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उत्तराखंड: ऊखीमठ में आज से शुरू होगी बाबा केदार की शीतकालीन पूजा

रुद्रप्रयाग: स्थानीय वाद्य यंत्रों की सुरमई धुनों, आर्मी बैंड की तालों और हजारों भक्तों की गूंजती जयकारों के बीच बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली शुक्रवार देर सायं अपने द्वितीय रात्रि प्रवास के लिए गुप्तकाशी पहुंची। बाबा केदार की डोली के आगमन पर गुप्तकाशी में श्रद्धा और उल्लास का माहौल छा गया। श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा और भक्ति गीतों के साथ डोली का भव्य स्वागत किया।
बाबा केदार की यह दिव्य डोली भैया दूज के पावन पर्व पर केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ की ओर रवाना हुई थी। पहले दिन डोली का रात्रि प्रवास रामपुर में हुआ…जहां शुक्रवार प्रातः विशेष पूजा-अर्चना और आरती के साथ डोली ने आगे का सफर शुरू किया। यात्रा मार्ग में फाटा, ब्यूंग, नारायणकोटी सहित कई पड़ावों पर भक्तों ने बाबा की आरती उतारी और आशीर्वाद लिया।
गुप्तकाशी पहुंचने पर डोली का स्वागत पुष्प वर्षा, ढोल-दमाऊं और शंखनाद के साथ किया गया। विश्वनाथ मंदिर परिसर में बाबा की डोली की अगवानी के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा। गुप्तकाशी की गलियाँ जय बाबा केदार! हर-हर महादेव! के नारों से गूंज उठीं। आज सुबह डोली अपने अंतिम पड़ाव ऊखीमठ के लिए रवाना होगी…जहां ओंकारेश्वर मंदिर में बाबा केदार की भोग मूर्ति विराजमान की जाएगी।
ऊखीमठ पहुंचने के बाद अगले छह माह तक बाबा केदार की पूजा-अर्चना यहीं की जाएगी। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अब शीतकाल के दौरान ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में दर्शन कर सकेंगे। यह मंदिर न केवल केदारनाथ धाम का शीतकालीन गद्दीस्थल है, बल्कि इसे पंचकेदारों के संयुक्त दर्शन स्थल के रूप में भी जाना जाता है।
शीतकालीन यात्रा के चलते ऊखीमठ और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिल रहा है। ओंकारेश्वर मंदिर के पास स्थित प्रसिद्ध स्थल चोपता और चंद्रशिला ट्रेक के कारण श्रद्धालु और पर्यटक दोनों बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल बाबा केदार के दर्शन करते हैं, बल्कि रुद्रप्रयाग जनपद के अन्य मठ-मंदिरों और प्राकृतिक स्थलों का भी आनंद लेते हैं।
मान्यता है कि जो भक्त पंचकेदारों के दर्शन नहीं कर पाते वे ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में एक साथ सभी के दर्शन कर सकते हैं। इसी आस्था के कारण शीतकाल के दौरान यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से सराबोर रहता है। भक्तों की आस्था, भक्ति और उत्साह से केदारघाटी इन दिनों पूरी तरह केदारमय हो गई है। हर तरफ सिर्फ एक ही स्वर गूंज रहा है।
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केदारनाथ धाम में बर्फबारी, सफेद चादर से ढकी बाबा की नगरी, दिखा मनमोहक नजारा

Rudraprayag News : केदारनाथ धाम में बृहस्पतिवार सुबह हुई बर्फबारी के बाद बाबा केदार की नगरी बर्फ की सफेद चादर से ढक गई। बर्फ से ढके धाम का मनमोहक नजारा देखकर श्रद्धालु उत्साहित नजर आए। भक्त इस खूबसूरत दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते दिखे, तो कई श्रद्धालुओं ने सेल्फी लेकर इन पलों को यादगार बनाया। हालांकि, बर्फबारी के चलते धाम में ठंड भी बढ़ गई है।
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केदारनाथ धाम में बर्फबारी, सफेद चादर से ढकी बाबा की नगरी
रुद्रप्रयाग जिले के निचले क्षेत्रों में भी मौसम का असर देखने को मिला। जिला मुख्यालय के साथ ही ऊखीमठ, गुप्तकाशी, जखोली और बसुकेदार क्षेत्र में सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और हल्की बारिश हुई। मौसम में आए बदलाव के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई।
कपाट बंद होने से पहले दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु
केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाने हैं। कपाट बंद होने की तारीख नजदीक आने के साथ ही बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। बर्फबारी और बढ़ती ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कमी नहीं आई है। श्रद्धालु मौसम की चुनौतियों के बीच बाबा केदार के दर्शन कर रहे हैं।

