कौन ?
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सूचना के अधिकार (आरटीआई) में से सामने आई जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के विकास के लिए मिली सासंद निधि दूसरे राज्यों में बांटने वाले सांसदों में टिहरी से लोकसभा सासंद माला राज्य लक्ष्मी शाह पहले नंबर पर हैं। जिन्होंने दूसरे राज्यों में पांच या दस लाख नहीं बल्कि एक करोड़ की धनराशि दी है। ये धनराशि उत्तर प्रदेश राज्य के एक जिले आगरा को ही दी गई है। जो कि विकास कार्यों के लिए दी गई है।
लोकसभा सासंदों ने अपनी निधि से दूसरे राज्यों में पैसा बांटा तो भला राज्यसभा सांसद क्यों पीछे रहते। राज्यसभा सासंद नरेश बंसल ने अपनी सासंद निधि का पैसा हरियाणा में बांट दिया। उन्होंने सांसद निधि से हरियाणा को शिक्षा और सामाजिक कार्यों के लिए 25 लाख की धनराशि दी है। पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल (2010-16) के दौरान स्वीकृत धनराशि 10 दिसंबर 2025 को आवंटित की गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जल निकासी, सड़कों आदि के लिए तीन लाख रुपये स्वीकृत किए थे।

अपनी लोकसभा से बाहर जाकर इस सांसद ने बांटी सांसद निधि
ये बात तो थी Uttarakhand के सांसदों द्वारा दूसरे राज्यों में पैसा बांटने की। लेकिन एक सांसद तो ऐसे भी हैं जिन्होंने दूसरे राज्य में तो पैसे नहीं दिए पर अपने संसदीय क्षेत्र को छोड़कर दूसरी लोकसभा में विकास कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी।
अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा ने अपने संसदीय क्षेत्र की सीमाओं से बाहर जाकर नैनीताल जिले के लिए धनराशि को स्वीकृति दी है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक सांसद अजय टम्टा ने नैनीताल के स्कूलों में हॉल और कमरों के निर्माण के लिए 5 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं।

सांसद कहीं भी खर्च कर सकता है अपनी निधि – बीजेपी
भाजपा प्रवक्ता नवीन ठाकुर का इस पूरे मामले को लेकर कहना है कि अब देश में या नियम आ चुका है। जिसके तहत सांसद देश के किसी भी राज्य में सांसद निधि खर्च कर सकते हैं। क्योंकि देश के कई राज्यों में उत्तराखंड के निवासी रहते हैं। वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।
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मुख्यमंत्री धामी का दिल्ली दौरा, क्या सरकार में होने जा रहा कोई बड़ा फेरबदल ?, अटकलों का बाजार गर्म

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में फिर गरमाया चर्चाओं का बाजार, होने जा रहा है सरकार में बड़ा बदलाव !
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Uttarakhand Politics : उत्तराखंड की राजनीति में सत्ता पर काबिज भाजपा सरकार में कई बार बड़े बदलाव की सुगबुगाहट होती रहती है। फिर चाहे वो कैबिनेट में खाली पड़ी पांच सीटों को भरना हो या कुछ मंत्रियों के पर कतरना हो।
ये सभी सवाल सत्ता, विपक्ष और जनता के बीच इसलिए चर्चा का विषय बन जाते है क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बीते कुछ समय से हर माह दिल्ली दरबार में अपनी हाजरी लगाते हैं। उनके दिल्ली दौरे पर इन बातों को और अधिक बल मिल जाता है।
मुख्यमंत्री धामी के दिल्ली दौरे से चर्चाओं के बाजार गर्म
आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी फिर एक बार दिल्ली दौरे पर जा रहे हैं तो फिर से कयासबाजी शुरू हो गई है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए नितिन नबीन का आधिकारिक राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर चुनाव होना है जिसकी आधिकारिक घोषणा 20 जनवरी को हो जाएगी।

इसके साथ ही जिस तरह भाजपा संगठन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पर युवा नेतृत्व को तरजीह दी है ऐसे में कहा जा रहा है कि संगठन उत्तराखंड में भी कुछ बड़े बदलाव कर सकता है। इसे लेकर लंबे समय से चर्चाएं भी हो रही हैं।
क्या सरकार में होने जा रहा कोई बड़ा फेरबदल ?
कयासों का बाजार इसलिए भी गर्म है क्योंकि साल 2027 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार और संगठन नहीं चाहता है कि आमजनता के बीच गलत छवि जाए। सत्ता पक्ष के भीतर भी ये बातें गाहे-बगाहे चल रही हैं कि कुछ नेताओं के विवादित या पार्टी विरोधी बयान देने से पार्टी असहज हो रही है।

