Uttarakhand
मासूम की मौत से खुली प्रशासन की नींद, कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश

Haldwani News: मासूम की मौत के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में
मुख्य बिंदु
Haldwani News: उत्तराखडं में जब तक कोई बड़ी घटना दस्तक नहीं दे देती तब तक प्रसाशन का सोए रहना पुरानी परंपरा है। लेकिन जैसे ही कोई बड़ी घटना/दुर्घटना सामने आती है तो सम्बंधित विभाग तुरंत नींद से जागकर काम करने लगता है। ताजा मामला हल्द्वानी से सामने आया है। जहाँ पर सोमवार को सड़क पर गड्डों के चलते एक मासूम की मौत हो गई। इसके बाद कुमाऊँ कमिश्नर दीपक रावत एक्शन मोड में दिखे।
Haldwani accident : क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, सोमवार 5 जनवरी को शहर के जगदम्बा मंदिर क्षेत्र में बाइक सवार एक नाबलिग अपने भाई के साथ बाइक पर सिलेंडर लाड कर घर ले जा रहा था। तभी अचानक सड़क पर गड्ढे बचाने के चक्कर में चालक ललित ने बाइक मोड़ने का प्रयास किया। इतने में बाइक बेकाबू हो गई जिससे पीछे बैठा 13 वर्षीय अर्जुन बाइक से अलग हो कर सड़क पर गिर गया। जिसके बाद पीछे से आ रहे मिक्सर ट्रक ने उसे रौंद दिया जिसमें नाबलिग की मौत हो गई। घटना के बाद से लोगों में आक्रोश नजर आ रहा है।
नाबालिग की मौत के बाद खुली प्रसाशन की नींद
सोमवार को इस दर्दनाक घटना के बाद परिजनों में आक्रोश नजर आया। जिसके बाद मंगलवार को Kumaon Commissioner Deepak Rawat फुल एक्शन मोड में नजर आए। दीपक रावत ने टीम के साथ घटना स्थल का निरिक्षण किया। साथ ही यूयूएसडीए (Uttarakhand Urban Sector Development Agency) और एडीबी (Asian Development Bank) द्वारा चल रहे सीवर, पेयजल और सड़क निर्माण कार्यों की मौके पर जाकर हकीकत देखी।
कुमाऊं कमिश्नर ने घटना स्थल का किया निरीक्षण
इसके आलावा Kumaon Commissioner Deepak Rawat ने शहर की सड़कों की खराब स्थिति और अधूरे पड़े कार्यों को देखकर अपनी नाराजगी जाहिर की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि अगर निर्धारित समय सीमा के अंदर कार्य पूरा नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने Asian Development Bank के प्रोजेक्ट मैनेजर को तत्काल निर्देश दिए कि जिन मार्गों पर खुदाई हुई है, उन्हें तुरंत बहाल किया जाए ताकि जनता को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।
साइन बोर्ड की कमी पर अधिकारियों को फटकार
निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने ये भी देखा कि कई स्थानों पर कोई भी साइन बोर्ड नहीं लगाया गया था। इस पर उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में जहां भी कोई निर्माण कार्य होगा, वहां साइन बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बोर्ड पर कार्य प्रारंभ और समाप्ति की तिथि के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारी का मोबाइल नंबर भी दर्ज होना चाहिए। ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सके।
लापरवाह ठेकेदारों पर पेनल्टी का निर्देश
कुमाऊं मंडल आयुक्त दीपक रावत ने इस लापरवाही पर एडीबी प्रोजेक्ट मैनेजर को निर्देश दिए कि संबंधित ठेकेदारों पर नियमों के तहत पेनल्टी लगाई जाए। उन्होंने ये भी साफ कर दिया कि अब अधिकारी बैठकों के लिए कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेंगे। बल्कि उन क्षेत्रों का दौरा करेंगे, जहां कार्य अधूरा पड़ा है। इस कदम का मकसद ठेकेदारों में अनुशासन लाना और कार्य समय पर पूरा करवाना है।
अमरावती मुख्य मार्ग से अतिक्रमण हटाने का निर्देश
अमरावती मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे लगे ठेलों और अतिक्रमण को लेकर भी कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के लिए सख्त निर्देश दिए। दीपक रावत ने कहा कि अतिक्रमण हटाने से यातायात बाधित नहीं होगा और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। इसके साथ ही उन्होंने सड़क हादसे में मृतक किशोर के परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। कुमाऊं कमिश्नर ने आश्वाशन दिया कि उन्हें हर संभव मदद और सहायता दी जाएगी।
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Rudraprayag
तुंगनाथ-चोपता जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट, प्लास्टिक ले जाने पर लगेगी रोक

Rudraprayag News : उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल तुंगनाथ और चोपता की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने के लिए वन विभाग ने स्वच्छता अभियान तेज करने का फैसला लिया है।
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तुंगनाथ-चोपता जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की ओर से क्षेत्र में 100 स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के प्लास्टिक लेकर आने पर रोक लगाने की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।
अभियान के तहत अब तक क्षेत्र से करीब 5,000 किलोग्राम कचरा एकत्र किया जा चुका है। इस मुहिम में स्थानीय लोगों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

प्लास्टिक ले जाने पर लगेगी रोक
समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चोपता क्षेत्र भी पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के साथ यहां कचरे की समस्या भी बढ़ी है, जिससे प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने की चुनौती सामने आई है।
नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं सफाई अभियान
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन के मुताबिक, तुंगनाथ और चोपता में नियमित रूप से सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं और रैलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है।
वन विभाग की योजना है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे श्रद्धालु और पर्यटक अपने साथ प्लास्टिक लेकर क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें। इस पहल का उद्देश्य तुंगनाथ और चोपता को कचरे से मुक्त रखना, पर्यावरण की रक्षा करना और इस खूबसूरत क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाए रखना है।
Ramnagar
रामनगर में विजिलेंस की ताबड़तोड़ छापेमारी, बिजली चोरी के आरोप में 15 से 20 लोगों पर FIR

