Dehradun
वर्ल्ड कांग्रेस ऑन डिजास्टर मैनेजमेंट के समापन पर राज्यपाल ने किया प्रतिभाग, तकनीकी और वैज्ञानिक नवाचार के साथ आगे बढ़ रहा भारत।

देहरादून – राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शुक्रवार को ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, देहरादून में छठवें वर्ल्ड कांग्रेस ऑन डिजास्टर मैनेजमेंट के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि जिस दिन यह सम्मेलन प्रारंभ हुआ था उसी दिन हमने हमारी एक बड़ी चुनौती से जीत हासिल की, 17 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार 28 नवंबर को हमने सिलक्यारा टनल में फंसे हुए अपने बहादुर साथियों को सकुशल बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा जो पिछले 4 दिनों तक चिंतन और मंथन किया गया है, उससे निकलने वाले अमृत से समस्त मानवता का भला होगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मान की बात है कि 70 देशों के प्रतिनिधियों द्वारा देवभूमि उत्तराखण्ड में इस प्रकार के वैश्विक सम्मेलन में प्रतिभाग किया गया है।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की भोगौलिक परिस्थितियां विषम हैं, और हमारे राज्य ने निरंतर आपदाओं का दंश झेला है, 1991 में उत्तरकाशी में आए भूकम्प की बात हो या 2013 में केदारनाथ की विनाशकारी बाढ़ की, इन अवसरों पर राज्य को बड़ी संख्या में क्षति पहुंची है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से हिमालयी क्षेत्र में आपदा प्रबंधन करने में सहायता प्राप्त होगी।

उन्होंने कहा कि 2015 में विश्व द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क अपनाया गया जो अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की क्षमता का उदाहरण है। यह स्वैच्छिक, गैर-बाध्यकारी समझौता 2030 तक प्राप्त किए जाने वाले सात वैश्विक लक्ष्यों की रूपरेखा तैयार करता है, जिसमें आपदा जोखिम में कमी, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के अंतर्संबंध पर जोर दिया गया है।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड में हमारे राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में एवं आपदा की स्थिति में राहत कार्यों के सफल संचालन और रोकथाम के लिए सभी चार सेंडाई फ्रेमवर्क सिद्धांतों को शामिल किया है।
उन्होंने कहा कि तकनीकी और वैज्ञानिक नवाचार के साथ, भारत महत्वपूर्ण आर्थिक विकास के मार्ग पर प्रगतिशील है, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन और ऐसी पहल हैं जिनसे देश के विकास को और गति मिल रही है, साथ ही हमारे सामने यह अवसर भी है कि हम विभिन्न क्षेत्रों में विकास पहलों की योजना बनाने, और डिजाइन बनाते समय ही आपदाओं के जोखिमों को कम करने की प्रक्रियाओं को भी साथ में लेकर चलें।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा देहरादून डिक्लेरेशन का विमोचन भी किया गया, जिसमें इस सम्मेलन में विगत 4 दिनों तक विभिन्न विशेषज्ञों के मध्य हुए विचार-विमर्श के आधार पर 20 मुख्य एवं 5 कार्यवाही योग्य बिंदुओं को सम्मिलित किया गया है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, अंडमान एवं निकोबार के उपराज्यपाल एडमिरल डी के जोशी, सचिव आपदा प्रबंधन डा. रंजीत सिन्हा, डा. दुर्गेश पंत, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के चेयरमैन प्रो. कमल घनशाला कार्यक्रम के संयोजक मंडल के पदाधिकारी एवं 51 देशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ वर्चुअल माध्यम से कुल 70 देशों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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नहीं रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

Hira Singh Bisht : उत्तराखंड की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और राजनीतिक जगत में शोक की लहर फैल गई।
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नहीं रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट
कांग्रेस के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट का देर रात निधन हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक हीरा सिंह बिष्ट पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। देर रात करीब डेढ़ बजे उन्हें अचानक सीने में दर्द की शिकायत हुई। इसके बाद परिजन उन्हें देहरादून के ईस्ट कैनाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके और उन्होंने अंतिम सांस ली।
राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक जीवन लंबे अनुभव और जनसेवा के लिए जाना जाता है। उन्होंने श्रमिकों, गरीबों और मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। उनके सरल स्वभाव और जनसंपर्क के कारण उन्हें जनता के बीच एक लोकप्रिय नेता माना जाता था।

एन.डी. तिवारी सरकार में रहे थे कैबिनेट मंत्री
अपने राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने उत्तराखंड की तत्कालीन एन.डी. तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारियां निभाईं। परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों का संचालन करते हुए उन्होंने कई प्रशासनिक और जनहित से जुड़े कार्य किए।
उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और समर्थकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 11 IAS-IFS अधिकारियों की जिम्मेदारियों में हुआ बदलाव