केदारनाथ में 18.53 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
इस यात्रा सीजन में अब तक 18 लाख 53 हजार से अधिक श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंच चुके हैं। बुधवार को 8,376 श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। इसके साथ ही इस साल धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या बढ़कर 18,53,032 हो गई है।
कपाट बंद होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का सिलसिला लगातार जारी है। बर्फबारी के बाद धाम का नजारा और भी आकर्षक हो गया है, जिससे यहां पहुंच रहे भक्तों को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत अनुभव मिल रहा है।
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देवप्रयाग में दर्दनाक हादसा, खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत, तीन घायल

Devprayag News : उत्तराखंड में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला देवप्रयाग का है, जहां एक वैगनआर कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में चालक समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
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देवप्रयाग में खाई में गिरी कार, चालक समेत दो की मौत
देवप्रयाग में दर्दनाक हादसा हो गया। मिली जानकारी के मुताबिक, कार चंडीगढ़ से रुद्रप्रयाग जा रही थी। देवप्रयाग से करीब चार किलोमीटर श्रीनगर की ओर ग्राम पाली में रिवर व्यू कैफे एंड रेस्टोरेंट के पास वाहन अचानक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। कार में चालक सहित पांच लोग सवार थे।
पुलिस ने चलाया रेस्क्यू अभियान
हादसे की सूचना मिलने पर देवप्रयाग पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस टीम ने रेस्क्यू अभियान चलाकर खाई में फंसे लोगों को बाहर निकाला। तीन घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी, देवप्रयाग पहुंचाया गया। दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस हादसे के कारणों का लगा रही पता
पुलिस ने मृतकों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। हादसे में सत्येश्वरी देवी (72), पत्नी हुकम सिंह चौहान, निवासी किमखाल, थाना कर्णप्रयाग, जिला चमोली और अनिल, पुत्र सुदर्शन, निवासी किमोली, जिला चमोली की मौत हो गई।
हादसे में चार तीन लोग घायल
- उत्तम सिंह (33), पुत्र मोहन सिंह, निवासी लाडोली, रुद्रप्रयाग।
- टीशा रावत (18), पुत्री लक्ष्मण सिंह रावत, निवासी बीना, थाना रुद्रप्रयाग।
- सुनीता देवी (45), पत्नी लक्ष्मण सिंह रावत, निवासी बीना, थाना रुद्रप्रयाग।
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तुंगनाथ-चोपता जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट, प्लास्टिक ले जाने पर लगेगी रोक

Rudraprayag News : उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल तुंगनाथ और चोपता की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने के लिए वन विभाग ने स्वच्छता अभियान तेज करने का फैसला लिया है।
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तुंगनाथ-चोपता जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की ओर से क्षेत्र में 100 स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे। इसके साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के प्लास्टिक लेकर आने पर रोक लगाने की व्यवस्था भी तैयार की जा रही है।
अभियान के तहत अब तक क्षेत्र से करीब 5,000 किलोग्राम कचरा एकत्र किया जा चुका है। इस मुहिम में स्थानीय लोगों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी साफ-सफाई बनाए रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

प्लास्टिक ले जाने पर लगेगी रोक
समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। चोपता क्षेत्र भी पर्यटकों के बीच खासा लोकप्रिय है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही के साथ यहां कचरे की समस्या भी बढ़ी है, जिससे प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने की चुनौती सामने आई है।
नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं सफाई अभियान
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डीएफओ रजत सुमन के मुताबिक, तुंगनाथ और चोपता में नियमित रूप से सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए साइन बोर्ड लगाए जा रहे हैं और रैलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है।
वन विभाग की योजना है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे श्रद्धालु और पर्यटक अपने साथ प्लास्टिक लेकर क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें। इस पहल का उद्देश्य तुंगनाथ और चोपता को कचरे से मुक्त रखना, पर्यावरण की रक्षा करना और इस खूबसूरत क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाए रखना है।







































