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इस दिवाली मां लक्ष्मी बरसाएंगी विशेष कृपा! 30 साल बाद बन रहा ये शुभ संयोग

Diwali 2026 : दीपावली का पर्व इस वर्ष खास ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार दीपावली पर धन लक्ष्मी योग और अनफा योग का संयोग बन रहा है। मान्यता है कि लगभग 30 वर्षों बाद ये दोनों योग एक साथ बन रहे हैं। इस विशेष संयोग को धन, सुख-समृद्धि और व्यापार में तरक्की की कामना के लिहाज से शुभ माना जा रहा है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, दीपावली हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन अमावस्या तिथि के साथ प्रदोष काल का संयोग भी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में प्रदोष काल के अलावा निशीथ काल और महानिशीथ काल में पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इन शुभ समयों का एक ही तिथि पर मिलना दीपावली के पूजन को और महत्वपूर्ण बनाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में वृषभ जैसे स्थिर लग्न के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसी वजह से दीपावली पर गृहस्थों के साथ व्यापारियों के लिए भी लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व रहता है।
व्यापारियों के लिए कुंभ लग्न में पूजा का शुभ समय
दीपावली पर घरों के साथ दुकानों, प्रतिष्ठानों, कार्यालयों और कारखानों में भी गणेश-लक्ष्मी पूजन की परंपरा है। व्यापारिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए कुंभ लग्न में पूजा का समय दोपहर 1:27 बजे से 2:54 बजे तक बताया गया है।
इस अवधि में व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में बही-खातों और तिजोरी की पूजा कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान पूजा-अर्चना कर व्यापारी नए वित्तीय वर्ष में सुख-समृद्धि और कारोबार में उन्नति की कामना करते हैं।
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धनतेरस पर घर ले आएं ये एक ये चीजें, दूर हो सकती हैं जीवन की परेशानियां

हिंदू धर्म में धनतेरस का पर्व बेहद शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने के साथ ही सोना, चांदी और नई वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर कुछ विशेष चीजें घर लाना भी शुभ माना जाता है। इन्हीं में शमी के पौधे और उससे जुड़ी चीजों का विशेष महत्व बताया गया है।धार्मिक मान्यता है कि शमी का पौधा भगवान शिव और शनिदेव से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार, घर में शमी का पौधा लगाने से सुख-समृद्धि और सकारात्मकता आती है। साथ ही इसकी नियमित पूजा करने से परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।धनतेरस के दिन शमी का पौधा घर लाना शुभ माना जाता है। हालांकि, इसे घर में लगाते समय सही दिशा और साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी के पौधे की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।ध्यान रखें कि ये सभी बातें धार्मिक आस्थाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
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धनतेरस से पहले सोना-चांदी हुआ महंगा, खरीददारी से पहले जान लें नए रेट

Gold-Silver Price : और दिवाली के मौके पर सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को महंगाई का झटका लगा है। बीते कुछ दिनों तक कीमतों में नरमी रहने के बाद अब दोनों कीमती धातुओं के भाव में तेजी लौट आई है।
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धनतेरस से पहले सोना-चांदी हुआ महंगा
धरतेरस 2026 से पहले महज दो दिनों के भीतर चांदी की कीमत में 14,400 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है, जबकि सोना भी 7,770 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया है। अचानक आई इस तेजी से त्योहारों पर गहने खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों का बजट प्रभावित हो सकता है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 3 नवंबर को सोने का भाव 1,38,000 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 5 नवंबर तक इसकी कीमत बढ़कर 1,45,770 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। इस तरह दो दिनों में सोने के दाम में 7,770 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल
चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला। 3 नवंबर को एक किलो चांदी 1,76,000 रुपये में मिल रही थी, जबकि 5 नवंबर को इसका भाव बढ़कर 1,90,400 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। यानी महज 48 घंटों में चांदी 14,400 रुपये महंगी हो गई। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव भी लगभग 4,140 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है।
सोने-चांदी की कीमतों में तेजी की क्या है वजह?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी को सोने की कीमतों में तेजी की एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत के बाद डॉलर पर दबाव देखने को मिला। डॉलर कमजोर होने से वैश्विक बाजार में सोने की मांग को समर्थन मिला और कीमतों में बढ़ोतरी हुई।