अंकिता भंडारी मामले के बाद विपक्ष लगातार हमलावर
वहीं दूसरी तरफ राज्य में दिवंगत अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले ने जहां विपक्ष को मुद्दा दिया तो वहीं भाजपा सरकार को कटघरे में भी खड़ा किया। हालांकि मुख्यमंत्री धामी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर सीबीआई को ये मामला ट्रांसफर कर दिया है, लेकिन विपक्ष अभी भी सरकार पर लगातार हमलावर है।

अंकिता भंडारी मामले में उर्मिला सनावर ने सरकार को पूरी तरह असहज करने का काम किया। जहां उन्होंने भाजपा के बड़े नेताओं पर बड़े गंभीर आरोप भी लगाए। इसके बाद से ही उत्तराखंड की राजनीति (Uttarakhand Politics) में चर्चाओं के बाजार गर्म हैं। बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मामले में डैमेज कंट्रोल करने की भी पूरी कोशिश की लेकिन ये काम करता हुआ नजर नहीं आया। इस मुद्दे को लेकर अब भी लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है।
भाजपा संगठन, सरकार और मंत्रिमंडल में हो सकता है बदलाव
चूंकि अब भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा होनी बाकी रह गई है। ऐसे में सरकार के कई मंत्री, विधायक दिल्ली दरबार में हाजरी लगाते हुए देखे जा सकते हैं। जिसके बाद कई तरह की अफवाहें तैर रही हैं। विशेष सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन, सरकार और मंत्रिमंडल में आगामी कुछ दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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अंकिता भंडारी मामले में कांग्रेस फैला रही भ्रम, बीजेपी ने विरोध में सभी 304 मंडलों में एक साथ किया प्रदर्शन

Ankita Bhandari case : अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम और तथ्यहीन आरोपों के विरोध में भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा ने उत्तराखंड प्रदेश के सभी 304 मंडलों में एक साथ सशक्त विरोध प्रदर्शन किया।
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Ankita Bhandari case में कांग्रेस फैला रही है भ्रम
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि चौहान भट्ट ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक जघन्य और संवेदनशील अपराध पर भी कांग्रेस केवल सियासी रोटियां सेकने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास न तो प्रदेश के विकास का कोई विज़न है और न ही जनहित से जुड़ा कोई ठोस एजेंडा, इसी कारण वो जनता को गुमराह करने की राजनीति कर रही है।
चुनाव नजदीक आ रहे हैं इसलिए कांग्रेस को याद आ रहा न्याय
रुचि चौहान भट्ट ने कहा कि साढ़े तीन वर्षों तक चुप रहने के बाद अब, जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस मामले को दोबारा उछाल रही है। ये कांग्रेस की हताशा और दिशाहीन राजनीति को उजागर करता है।

एसआईटी जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पहले ही ये साफ किया जा चुका है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में किसी भी प्रकार की ‘वीआईपी’ संलिप्तता नहीं थी। उत्तराखंड की धामी सरकार ने संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए घटना के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा, एसआईटी का गठन किया और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की।
मुद्दे को चुनावी हथियार बनाना केवल एक राजनीतिक स्टंट
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि 500 पन्नों की चार्जशीट और 100 से अधिक गवाहों के बयान के आधार पर दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई गई। साथ ही सरकार द्वारा पीड़ित परिवार की हर स्तर पर मदद के साथ पीड़ित परिवार की मांग पर तीन बार सरकारी वकील बदले गए, सशक्त पैरवी हुई और इसी का परिणाम है कि आरोपियों को जमानत तक नहीं मिल सकी।

आज प्रदेश के 304 मंडलों में महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर कांग्रेस के झूठे और भ्रामक आरोपों की पोल खोली। भाजपा महिला मोर्चा का कहना है कि जब न्यायालय द्वारा दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है, तब भी कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाना केवल एक राजनीतिक स्टंट है।
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