Jammu & Kashmir
कटड़ा में भारी बारिश बनी काल, अर्धकुंवारी के पास भूस्खलन से 8 श्रद्धालुओं की मौत, 20 घायल

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के कटड़ा में मंगलवार को भारी बारिश के कारण माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बड़ा हादसा हो गया। अर्धकुंवारी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास दोपहर लगभग 3 बजे भूस्खलन हुआ, जिसमें अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक श्रद्धालु घायल हो गए हैं।
भूस्खलन के चलते तीन पुल भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं और यात्रियों को ले जा रही कई टीमों को बीच रास्ते में ही रोक दिया गया है। हादसे की जानकारी मिलते ही श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से आधिकारिक सूचना जारी की और राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।
राहत-बचाव कार्य जारी, NDRF और प्रशासन अलर्ट मोड में
घटना के तुरंत बाद रियासी पुलिस, प्रशासन, और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। मलबे में और लोगों के दबे होने की आशंका है, इसलिए बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
हिमकोटी ट्रेक मार्ग पहले ही बंद था, अब पुराना मार्ग भी बंद
बारिश के चलते हिमकोटी ट्रेक मार्ग को पहले से ही मंगलवार सुबह बंद कर दिया गया था। दोपहर 1:30 बजे तक पुराना मार्ग चालू था, लेकिन लगातार हो रही मूसलाधार बारिश को देखते हुए अधिकारियों ने वैष्णो देवी यात्रा को अस्थायी रूप से पूरी तरह से स्थगित कर दिया।
भूस्खलन त्रिकुटा पहाड़ी के मध्य भाग में हुआ
यह हादसा माता वैष्णो देवी मंदिर तक जाने वाले करीब 12 किलोमीटर के पैदल मार्ग के बीच हिस्से में हुआ, जो तीखी चढ़ाई और संकरे रास्तों के कारण पहले से ही संवेदनशील माना जाता है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मौसम सामान्य होने और मार्ग की मरम्मत पूरी होने तक यात्रा पर न जाएं। श्राइन बोर्ड सभी घायल यात्रियों को उचित इलाज और हरसंभव मदद मुहैया करा रहा है।
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Srinagar CRPF Bunker Accident: सीआरपीएफ का बुलेट प्रूफ वाहन दुर्घटनाग्रस्त, 7 जवान घायल

श्रीनगर में सीआरपीएफ का बंकर वाहन हादसे का शिकार
Srinagar CRPF Bunker Accident: अहमद नगर इलाके में सीआरपीएफ जवानों को ले जा रहा एक बंकर वाहन सड़क से फिसलकर नहर में गिर गया, जिससे सात जवान घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
मुख्य बिंदु
CRPF का बंकर वाहन दुर्घटनाग्रस्त, घायल अस्पताल में भर्ती
मिली जानकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ की 21वीं बटालियन का बुलेटप्रूफ वाहन रेगुलर ड्यूटी पर था। अहमद नगर क्षेत्र में पहुंचते ही चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके परिणामस्वरूप वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बह रही नहर में जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सड़क की स्थिति और वाहन की रफ्तार हादसे की वजह हो सकती है।
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स्थानीय लोगों की मदद से चलाया गया राहत बचाव अभियान
इसी बीच, हादसे को देख आसपास मौजूद स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए। उन्होंने बिना देरी किए बचाव कार्य शुरू किया और कड़ी मशक्कत के बाद वाहन में फंसे जवानों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी घायलों को इलाज के लिए शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) सौरा भेजा गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा है।
Srinagar CRPF Bunker Accident सेना और प्रशासन की टीमें कर रही घटना की जाँच
वहीं दूसरी ओर, प्रशासन ने घटना की जांच शुरू करने की बात कही है। प्रारंभिक तौर पर हादसे के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं, इसलिए तकनीकी खराबी, चालक की चूक या अन्य संभावित कारणों की जांच की जाएगी। फिलहाल सभी घायल जवानों की हालत स्थिर बताई जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
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रामबन में बादल फटा: 3 की मौत, 5 लापता; रेल सेवाएं ठप, वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन की जांच शुरू

