Uttarakhand
नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026: मुख्यमंत्री धामी ने काउंटडाउन रन को दिखाई हरी झंडी, शुभंकर ‘क्यालु’ का किया अनावरण

नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026‘ के काउंटडाउन रन कार्यक्रम का फ्लैग ऑफ किया। इस दौरान उन्होंने मशाल प्रज्ज्वलित कर प्रतीकात्मक दौड़ में प्रतिभाग भी किया। इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री ने 31 मई 2026 को आयोजित होने वाले ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ के आधिकारिक शुभंकर (मस्कट) “क्यालु- हिम तेंदुआ” का अनावरण किया।
सीमांत क्षेत्रों में नई ऊर्जा का संचार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन केवल एक दौड़ प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह हमारे सीमांत क्षेत्रों में नई ऊर्जा, नए अवसर और नए विश्वास को जागृत करने का एक बड़ा अभियान है। युवाओं के उत्साह और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के युवाओं में साहस, संकल्प और देश के लिए कुछ बड़ा करने का जज्बा कूट-कूट कर भरा है। आज यहां गूंज रहे युवाओं के कदम आने वाले समय में नीति घाटी की ऊंचाइयों पर इतिहास रचेंगे।

चुनौतियों को स्वीकार करने का साहस
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति घाटी जैसे दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में दौड़ने के लिए बुलंद हौंसला, हिमालय जैसा अडिग विश्वास और चुनौतियों को स्वीकार करने का साहस आवश्यक है। यह दौड़ केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति, धैर्य और आत्मविश्वास को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को देवभूमि उत्तराखंड के साहस, पर्यटन और सामर्थ्य का ब्रांड एंबेसडर बताया।
नए उत्तराखंड की बढ़ती शक्ति
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि आज उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ता हुआ एक ‘नया उत्तराखंड’ है। नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन इसी नए उत्तराखंड की शक्ति और सामर्थ्य के प्रदर्शन का प्रतीक बनेगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को याद करते हुए कहा कि:
“सीमावर्ती गांव देश के अंतिम नहीं, बल्कि पहले गांव हैं।”
इस आयोजन के माध्यम से प्रधानमंत्री का यह विजन पूरी तरह साकार हो रहा है। यह महाआयोजन सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन, रोजगार, होमस्टे, स्थानीय उत्पादों और युवा उद्यमिता को एक नई गति प्रदान करेगा।
27 राज्यों और 2 देशों से आए 900+ प्रतिभागी
आगामी 31 मई को नीति घाटी की पावन एवं दुर्गम धरती पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम उत्तराखंड के खेल एवं एडवेंचर टूरिज्म के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिखेगा। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि देश के 27 राज्यों और 2 अन्य देशों से 900 से अधिक प्रतिभागियों ने इस महाआयोजन के लिए अपना पंजीकरण कराया है, जो युवाओं के बीच इस आयोजन के प्रति बढ़ते आकर्षण का सीधा प्रमाण है।
खेल और फिटनेस को जनआंदोलन बनाने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया और राष्ट्रीय खेलों जैसे अभियानों के माध्यम से खेल और फिटनेस को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है। राज्य सरकार भी उत्तराखंड को देश का अग्रणी एडवेंचर स्पोर्ट्स एवं स्पोर्ट्स टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
अंत में, मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वे पूरे आत्मविश्वास और ऊर्जा के साथ इस दौड़ में प्रतिभाग करें, इसे सुरक्षित रूप से पूर्ण करें और 31 मई को नीति घाटी में एक नया इतिहास रचें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों को इस कार्यक्रम की सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी।
Haridwar
हरिद्वार के धनोरी में कॉलेज की बिल्डिंग गिरी, मलबे में दबने से एक पीएसी जवान घायल

Haridwar News : हरिद्वार जिले के धनौरी में सोमवार को एक हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई। पिरान कलियर थाना क्षेत्र स्थित अमृत लॉ कॉलेज परिसर में बनी एक इमारत का हिस्सा अचानक गिर पड़ा। इस दौरान एक पीएसी जवान के मलबे में दबने की सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस और राहत टीम ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
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हरिद्वार के धनोरी में कॉलेज की बिल्डिंग गिरी
जानकारी के मुताबिक, कानून व्यवस्था की ड्यूटी के लिए पीएसी की एक प्लाटून अमृत लॉ कॉलेज परिसर में ठहरी हुई थी। इसी दौरान पीएसी जवान आदिल कॉलेज में मौजूद थे। बताया गया कि जब वह बाथरूम इस्तेमाल करने गए, तभी अचानक इमारत का एक हिस्सा ढह गया और वह मलबे में फंस गए।
मलबे में दबने से एक पीएसी जवान घायल
घटना की जानकारी मिलते ही पिरान कलियर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कमल मोहन भंडारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू किया। इसके साथ ही आपदा राहत टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया।