IAS-IFS Transfers : उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार देर शाम प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 11 आईएएस और आईएफएस अधिकारियों के विभागों में फेरबदल किया है। इस संबंध में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी किए गए हैं। इस फेरबदल में कई वरिष्ठ अधिकारियों के विभागों की जिम्मेदारियों में परिवर्तन किया गया है।
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उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
देर रात जारी हुए आदेशों के मुताबिक प्रमुख सचिव एल. फैनई से आबकारी विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया है, जबकि उनके अन्य सभी विभाग पूर्ववत बनाए रखे गए हैं।
सचिव नितेश कुमार झा से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग की जिम्मेदारी हटाकर उन्हें पंचायती राज विभाग का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।

11 IAS-IFS अधिकारियों की जिम्मेदारियों में हुआ बदलाव
सचिव रविनाथ रमन के कार्यभार में भी बदलाव किया गया है। उनसे विद्यालयी शिक्षा विभाग हटाते हुए परिवहन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही उन्हें परिवहन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

सरकार ने सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय को उनके मौजूदा विभागों के साथ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग का अतिरिक्त दायित्व सौंपा है। इसके अलावा सचिव बृजेश कुमार संत से परिवहन विभाग वापस लेकर उन्हें आबकारी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
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उत्तराखंड पुलिस की वर्दी में जंतर-मंतर पहुंचा सस्पेंड कांस्टेबल, बयान से मची सनसनी

Uttarakhand News : दिल्ली में चल रहे CJP के आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस के लंबे समय से निलंबित चल रहे सिपाही शेर सिंह द्वारा मंच से तथाकथित “इस्तीफा” देने का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटनाक्रम के बाद ये प्रश्न उठ रहे हैं कि जो व्यक्ति पिछले एक वर्ष से अधिक समय से निलंबित है और सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं है, उसके द्वारा दिया गया यह तथाकथित इस्तीफा आखिर किस पद से है तथा इसका वास्तविक औचित्य क्या है।
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उत्तराखंड पुलिस की वर्दी में जंतर-मंतर पहुंचा सस्पेंड कांस्टेबल
मिली जानकारी के मुताबिक शेर सिंह वर्ष 2025 से एक गंभीर आपराधिक प्रकरण में नामजद होने के बाद उत्तराखंड पुलिस से निलंबित चल रहा है। उसके विरुद्ध थाना गंगनहर, जनपद हरिद्वार में मु०अ०सं० 415/2025 के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 111(2)(बी), 351(2) एवं 352 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था।
आपराधियों का साथ देने के हैं आरोप
जांच में ये तथ्य सामने आए कि हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र के कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि, जिसके विरुद्ध हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, अवैध वसूली और भूमि पर अवैध कब्जे सहित अनेक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और जो वर्तमान में जेल में निरुद्ध है, द्वारा संचालित आपराधिक गिरोह में शेर सिंह की भी सक्रिय भूमिका पाई गई।
आरोप है कि शेर सिंह ने मनीष बॉलर, हसन अब्बास जैदी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर स्थानीय लोगों को डराकर उनकी भूमि पर अवैध कब्जा करने व उससे आर्थिक लाभ अर्जित करने में सहयोग किया।

भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे फर्जी तरीके से बेचा
जांच के अनुसार, रुड़की निवासी एक विधवा महिला और उसके परिवार को गैंग द्वारा लगातार धमकाया गया। आरोप है कि पीड़िता के भाई और देवर पर पहले गैंग द्वारा गोलीबारी की गई। जिसके बाद भयवश पीड़िता अपने बच्चों सहित अन्य स्थान पर रहने चली गई। इसी दौरान उसकी भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे फर्जी तरीके से बेच दिया गया।
प्रकरण में ये भी सामने आया कि उस समय उत्तराखंड पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात शेर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कुख्यात अपराधी प्रवीण वाल्मीकि से सितारगंज जेल एवं रुड़की न्यायालय में कई बार मुलाकात की, पीड़िता और उसके परिवार को मुकदमा वापस लेने के लिए धमकाने का प्रयास किया। आरोप है कि न्यायालय में पेशी के दौरान भी पीड़िता को अपराधी के सामने ले जाकर डराया-धमकाया गया तथा गैंग के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर विवादित भूमि के अवैध सौदे से लाभ अर्जित किया गया।
15 सितंबर 2025 को गिरफ्तारी के बाद किया गया था सस्पेंड
प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के उपरांत शेर सिंह को दिनांक 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। बाद में उसे 7 नवंबर 2025 को माननीय उच्च न्यायालय, नैनीताल से जमानत प्राप्त हुई। गिरफ्तारी के उपरांत विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था और वह तब से सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं है।
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