रामबन में बादल फटा: 3 की मौत, 5 लापता; राहत-बचाव अभियान जारी
रामबन / जम्मू / कटरा: जम्मू- कश्मीर का पहाड़ी इलाका एक बार फिर प्रकृति के प्रकोप की चपेट में आ गया है। रामबन ज़िले की राजगढ़ तहसील में शनिवार तड़के अचानक बादल फटने की घटना ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि पांच अन्य लोग लापता हैं।
प्रशासन और राहत टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं, बचाव कार्य जारी है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि घटना के बाद से आसपास का इलाका बाढ़ की चपेट में है, जिससे घरों और संपत्तियों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। लोगों के घर उजड़ गए, गांव खामोश हो गए
राजगढ़ की तंग गलियों में अब सिर्फ मलबा और मायूसी पसरी है। तीन शव मलबे से निकाले जा चुके हैं, और लापता लोगों की तलाश जारी है। पीड़ितों के परिवारों को फौरी राहत देने के लिए प्रशासन जुटा है, लेकिन दुर्गम रास्ते और लगातार बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रहे हैं।
जम्मू क्षेत्र में रेल सेवाएं ठप, यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं
बादल फटने और भारी बारिश का असर रेल यातायात पर भी बुरी तरह पड़ा है। जम्मू-कटरा और उधमपुर तक रेल सेवाएं पूरी तरह बंद हैं, और अब तक 46 ट्रेनों को रद्द किया जा चुका है।
रेलवे के पीआरओ के अनुसार, कठुआ और उधमपुर के बीच ट्रैक कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे यातायात बहाल करने में समय लगेगा। कुछ ट्रेनें बीच रास्ते से शुरू या खत्म की जा रही हैं, जिससे यात्री असमंजस में हैं। इससे पहले, 29 अगस्त को भी 40 ट्रेनें रद्द की गई थीं।
वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर त्रासदी, जांच के लिए समिति गठित
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए भूस्खलन की जांच के आदेश दे दिए हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई है, जिसकी अध्यक्षता जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव करेंगे। समिति को दो हफ्ते में रिपोर्ट सौंपनी है।
गौरतलब है कि मंगलवार को त्रिकुटा पहाड़ियों पर हुए भूस्खलन में 34 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि 20 से अधिक घायल हुए थे। यह हादसा श्रद्धालुओं के लिए न केवल एक भावनात्मक आघात है, बल्कि यात्रा सुरक्षा पर भी गहरे सवाल खड़े करता है।
अभी और बरसेगा कहर?
मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश जारी रहेगी, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। राज्य प्रशासन ने जनता से अपील की है कि जरूरी न हो तो यात्रा से बचें, खासकर पहाड़ी इलाकों की ओर।
International
ऑपरेशन महादेव: पहलगाम हमले के मास्टरमाइंड समेत तीन आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के बीच सुरक्षा बलों ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। श्रीनगर के दाचीगाम वन क्षेत्र में सेना और आतंकियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में लश्कर-ए-ताइबा के तीन खूंखार आतंकियों को मार गिराया गया। इन आतंकियों में पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड सुलेमान उर्फ आसिफ भी शामिल है। बाकी दो की पहचान जिबरान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। सेना ने मौके से अमेरिका निर्मित एम4 कार्बाइन असॉल्ट राइफल और एके सीरीज की दो राइफलें भी बरामद की हैं।
कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन महादेव
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए नृशंस हमले के बाद सेना ने इलाके में आतंकियों की तलाश तेज कर दी थी। इस दौरान आतंकियों द्वारा इस्तेमाल की गई कम्युनिकेशन डिवाइस अचानक एक्टिव हुई, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को उनकी लोकेशन का सुराग मिला। इसके बाद स्पेशल फोर्सेज की 4 पैरा यूनिट और 24 राष्ट्रीय राइफल्स ने मिलकर ‘ऑपरेशन महादेव’ शुरू किया। रविवार देर रात आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि के बाद इलाके की घेराबंदी सख्त की गई। खुद को घिरा देख आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी और भीषण मुठभेड़ में तीनों आतंकी ढेर हो गए।
क्यों रखा गया नाम ‘ऑपरेशन महादेव’
यह अभियान श्रीनगर के पास महादेव चोटी क्षेत्र में चलाया गया, जो जबरवान रेंज का हिस्सा है और धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है। इसी वजह से सेना ने इस ऑपरेशन को ‘महादेव’ नाम दिया।
पहलगाम हमला: दर्द और बदले की कहानी
22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में आतंकियों ने 26 लोगों को सिर्फ धर्म पूछकर मौत के घाट उतार दिया था। इसी हमले में जान गंवाने वाले लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता राजेश नरवाल ने कहा, “मैं सेना के जांबाजों को सलाम करता हूं। मुझे पहले से भरोसा था कि सेना एक दिन इन आतंकियों को जरूर मार गिराएगी।”
पहले भी हो चुकी है मुठभेड़
दाचीगाम के इसी इलाके में पिछले साल 10 नवंबर को भी आतंकियों से मुठभेड़ हुई थी, जिसमें आतंकी भाग निकले थे। बाद में 3 दिसंबर को लश्कर का आतंकी जुनैद भट इसी क्षेत्र में मार गिराया गया था, जो गांदरबल में हुए हमले में शामिल था।
सेना की सतर्कता और रणनीति से मिली सफलता
एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आतंकियों की सूचना और कम्युनिकेशन डिवाइस की लोकेशन से मिले सुराग के आधार पर सेना ने लगातार इलाके पर नजर रखी। आखिरकार सोमवार सुबह लिदवास क्षेत्र में आतंकियों की मूवमेंट देखते ही सेना ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।
पुलिस का बयान
कश्मीर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक वीके बिरदी ने कहा कि मारे गए आतंकियों की औपचारिक पहचान की प्रक्रिया जारी है। शवों को घने जंगल से नीचे लाने में वक्त लगेगा। यह ऑपरेशन एक बार फिर साबित करता है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियां किसी भी कीमत पर आतंक के नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगी। ‘ऑपरेशन महादेव’ ने पहलगाम हमले का दर्द झेल रही देश की जनता को थोड़ी राहत जरूर दी है।
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