Uttarakhand
एक मंदिर, दो राज्य ! जानिए शक्तिपीठ, आस्था और इतिहास का दिव्य संगम…

Naina Devi Mandir: नैनिताल और हिमाचल मे शक्तिपीठ, आस्था और इतिहास का दिव्य संगम
भारत में कुछ धार्मिक स्थल ऐसे हैं जो केवल एक जगह तक सीमित नहीं रहते, बल्कि आस्था के अलग-अलग रूपों में पूरे देश में पूजे जाते हैं। Naina Devi Mandir ऐसा ही एक नाम है, जो उत्तराखंड के नैनीताल और हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर दोनों स्थानों पर शक्ति, विश्वास और पौराणिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।
इन दोनों ही स्थानों पर स्थित नैना देवी मंदिर, माता सती के नयनों से जुड़ी मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
यह लेख न केवल धार्मिक जानकारी देता है, बल्कि इतिहास, मान्यताओं, यात्रा मार्ग और आध्यात्मिक अनुभव को भी सरल और मानवीय भाषा में प्रस्तुत करता है।
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Naina Devi Mandir का पौराणिक महत्व
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती के आत्मोत्सर्ग के बाद भगवान शिव उन्हें लेकर तांडव करने लगे। ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंगों को अलग किया।
जहां माता के नयन (आंखें) गिरीं, वही स्थान नैना देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
यही कारण है कि उत्तराखंड और हिमाचल, दोनों ही स्थानों को माता नयना देवी की शक्ति से जुड़ा हुआ माना जाता है।
Naina Devi Mandir, नैनीताल (उत्तराखंड)


उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल में स्थित नैना देवी मंदिर, नैनी झील के उत्तरी किनारे पर मौजूद है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी नैनीताल की पहचान है।
धार्मिक मान्यता
कहा जाता है कि माता सती की आंखें इसी स्थान पर गिरी थीं और उन्हीं से नैनी झील की उत्पत्ति हुई। इसलिए झील और मंदिर को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जाता।
वास्तुकला
मंदिर की बनावट सरल है, लेकिन गर्भगृह में स्थापित माता की दो नेत्रों के प्रतीक भक्तों को गहरी आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं।
विशेष आयोजन
- नवरात्रि में विशेष पूजा
- प्रतिदिन सुबह और शाम आरती
- पूर्णिमा और अमावस्या पर विशेष अनुष्ठान
Naina Devi Mandir, हिमाचल प्रदेश (बिलासपुर)


हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले की शिवालिक पहाड़ियों पर स्थित नैना देवी मंदिर को देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है।
धार्मिक महत्व
यहां माता नयना देवी की पिंडी रूप में पूजा होती है। मान्यता है कि माता यहां भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और विशेष रूप से नेत्र रोगों से मुक्ति देती हैं।
श्रावण अष्टमी और नवरात्रि मेला
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह मेला हिमाचल के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है।
रोपवे सुविधा
वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के लिए रोपवे यात्रा एक बड़ी सुविधा है, जो दर्शन को आसान बनाती है।
नैनीताल और हिमाचल के Naina Devi Mandir में अंतर और समानता
समानताएं
- दोनों ही माता सती के नयनों से जुड़े हैं
- दोनों स्थानों को शक्ति उपासना का केंद्र माना जाता है
- नवरात्रि में विशेष पूजा और भीड़
अंतर
- नैनीताल का मंदिर झील किनारे स्थित है
- हिमाचल का मंदिर पहाड़ी चोटी पर स्थित शक्तिपीठ है
- हिमाचल मंदिर में बड़े धार्मिक मेले लगते हैं
Naina Devi Mandir दर्शन का सही समय
- नैनीताल: मार्च से जून, सितंबर से नवंबर
- हिमाचल: मार्च से अक्टूबर, विशेषकर नवरात्रि और श्रावण अष्टमी
कैसे पहुंचें
नैनीताल (उत्तराखंड)
- रेल: काठगोदाम
- हवाई: पंतनगर
- सड़क: हल्द्वानी से सीधा मार्ग
हिमाचल (बिलासपुर)
- रेल: आनंदपुर साहिब
- हवाई: चंडीगढ़
- सड़क: चंडीगढ़ और बिलासपुर से बस सुविधा
Naina Devi Mandir से जुड़ी आस्थाएं
- सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है
- मानसिक तनाव और नेत्र रोगों में राहत मिलती है
- माता अपने भक्तों की रक्षा स्वयं करती हैं
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में Naina Devi Mandir जैसे स्थल लोगों को ठहराव, विश्वास और शांति देते हैं। चाहे वह नैनीताल की झील के किनारे स्थित मंदिर हो या हिमाचल की पहाड़ियों पर बसा शक्तिपीठ, दोनों ही स्थान आत्मा को सुकून देने वाले हैं।
निष्कर्ष
Naina Devi Mandir उत्तराखंड और हिमाचल, दोनों ही रूपों में माता शक्ति की उपासना का प्रतीक है।
नैनीताल का मंदिर जहां सौंदर्य और शांति का अनुभव कराता है, वहीं हिमाचल का मंदिर शक्ति और भक्ति का विराट स्वरूप दिखाता है।
इन दोनों स्थानों के दर्शन करने से आस्था और आत्मिक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव होता है।
FAQs:
Q1. Naina Devi Mandir कितने स्थानों पर प्रसिद्ध है?
मुख्य रूप से नैनीताल (उत्तराखंड) और बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) में।
Q2. क्या दोनों मंदिर शक्तिपीठ माने जाते हैं?
हिमाचल का मंदिर प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है, जबकि नैनीताल का मंदिर माता के नयनों से जुड़ा है।
Q3. Naina Devi Mandir जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
मार्च से अक्टूबर तक का समय सबसे उपयुक्त है।
Q4. क्या हिमाचल के Naina Devi Mandir में रोपवे है?
हां, वहां रोपवे सुविधा उपलब्ध है।
Q5. क्या नवरात्रि में विशेष पूजा होती है?
दोनों ही स्थानों पर नवरात्रि में विशेष पूजा और आयोजन होते हैं।
Uttarakhand
ठंड ने बढ़ाई टेंशन! 15 जनवरी को इस जिले…के सभी स्कूल बंद

