Uttarakhand
धामी मॉडल ने तोड़ी सत्ता परिवर्तन की पुरानी परिपाटी, मार्च महीने को लेकर स्थापित धारणा को किया धवस्त

Uttarakhand Politics : उत्तराखंड में आज चार सालों के इंतजार के बाद कैबिनेट विस्तार हो गया है। इसके साथ ही प्रदेश में चल रही तमाम अटकलों पर लगाम लग गई है। इसके साथ ही मार्च के महीने को लेकर प्रदेश की सत्ता परिवर्तन की पुरानी परिपाटी को भी तोड़ दिया है।
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धामी मॉडल ने तोड़ी सत्ता परिवर्तन की पुरानी परिपाटी
उत्तराखंड की राजनीति में वर्षों से एक अनकही परंपरा चली आ रही थी कार्यकाल का अंतिम वर्ष आते-आते, विशेषकर मार्च के आसपास, नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय मान लिया जाता था। ये एक तरह से राजनीतिक अस्थिरता का प्रतीक बन चुकी थी। लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्थापित धारणा को न केवल चुनौती दी, बल्कि उसे निर्णायक रूप से ध्वस्त कर दिया।
मार्च महीने को लेकर स्थापित धारणा को किया धवस्त
धामी के नेतृत्व में पहली बार भाजपा ने उत्तराखंड में मुख्यमंत्री को रिपीट कर स्थिरता का संदेश दिया था और अब पांचवें वर्ष में मंत्रिमंडल विस्तार कर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यह सरकार परंपरागत राजनीति से अलग, आत्मविश्वास और प्रदर्शन की राजनीति पर चल रही है। जहां विरोधी दल यह अनुमान लगा रहे थे कि इतिहास खुद को दोहराएगा और धामी को भी बदला जाएगा, वहीं धामी ने एक सधे हुए राजनीतिक कौशल के साथ पूरा परिदृश्य ही बदल दिया।

इस महत्वपूर्ण मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सरकार ने क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन को भी साधने का प्रयास किया है। शपथ लेने वाले जनप्रतिनिधियों में भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा, राजपुर रोड (देहरादून) से खजान दास, रुड़की से प्रदीप बत्रा, रुद्रप्रयाग से भरत सिंह चौधरी तथा हरिद्वार से मदन कौशिक शामिल हैं। इन नेताओं का अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक पकड़ न केवल मंत्रिमंडल को और सशक्त बनाएगी, बल्कि धामी सरकार की विकासात्मक प्राथमिकताओं को भी नई गति प्रदान करेगी।
मंत्रिमंडल विस्तार सशक्त राजनीतिक संदेश
ये मंत्रिमंडल विस्तार केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि एक सशक्त राजनीतिक संदेश है नेतृत्व में विश्वास, संगठन में संतुलन और भविष्य की स्पष्ट रणनीति। धामी ने यह दिखाया है कि वे परिस्थितियों के शिकार नहीं बल्कि उन्हें अपने पक्ष में मोड़ने वाले नेतृत्वकर्ता हैं।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू ये है कि धामी ने न केवल प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत की है बल्कि केंद्रीय नेतृत्व का भी पूर्ण विश्वास अर्जित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और शीर्ष संगठन तक, जिस प्रकार धामी को निरंतर समर्थन मिला है, वह उनकी विश्वसनीयता और कार्यक्षमता का प्रमाण है।
Uttarkashi
उत्तरकाशी में दर्दनाक हादसा, पीएचसी आराकोट में आग लगने से सेवानिवृत्त ANM की मौत

Uttarkashi News : उत्तरकाशी के मोरी विकासखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आराकोट के पुराने भवन में मंगलवार देर रात अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरा भवन इसकी चपेट में आ गया और जलकर राख हो गया। हादसे में भवन में रह रहीं सेवानिवृत्त एएनएम पार्वती जैन की दर्दनाक मौत हो गई।
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उत्तरकाशी में पीएचसी आराकोट में लगी भीषण आग
मंगलवार देर रात पुराने स्वास्थ्य केंद्र भवन में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पूरे भवन को घेर लिया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने के लिए मोरी और त्यूणी के साथ ही पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू से भी अग्निशमन वाहन बुलाए गए।
सेवानिवृत्त ANM की जिंदा जलने से मौत
तीनों स्थानों से पहुंची दमकल टीमों और पुलिस-प्रशासन ने कई घंटे तक आग बुझाने का प्रयास किया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया जा सका, लेकिन तब तक स्वास्थ्य केंद्र का पुराना भवन पूरी तरह जल चुका था। हादसे के दौरान भवन के अंदर मौजूद सेवानिवृत्त एएनएम पार्वती जैन की जान नहीं बच सकी। वो लंबे समय से इसी पुराने स्वास्थ्य केंद्र भवन में अकेली रह रही थीं।