इसके अलावा ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने भी वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित किया है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के बीच महंगाई और आर्थिक अनिश्चितताओं को लेकर निवेशकों की रणनीति में बदलाव आया है। इसका असर कीमती धातुओं के बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव
देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने की सांकेतिक कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | 24 कैरेट (10 ग्राम) | 22 कैरेट (10 ग्राम) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹1,42,960 | ₹1,31,060 |
| मुंबई | ₹1,42,810 | ₹1,30,910 |
| चेन्नई | ₹1,42,920 | ₹1,31,010 |
| कोलकाता | ₹1,42,810 | ₹1,30,910 |
| बेंगलुरु | ₹1,42,810 | ₹1,30,910 |
| हैदराबाद | ₹1,42,810 | ₹1,30,910 |
धनतेरस पर सोना खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस पर सोने और चांदी की खरीदारी को शुभ माना जाता है। यही वजह है कि त्योहार के दौरान बाजार में खरीदारों की संख्या बढ़ जाती है। हालांकि, कीमतों में अचानक आई तेजी से खरीदारी का खर्च बढ़ सकता है।
खरीदारों को ध्यान रखना चाहिए कि बाजार में बताए जाने वाले सोने के भाव सांकेतिक होते हैं और अलग-अलग शहरों में इनमें अंतर हो सकता है। इसके अलावा गहने खरीदने पर मेकिंग चार्ज, 3 फीसदी GST और अन्य लागू शुल्क भी चुकाने होते हैं। ऐसे में खरीदारी करने से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा भाव और कुल कीमत की जानकारी जरूर लें।
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Diwali 2026: इस बार दिवाली पर बन रहा खास संयोग, जानें कब होगी लक्ष्मी पूजा

Diwali 2026 : दिवाली का पांच दिवसीय महापर्व धनतेरस के साथ शुरू होता है और भाई दूज के साथ इसका समापन होता है। इस दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। इन सभी पर्वों का अपना धार्मिक और पौराणिक महत्व है। इस बार पंचांग के अनुसार कुछ तिथियों को लेकर विशेष स्थिति बन रही है। आइए जानते हैं धनतेरस से लेकर भाई दूज तक सभी त्योहारों की तारीख और उनका महत्व।
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धनतेरस कब है? (Dhanteras 2026 Date)
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे। धनतेरस पर प्रदोष काल में दीपदान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सोना, चांदी और नए बर्तनों की खरीदारी को भी शुभ मानते हैं।
छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी (Choti Diwali 2026 Date)
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के चलते छोटी दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। वहीं, 7 नवंबर को हनुमान जयंती का पर्व पड़ रहा है।
पंडित राकेश झा के अनुसार, छोटी दिवाली के दिन घरों में पांच या सात दीपक जलाने की परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर उसकी कैद में बंद 16 हजार कन्याओं और अन्य लोगों को मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।

दिवाली कब मनाई जाएगी? (Diwali 2026 Date)
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस बार तिथियों के संयोग के कारण छोटी दिवाली और मुख्य दीपावली दोनों 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएंगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद माता सीता, लक्ष्मण और अपने अन्य साथियों के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए थे। तभी से दीपावली को प्रकाश और खुशियों के पर्व के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन घरों में दीप जलाए जाते हैं और भगवान गणेश तथा माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

गोवर्धन पूजा कब है? (Govardhan Puja 2026 Date)
दिवाली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होती है। इस वर्ष यह पर्व 10 नवंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और उनके पशुओं को भगवान इंद्र के प्रकोप से बचाया था। इस दिन गोवर्धन महाराज की पूजा की जाती है और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही कई स्थानों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी की जाती है।

भाई दूज कब है? (Bhai Dooj 2026 Date)
पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का समापन भाई दूज के साथ होता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। इस बार भाई दूज 11 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने पहुंचे थे। यमुना ने उनका तिलक कर स्वागत किया और उन्हें स्वादिष्ट पकवान खिलाए। तभी से भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं।













