Haridwar news: 15 जनवरी को सभी स्कूल बंद, मौसम अलर्ट के बाद डीएम का बड़ा फैसला
मुख्य बिंदु
Haridwar news: उत्तराखंड में बढ़ती ठंड और शीतलहर का असर लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून ने अगले 7 दिनों के लिए कड़े मौसम अलर्ट जारी किए हैं। इसके मद्देनज़र, हरिद्वार जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। 15 जनवरी 2026 को हरिद्वार जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है।
कल बंद रहेंगे हरिद्वार में सभी स्कूल (haridwar school closed)
डीएम हरिद्वार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी, अशासकीय तथा सहायता प्राप्त विद्यालय बंद रहेंगे। साथ ही, आंगनबाड़ी केंद्रों को भी बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए ठंड एवं कोहरे की गंभीर स्थिति को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक हो गया।

आदेश का पालन न करने पर होगी सख्त कार्रवाई
वहीं, प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि अवकाश के दौरान ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रखी जा सकती है। इसके अलावा, सभी उप जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, यदि किसी संस्था द्वारा आदेश का उल्लंघन किया गया, तो उसके खिलाफ उत्तराखंड प्रचलन अधिनियम–2005 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि बच्चों को अनावश्यक ठंड में बाहर न निकलने दें। साथ ही, मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन अवश्य करें। इसलिए, अगले कुछ दिनों तक सतर्क रहना ही सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
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हल्द्वानी में हुई हिंसा को देखते हुए सभी विद्यालयों रहेगी बंद, सुरक्षा की दृष्टि से लिया फैसला।
Uttarkashi
उत्तरकाशी से सीएम धामी ने कही बड़ी बात, उत्तराखंड बनेगा देश का ‘नेचुरल हीलिंग डेस्टिनेशन