उनकी मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पार्वती जैन स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद से वर्षों से इसी भवन में निवास कर रही थीं। सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन सिंह चौहान ने बताया कि पार्वती जैन मूल रूप से देहरादून के आराघर क्षेत्र की रहने वाली थीं। उनके पास समय-समय पर उनकी एक मुंहबोली बेटी भी मिलने आती थी।
हादसे में उनकी मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना की जांच की जा रही है और आग लगने के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
Rudraprayag
रूद्रप्रयाग में विजिलेंस का एक्शन, दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने के लिए रिश्वत लेते डॉक्टर गिरफ्तार

Rudraprayag News : रूद्रप्रयाग से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां विजिलेंस की टीम के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। टीम ने जिला अस्पताल में तैनात एक ऑर्थोपेडिक सर्जन को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
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रूद्रप्रयाग में 5 हजार की रिश्वत लेते डॉक्टर गिरफ्तार
रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में तैनात एक ऑर्थोपेडिक सर्जन को विजिलेंस टीम ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। डॉक्टर पर आरोप है कि उसने दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने के बदले एक व्यक्ति से पांच हजार रुपये की मांग की थी।
शिकायतकर्ता की शिकायत पर हुई कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने मामले की जांच शुरू की और मंगलवार को जिला अस्पताल में कार्रवाई की। इसी दौरान टीम ने डॉक्टर को शिकायतकर्ता से पांच हजार रुपये लेते हुए मौके पर ही पकड़ लिया। इस कार्रवाई से मौके पर हड़कंप मच गया।
आवास पर भी विजिलेंस ने की छापेमारी
गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम ने डॉक्टर के आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। मामले में आगे की कार्रवाई के लिए आरोपी डॉक्टर को विजिलेंस टीम देहरादून लेकर आएगी। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
big news
वोटर लिस्ट पर बड़ा अपडेट, SIR हुआ खत्म, 3 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

Uttarakhand News : उत्तराखंड में चुनाव आयोग की ओर से चलाया गया विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर सोमवार रात 12 बजे समाप्त हो गया। प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही मतदाता सूची से संबंधित पूरा डाटा फ्रीज कर दिया गया है। अब इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
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वोटर लिस्ट पर बड़ा अपडेट, SIR हुआ खत्म
वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। एसआईआर खत्म हो गया है और अब आयोग तीन अक्तूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करेगा। इसके बाद साफ हो जाएगा कि पुनरीक्षण के दौरान कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए और कितने नए नाम सूची में शामिल हुए।
3 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची
उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया आठ जून से शुरू की गई थी। इसके तहत बीएलओ के माध्यम से मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाए गए और इन्हें भरकर सात जुलाई तक जमा कराया गया। इसके बाद 14 जुलाई को मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया गया। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 14 जुलाई से 13 अगस्त तक का समय दिया गया था। इन दावों और आपत्तियों की जांच, सुनवाई और निस्तारण की प्रक्रिया 10 जुलाई से 28 सितंबर तक चली।
पहले 15 सितंबर को जारी होनी थी अंतिम मतदाता सूची
पहले अंतिम मतदाता सूची 15 सितंबर को जारी की जानी थी, लेकिन पांच जिलों के मतदाताओं के उत्तर प्रदेश से सत्यापन की प्रक्रिया के चलते इसकी तारीख आगे बढ़ा दी गई। अब यह सूची तीन अक्तूबर को जारी होगी।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के मुताबिक, एसआईआर का डाटा अब पूरी तरह फ्रीज हो चुका है और इसमें किसी भी तरह का परिवर्तन संभव नहीं है। हालांकि, जिन लोगों के नाम छूट गए हैं या जो नए मतदाता हैं, उन्हें आगे फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।

करीब आठ लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटे
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से चलाया गया ये अभियान मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने के उद्देश्य से किया गया। प्री-एसआईआर चरण में ही करीब पांच लाख ऐसे नाम हटाए गए थे, जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी या जो अपना स्थान बदलकर कहीं और जा चुके थे।
इसके बाद एसआईआर के दौरान बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्र उपलब्ध कराए और मतदाता सूची का सत्यापन किया। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद करीब आठ लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। अब अंतिम सूची जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी कि पूरे पुनरीक्षण अभियान के बाद उत्तराखंड की मतदाता सूची में कुल कितने नाम रह गए हैं और कितने नए मतदाता इसमें जुड़े हैं।
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