Ramnagar News : रामनगर में मंगलवार तड़के बिजली विभाग और विजिलेंस की टीम ने बिजली चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की,देहरादून, हल्द्वानी और रुद्रपुर से पहुंची टीमों ने खताड़ी, पुछड़ी और आसपास के कई मोहल्लों में एक साथ छापेमारी कर बिजली कनेक्शनों की जांच की।
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रामनगर में विजिलेंस की ताबड़तोड़ छापेमारी
रामनगर में बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए बिजली विभाग और विजिलेंस की टीम ने सुबह तड़के अभियान चलाया। इस कार्रवाई में देहरादून मुख्यालय, हल्द्वानी और रुद्रपुर से आई टीमों के साथ स्थानीय बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल रहे। विजिलेंस इंस्पेक्टर मारुत साह, सब इंस्पेक्टर संजीव त्यागी समेत अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में अलग-अलग टीमें बनाकर कई स्थानों पर बिजली कनेक्शनों की जांच की गई।
जांच में बिजली चोरी के मामले सामने आए
रामनगर के खताड़ी और पुछड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों में की गई इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संदिग्ध कनेक्शनों की जांच की। विभाग का कहना है कि जांच में बिजली चोरी के मामले सामने आए हैं। मौके पर कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों और टीम के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

हल्द्वानी के अधीक्षण अभियंता रवि कुमार राजोरा ने बताया कि बिजली चोरी की शिकायतों और लाइन लॉस वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए ये अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान के लिए पांच टीमें बनाई गई थीं, जिनमें विजिलेंस की टीमें, अभियंता और लाइन स्टाफ शामिल रहे। टीमों ने अलग-अलग मोहल्लों में पहुंचकर बिजली कनेक्शनों की जांच की।
बिजली चोरी के आरोप में 15 से 20 लोगों पर FIR
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि जांच के दौरान करीब 15 से 20 लोगों के खिलाफ बिजली चोरी के मामलों में एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद संबंधित मामलों में बिजली चोरी का आकलन किया जाएगा, इसके बाद नियमानुसार जुर्माना निर्धारित कर वसूली के लिए नोटिस जारी किए जाएंगे।
Dehradun
उत्तराखंड के नए राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन कौन हैं? MP से राजभवन तक का सफर जानिए

Dhal Singh Bisen Biography : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बरघाट क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले बिसेन लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
विधायक से लेकर कैबिनेट मंत्री और लोकसभा सांसद तक की जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब उन्हें राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। आखिर कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन, मध्य प्रदेश से उनका क्या नाता है और कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर? आइए जानते हैं।
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उत्तराखंड के नए राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन कौन हैं?
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के बरघाट विधानसभा क्षेत्र के पिपरिया में हुआ था। उनका राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश की विधानसभा से शुरू हुआ। वर्ष 1990 में वे पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 1993, 1998 और 2003 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने बरघाट सीट से जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने लगातार चार बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
मध्य प्रदेश सरकार में संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद डॉ. बिसेन को मध्य प्रदेश सरकार में भी अहम जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2003 से 2005 के बीच वे कैबिनेट मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने वन, परिवहन, स्कूल शिक्षा, खनिज और जेल जैसे विभागों का दायित्व संभाला। इसके बाद वर्ष 2011 से 2013 तक उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में काम किया।
2019 में पहुंचे लोकसभा, 2024 में कटा टिकट
राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने लोकसभा चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमाई। वर्ष 2019 के आम चुनाव में भाजपा ने उन्हें मध्य प्रदेश की बालाघाट लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। चुनाव जीतकर वे पहली बार लोकसभा पहुंचे।
बालाघाट संसदीय क्षेत्र में सिवनी जिले के कुछ हिस्से भी शामिल हैं। बरघाट विधानसभा क्षेत्र में पहले विधायक के रूप में काम करने का अनुभव उनके लिए चुनावी राजनीति में उपयोगी रहा। हालांकि, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट नहीं दिया। अब राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति ने उनके राजनीतिक सफर को एक नई दिशा दी है।

पवार समाज से आते हैं डॉ. बिसेन
डॉ. ढाल सिंह बिसेन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के पवार समाज से संबंध रखते हैं। बालाघाट क्षेत्र में पवार समाज की उल्लेखनीय उपस्थिति रही है और यहां की चुनावी राजनीति में इस समुदाय की भूमिका भी अहम मानी जाती है।
बालाघाट लोकसभा सीट से सांसद रहे बोध सिंह भगत और डॉ. ढाल सिंह बिसेन के बाद वर्तमान सांसद भारती पारधी भी पवार समाज से आती हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर बिसेन का भी बालाघाट की राजनीति में प्रमुख स्थान रहा है।
डॉक्टर और किसान भी हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन
राजनीति के अलावा डॉ. ढाल सिंह बिसेन की पहचान होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़े व्यक्ति के रूप में भी रही है। वे मूल रूप से किसान हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव, विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व तथा राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभाने के बाद अब उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल की भूमिका सौंपी गई है।
मध्य प्रदेश की क्षेत्रीय राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. ढाल सिंह बिसेन के लिए राज्यपाल पद तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया पड़ाव है। अब उत्तराखंड में संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी पर सभी की निगाहें रहेंगी।
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