Uttarkashi News : शीतकालीन चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा स्थानीय लोगों को वर्षभर रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तहत तीन दिवसीय विंटर टूरिज्म कॉनक्लेव का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुभारंभ किया।
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सीएम ने किया विंटर टूरिज्म कॉनक्लेव का शुभारंभ
Uttarkashi में कॉनक्लेव में एसोसिएशन ऑफ डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर्स ऑफ इंडिया के सहयोग से देश के विभिन्न राज्यों से आए 50 टूर ऑपरेटर्स ने प्रतिभाग किया। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर से 50 और स्थानीय स्तर से भी 50 टूर ऑपरेटर्स ने कॉनक्लेव में भाग लिया। कार्यक्रम में होटल एसोसिएशन उत्तरकाशी एवं बड़कोट, ट्रैकिंग संगठन उत्तरकाशी और सांकरी के पंजीकृत प्रतिनिधियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।
निम में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से शीतकालीन पर्यटन की संभावनाओं पर मंथन किया गया तथा उत्तराखंड को वर्षभर पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। तीन दिवसीय विंटर टूरिज्म कॉन्क्लेव के तहत मां गंगा का शीतकालीन प्रवास मुखबा, मां यमुना का खरसाली और सांकरी में केदारकांठा ट्रैक बेस केम्प का देश भर के टूर ऑपरेटर भ्रमण करेंगे तथा शीतकालीन टूरिज्म को बढ़ावा देंगे।
शीतकालीन पर्यटन सम्मेलन पर्यटन को नई दिशा देने का प्रयास
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विंटर टूरिज्म कान्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि शीतकालीन पर्यटन सम्मेलन केवल एक औपचारिक संवाद नहीं,बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन को नई दिशा देने का एक साझा प्रयास है। उन्होंने टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट्स, होटल व्यवसायियों, होम-स्टे संचालकों, टैक्सी और ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रतिनिधियों, एडवेंचर टूरिज्म से जुड़े लोगों का स्वागत और उत्साहवर्धन किया।
उत्तराखंड बनेगा देश का ‘नेचुरल हीलिंग डेस्टिनेशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के बड़े शहर प्रदूषण, बढ़ते तापमान, ट्रैफिक और तनाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड देश का एक “नेचुरल हीलिंग डेस्टिनेशन” बन सकता है और सरकार इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब केवल चारधाम यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वेलनेस, नेचर, एडवेंचर, कल्चर, योग, मेडिटेशन और सस्टेनेबल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
मुख्यमंत्री ने टूर ऑपरेटर्स की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ट्रेंड बनाना और किसी डेस्टिनेशन को ब्रांड बनाना आप सभी के हाथ में है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि उत्तराखंड को केवल 4 या 6 महीने का नहीं, बल्कि 12 महीने का टूरिज्म स्टेट बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की शीतकालीन पर्यटन नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पहाड़ खाली न रहें, होटल बंद न हों, टैक्सियां खड़ी न रहें, होमस्टे सूने न रहें और युवाओं को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। जब 12 महीने पर्यटन सक्रिय रहेगा तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा।
Uttarkashi में टूरिज्म से जुड़े हितधारकों से भी किया संवाद
मुख्यमंत्री ने टूरिज्म से जुड़े सभी हितधारकों से संवाद करते हुए कहा कि चाहे परमिशन हो, कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर या मार्केटिंग सपोर्ट—सरकार हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार है। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल अप्रूवल और निवेशकों के लिए फास्ट-ट्रैक सपोर्ट को और मजबूत किया जा रहा है।
Uttarkashi में मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन का अर्थ केवल बड़े होटल नहीं,बल्कि जब गांव की महिला का होमस्टे भरे, स्थानीय युवा टैक्सी चलाएं, पहाड़ी युवक ट्रेकिंग गाइड बनें, लोक कलाकारों को मंच मिले और किसान के उत्पाद सीधे पर्यटक तक पहुंचें—तभी पर्यटन सार्थक होगा। इसी उद्देश्य से सरकार ने होमस्टे नीति को सरल बनाया है, लखपति दीदी योजना से महिलाओं को जोड़ा है, लोकल गाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए हैं और “वोकल फॉर लोकल” को पर्यटन से जोड़ा है।
Nainital
नैनीताल धारी ब्लॉक में दो गुलदार पिजंरे में कैद, तीन महिलाओं को उतारा था मौत के घाट

Nainital News : नैनीताल के धारी ब्लॉक में वन विभाग के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। धारी ब्लॉक में आतंक के पर्याय बने दो गुलदारों पिंजरे में कैद हो गए हैं। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है।
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नैनीताल धारी ब्लॉक में दो गुलदार पिजंरे में कैद
नैनीताल के धारी ब्लॉक में बीते दिनों हमला कर तीन महिलाओं को मौत के घाट उतारने वाले क्षेत्र से दो गुलदारों को पिंजरे में कैद किया गया है। तीन महिलाओं की मौत के बाद से इलाके में लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा था। लोग लगातार गुलादर को मारने की मांग कर रहे थे।
गुलदार को पकड़ने के लिए लगाए गए थे दस से ज्यादा पिंजरे
वन विभाग ने दस से अधिक पिंजरे, 50 से अधिक कैमरा ट्रैप गुलदार को पकड़ने के लिए लगाए थे। लगातार विभागीय टीम की गश्ती से हमलावर वन्यजीवों पर नजर रखी जा रही थी। जिसके बाद दो गुलदारों को पकड़ने में कामयाबी मिली है।
तीन महिलाओं को उतारा था मौत के घाट
बता दें कि पिछले माह 26 दिसंबर को धारी के दीनी तल्ली में हमलावर गुलदार ने हेमा बरगली को मार डाला था। इसके बाद, 30 दिसंबर को खन्स्यु के चमोली गांव में गुलदार ने चारा और लकड़ी लेने गई एक महिला को अपना निवाला बनाया था। विगत 11 जनवरी को नैनीताल के धारी ब्लॉक में गुलदार ने महिला को मौत के घाट उतारा और जंगल में घसीट ले गया था।
एस.डी.ओ.ममता चंद ने बताया कि आज, तल्ली दीनी के समीप लगे पिंजरे में एक और मवेशियों पर हमला करने वाले क्षेत्र से दूसरा गुलदार पिंजरे में कैद हुआ है। इन्हें, रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर लाया जाएगा। बताया कि इनके सैंपल मृतकों से मैच कराने के लिए भेजे जाएंगे। उन्होंने, ये भी कहा कि गश्त टीमें उन क्षेत्रों में लगातार बनी रहेंगी।
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