घायल जवान को ऋषिकेश स्थित एम्स के लिए किया रेफर
रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद मलबे में दबे जवान आदिल को घायल अवस्था में बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने जवान की स्थिति को देखते हुए उन्हें ऋषिकेश स्थित एम्स के लिए रेफर कर दिया।
बताया गया है कि घायल पीएसी जवान आदिल मूल रूप से पौड़ी जिले के रहने वाले हैं। हादसे के समय प्लाटून के अन्य जवान अपनी-अपनी ड्यूटी पर गए हुए थे। फिलहाल जवान की हालत नाजुक बताई जा रही है।
Almora
अल्मोड़ा में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने से लोग परेशान, मरीज 100 किमी दूर जाने को मजबूर

Almora News : उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में मेडिकल कॉलेज सहित कई सरकारी स्वास्थ्य संस्थान संचालित होने के बावजूद हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी बनी हुई है। जिस कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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अल्मोड़ा में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं लोग परेशान
जिले में फिलहाल कोई कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं होने के कारण हृदय संबंधी गंभीर मरीजों को उपचार के लिए हल्द्वानी या दूसरे बड़े चिकित्सा केंद्रों में भेजना पड़ रहा है। पहाड़ी इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए यह रेफरल व्यवस्था कई बार चुनौतीपूर्ण साबित होती है।
मरीज 100 किमी दूर जाने को मजबूर
सरकारी अस्पतालों में दिल से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की शुरुआती जांच और उपचार फिजिशियन द्वारा किया जाता है। आवश्यक परीक्षण के बाद जरूरत पड़ने पर मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर दिया जाता है। खासकर हार्ट अटैक के मामलों में शुरुआती समय बेहद अहम होता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सक की सुविधा नहीं होने से मरीज को आगे भेजने में लगने वाला समय चिंता का विषय बन जाता है।
मरीज हल्द्वानी जा रहे इलाज के लिए
अल्मोड़ा जिले के दूरदराज के गांवों से हल्द्वानी पहुंचने में करीब 100 से 200 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ सकता है। पहाड़ी भूगोल, संकरी सड़कें और कई स्थानों पर यातायात बाधित होने की स्थिति में एंबुलेंस को लंबा समय लग सकता है। गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने के दौरान लगातार निगरानी, ऑक्सीजन और जरूरी चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है।

स्थानीय लंबे समय से कर रहे हैं कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ की मांग
पहाड़ी मार्गों पर जाम या सड़क संबंधी दिक्कतों के चलते एंबुलेंस के समय पर आगे नहीं बढ़ पाने की समस्या भी सामने आती रही है। ऐसे हालात में गंभीर मरीजों को समय पर जरूरी मेडिकल सपोर्ट उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है। खासकर हृदय संबंधी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने में देरी मरीज की स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
स्थानीय लोग लंबे समय से अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ की नियमित सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जिले में ही हृदय रोग विशेषज्ञ की सुविधा मिले तो मरीजों को शुरुआती स्तर पर बेहतर उपचार मिल सकेगा और गंभीर मामलों में दूसरे शहरों के अस्पतालों पर निर्भरता भी कम होगी।
Uttarakhand
हरीश रावत की सक्रियता से कांग्रेस में हलचल, प्रदेश प्रभारी सैलजा ने चिट्ठी लिखकर जताई आपत्ति

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की सक्रिय राजनीति में वापसी के बाद पार्टी के भीतर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्वास्थ्य लाभ के बाद प्रदेश लौटे रावत लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम कर रहे हैं। उनके रोड शो और विधानसभा क्षेत्रों के दौरों के बीच कांग्रेस संगठन की अपनी चुनावी गतिविधियां भी जारी हैं।
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हरीश रावत की सक्रियता से कांग्रेस में हलचल
हरीश रावत की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए अब कांग्रेस के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह संगठन की तय गतिविधियों से अलग अपनी राजनीतिक लाइन तैयार कर रहे हैं। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा है कि ऐसे मामलों पर पार्टी फोरम में चर्चा की जाएगी और आपसी विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने हरीश रावत को पार्टी का वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि उनसे हाल में कई मुद्दों पर बातचीत हुई है।
प्रदेश प्रभारी सैलजा ने चिट्ठी लिखकर जताई आपत्ति
हरीश रावत की प्रस्तावित यात्रा और कार्यक्रमों को लेकर कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने उन्हें पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा कि यात्रा को लेकर उनसे या प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा नहीं की गई। सैलजा ने चुनावी समय का हवाला देते हुए पार्टी में एकजुटता बनाए रखने की जरूरत बताई और समानांतर कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया।

सैलजा की इस चिट्ठी के बाद रावत की सक्रियता को लेकर कांग्रेस के भीतर चल रही चर्चा और तेज हो गई है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और संगठन की ओर से भी लगातार कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी सक्रियता
हरीश रावत पहले ही कह चुके हैं कि वो आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसके बावजूद चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं बनी हुई हैं। प्रदेश लौटने के बाद उनके लगातार कार्यक्रमों ने इन चर्चाओं को और हवा दी है।
अब कांग्रेस के सामने एक ओर संगठन की चुनावी रणनीति है, तो दूसरी ओर हरीश रावत की व्यक्तिगत राजनीतिक सक्रियता। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों के बीच बेहतर समन्वय बनता है या रावत की गतिविधियां पार्टी के भीतर अलग राजनीतिक धुरी की चर्चा को और मजबूत करती हैं।
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